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40 की उम्र के बाद कौन-सी न्यूरोलॉजिकल जांचें करानी चाहिए? हाई रिस्क लोगों के लिए डॉक्टर की पूरी चेकलिस्ट

40 की उम्र के बाद शरीर कमजोर होने लगता है, ऐसे में कुछ बीमारियों से बचाव के लिए आपको कुछ टेस्ट जरूर करवानें चाहिए. डॉक्टर ने पूरी लिस्ट शेयर की है कि किन लक्षणों को दिखने पर आपको कौन से टेस्ट जरूर करवाने चाहिए.

40 की उम्र के बाद कौन-सी न्यूरोलॉजिकल जांचें करानी चाहिए? हाई रिस्क लोगों के लिए डॉक्टर की पूरी चेकलिस्ट
40 की उम्र के बाद जरूर करवाएं ये टेस्ट. ( Image NDTV)

40 वर्ष की उम्र के बाद शरीर के साथ-साथ मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) में भी कई बदलाव शुरू होने लगते हैं. यदि परिवार में स्ट्रोक, पार्किंसन, अल्जाइमर या अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का इतिहास हो या व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापे और धूम्रपान जैसी समस्याओं से जूझ रहा हो, तो न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि समय-समय पर कुछ जरूरी जांचें कराकर गंभीर बीमारियों का खतरा कम किया जा सकता है.

सर्वोदय हॉस्पिटल, फरीदाबाद के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार, न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का इलाज तभी अधिक प्रभावी होता है जब उनकी पहचान शुरुआती चरण में हो जाए. इसलिए हाई रिस्क लोगों को नियमित स्क्रीनिंग करानी चाहिए.

 किन लोगों को न्यूरोलॉजिकल स्क्रीनिंग की जरूरत है? 

विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि आपकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है और इनमें से कोई भी स्थिति है, तो आपको नियमित न्यूरोलॉजिकल जांच करानी चाहिए—

  • परिवार में स्ट्रोक या डिमेंशिया का -इतिहास 
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • हाई कोलेस्टॉल
  • धूम्रपान या अत्यधिक शराब का सेवन
  • मोटापा
  • लंबे समय से तनाव और कम नींद
  • हृदय रोग 

 डॉक्टर की पूरी चेकलिस्ट 

1. ब्लड प्रेशर की नियमित जांच - हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण माना जाता है. इसलिए हर व्यक्ति को समय-समय पर बीपी की जांच करानी चाहिए.

2. ब्लड शुगर टेस्ट - अनियंत्रित डायबिटीज मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है. इसलिए फास्टिंग ब्लड शुगर और HbA1c की जांच कराना जरूरी है.

3. लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल टेस्ट)- बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट पैदा कर सकता है. नियमित जांच से जोखिम का पता लगाया जा सकता है.

4. न्यूरोलॉजिकल क्लिनिकल एग्जामिनेशन-  न्यूरोलॉजिस्ट संतुलन, मांसपेशियों की ताकत, संवेदना, चलने का तरीका और नसों की कार्यक्षमता की जांच करते हैं. इससे कई शुरुआती न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का पता चल सकता है.

5. मेमोरी और कॉग्निटिव असेसमेंट- यदि भूलने की समस्या, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई या व्यवहार में बदलाव महसूस हो रहा हो, तो कॉग्निटिव टेस्ट कराना फायदेमंद हो सकता है.

6. MRI या CT स्कैन- यदि लगातार सिरदर्द, चक्कर, कमजोरी, दौरे या अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण हों, तो न्यूरोलॉजिस्ट जरूरत के अनुसार MRI या CT स्कैन की सलाह दे सकते हैं. यह जांच हर व्यक्ति के लिए रूटीन में जरूरी नहीं होती.

किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?

यदि अचानक शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, बोलने में परेशानी, याददाश्त कमजोर होना, लगातार सिरदर्द, बार-बार चक्कर आना, हाथों में कंपन, चलने में असंतुलन या दौरे पड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें.

स्वस्थ जीवनशैली भी है जरूरी 

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल जांच कराना ही पर्याप्त नहीं है. स्ट्रोक और अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से बचाव के लिए नियमित व्यायाम करें, संतुलित भोजन लें, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं, पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित रखें.

डॉक्टर का संदेश 

"40 वर्ष की उम्र के बाद केवल हृदय ही नहीं, बल्कि मस्तिष्क के स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना जरूरी है. जिन लोगों में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा या परिवार में न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का इतिहास है, उन्हें नियमित न्यूरोलॉजिकल स्क्रीनिंग करानी चाहिए. समय पर जांच से स्ट्रोक, डिमेंशिया और अन्य गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का जोखिम कम किया जा सकता है. किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें."

डॉ. सौरभ सुल्तानिया
कंसल्टेंट – न्यूरोलॉजी
सर्वोदय हॉस्पिटल, फरीदाबाद

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