हर साल दुनिया भर में लाखों लोग अंदरूनी और गहरे मानसिक दर्द से जूझते हैं, लेकिन सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण वे अपनी बात किसी से कह नहीं पाते. यही वजह है कि 'वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे' मनाया जाता है, ताकि लोगों को यह याद दिलाया जा सके कि समय पर मिला सहयोग किसी की जान बचा सकता है. चलिए जानते हैं कि इस साल की थीम क्या है, कैसे पहचानें कि किसी को मदद की जरूरत है और प्रोफेशनल मदद क्यों जरूरी है?
'वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे' का इतिहास
हर साल 10 सितंबर को यह दिन दुनिया भर में इसलिए मनाया जाता है ताकि मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या के बढ़ते खतरों के प्रति जागरूकता फैलाई जा सके. इसे साल 2003 में 'विश्व स्वास्थ्य संगठन' (WHO) और 'अंतर्राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम संघ' (IASP) द्वारा मिलकर शुरू किया गया था ताकि लोग शर्म या डर के बिना मदद मांग सकें और एक-दूसरे का सहारा बन सकें।
साल 2026 की थीम क्या है?
इस साल यानी 2026 की थीम "आत्महत्या की कहानी बदलना" (Changing the Narrative on Suicide) रखी गई है, जिसका सीधा नारा "बातचीत शुरू करें" है. इसका मतलब है कि अब हमें चुप्पी और डर को छोड़कर इस मुद्दे पर खुलकर बात करनी होगी, ताकि कोई भी खुद को अकेला न समझे.
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कैसे पहचानें कि किसी को मदद की जरूरत है?
मानसिक उलझन में फंसा हर इंसान सीधे तौर पर अपनी परेशानी बयां नहीं करता, इसलिए उसके बर्ताव में आ रहे छोटे-छोटे बदलावों को नोटिस करना बहुत जरूरी है,
- खुद को अलग करना: दोस्तों और परिवार से दूर रहना या उन चीज़ों में दिलचस्पी खो देना जो उसे पहले बहुत पसंद थीं.
- उम्मीद छोड़ देना: बार-बार यह कहना कि अब कुछ नहीं सुधर सकता या वह पूरी तरह फंस चुका है.
- व्यवहार और मूड में बदलाव: अचानक बहुत ज्यादा गुस्सा आना, हमेशा उदास रहना या खाने-सोने के रूटीन में बड़ा बदलाव दिखना.
- खुद को बोझ समझना: यह जताना कि उसके न होने से परिवार या दोस्तों का जीवन ज्यादा आसान हो जाएगा.
- अजीब बातें करना: दुनिया से जाने की बातें करना या अपने जरूरी सामान दूसरों को सौंपते हुए अचानक अलविदा कहना.
अपनों की मदद कैसे करें?
अगर आपको किसी पर शक है कि वह मानसिक तनाव में है, तो सबसे पहले उसकी बात को गंभीरता से सुनें. किसी शांत जगह पर बैठकर उससे प्यार से पूछें कि वह कैसा महसूस कर रहा है. उसे यह अहसास कराएं कि आप बिना किसी जजमेंट के उसकी बात सुनने के लिए हमेशा मौजूद हैं. अगर जरूरत महसूस हो, तो उसे किसी अच्छे डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के पास जाने के लिए प्रेरित करें और जरूरत पड़ने पर खुद उसके साथ जाएं.
प्रोफेशनल मदद क्यों जरूरी है?
फोर्टिस हेल्थकेयर में मेंटल हेल्थ प्रोग्राम की डायरेक्टर डॉ. कामना छिब्बर कहती हैं कि अपनों का साथ देना बहुत बड़ी बात है, लेकिन कई बार स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि एक्सपर्ट की जरूरत पड़ती है. एक काउंसलर या डॉक्टर मरीज की स्थिति को सही से समझकर काउंसलिंग करता है, जरूरत पड़ने पर दवाइयां देता है और एक सेफ्टी प्लान तैयार करता है ताकि वह मुश्किल समय का सामना कर सके.
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