आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के पुंगनूर शहर में हाल ही में एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया. यहां एक ही परिवार के चार लोगों दादा और तीन पोते-पोतियों की दम घुटने से मौत हो गई. जानकारी के मुताबिक, परिवार की बाइक हाल ही में रिपेयर (रिबोर) कराई गई थी. मैकेनिक ने इंजन को सेट करने के लिए बाइक को रातभर चालू रखने की सलाह दी थी. परिवार ने बाइक को घर के अंदर ही स्टार्ट छोड़ दिया और सभी सो गए. रात में खिड़की-दरवाजे बंद थे, जिससे बाइक से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) गैस पूरे कमरे में भर गई. यह गैस बिना रंग और गंध की होती है, इसलिए किसी को खतरे का अंदाजा ही नहीं हुआ और गहरी नींद में ही चारों की जान चली गई.
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कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बिना आवाज का खतरनाक जहर
कार्बन मोनोऑक्साइड एक रंगहीन, गंधहीन और स्वादहीन गैस होती है. यही वजह है कि इसे अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है. यह गैस पेट्रोल, डीजल, गैस या लकड़ी के अधूरे दहन से बनती है. कार, बाइक, जेनरेटर, गैस हीटर या चूल्हे जैसे उपकरण जब बंद जगह में चलते हैं, तो CO तेजी से जमा होने लगती है. क्योंकि इस गैस का कोई रंग या गंध नहीं होती, इसलिए व्यक्ति को खतरे का पता तब चलता है जब शरीर पर इसका असर शुरू हो चुका होता है.
CO गैस शरीर में जाकर ऑक्सीजन की जगह कैसे ले लेती है?
जब कार्बन मोनोऑक्साइड सांस के जरिए शरीर में जाती है, तो यह खून में मौजूद हीमोग्लोबिन से चिपक जाती है. समस्या यह है कि CO, ऑक्सीजन की तुलना में हीमोग्लोबिन से 200 गुना ज्यादा तेजी से जुड़ती है. इस वजह से खून में ऑक्सीजन की मात्रा तेजी से कम हो जाती है और शरीर के जरूरी अंग जैसे दिमाग और दिल को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती.
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कार्बन मोनोऑक्साइड पॉइजनिंग में क्या महसूस होता है?
इस गैस के असर धीरे-धीरे शुरू होते हैं. शुरुआत में व्यक्ति को यह सामान्य थकान या नींद जैसा महसूस हो सकता है. इसके संभावित लक्षणों में शामिल हैं:
- सिरदर्द
- चक्कर आना
- उलझन या भ्रम
- मतली या उल्टी
- कमजोरी
- गहरी नींद जैसा अहसास
कई मामलों में व्यक्ति को लगता है कि वह सिर्फ सो रहा है, लेकिन वास्तव में शरीर धीरे-धीरे ऑक्सीजन की कमी से बेहोश हो रहा होता है.

दिमाग और दिल पर इसका खतरनाक असर:
जब शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो सबसे पहले असर दिमाग और दिल पर पड़ता है. दिमाग में ऑक्सीजन की कमी से बेहोशी, दिल की धड़कन अनियमित होना, दिल का दौरा पड़ने का खतरा, गंभीर मामलों में मौत. अगर CO का लेवल ज्यादा हो, तो व्यक्ति कुछ ही मिनटों में बेहोश हो सकता है.
घर के अंदर इंजन चलाने से गैस क्यों जमा हो जाती है?
जब कोई वाहन बंद कमरे या घर के अंदर चालू रहता है, तो उससे निकलने वाली गैस बाहर नहीं निकल पाती. अगर कमरे में वेंटिलेशन खराब हो और खिड़कियां बंद हों, तो कार्बन मोनोऑक्साइड तेजी से जमा होकर खतरनाक लेवल तक पहुंच सकती है. कई एक्सपर्ट्स के अनुसार, छोटे बंद कमरे में कुछ ही मिनटों में CO का लेवल जानलेवा हो सकता है.
बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरनाक
कार्बन मोनोऑक्साइड का असर सभी पर होता है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह ज्यादा खतरनाक हो सकता है. बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, दिल या फेफड़ों के मरीज. इन लोगों के शरीर में ऑक्सीजन की जरूरत ज्यादा सेंसिटिव होती है, इसलिए CO पॉइजनिंग जल्दी गंभीर हो सकती है.
सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानियां:
- कभी भी घर या बंद कमरे में वाहन स्टार्ट न रखें.
- जेनरेटर हमेशा खुले स्थान पर चलाएं.
- कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें.
- शक होने पर तुरंत बाहर निकलें और ताजी हवा लें.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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