अक्टूबर-नबंवर आते ही हमारे देश में इन दिनों सबसे ज्यादा डर बढ़ते प्रदूषण को लेकर होता है. फ्रैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं न सिर्फ हमारे लंग्स को प्रभावित करता है, बल्कि इससे शरीर के कई अंग भी प्रभावित होते हैं. ऐसे में बढ़ते प्रदूषण को कंट्रोल करना बहुत ही जरूरी है. लेकिन कई ऐसी फैक्ट्रियां और कारखाने हैं, जिसमें प्रदूषण मानकों का ध्यान नहीं दिया जाता है. ऐसे में इनपर लगाम कसना बहुत ही जरूरी हो जाता है. इसी को ध्यान में रखते हुए हाल ही में राजस्थान स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने अलवर स्थित कार्लसबर्ग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कार्रवाई की. इस कार्रवाई के दौरान पार्टिकुलेट मैटर (PM) का स्तर तय सीमा 80 mg/Nm³ के मुकाबले 633 mg/Nm³ पाया गया, जिसके बाद राजस्थान कंट्रोल बोर्ड ने प्रदूषण के पैमाने पर खरा ना उतरने की वजह से कॉल बर्ल्स कंपनी के अलवर औद्योगिक इकाई को बंद करने का निर्देश जारी किया.
इस तरह की घटनाएं जब हमारे सामने आती हैं, तो कई तरह से सवाल मन में उठते हैं, जिसमें से पहला सवाल हवा में मौजूद ये सूक्ष्म प्रदूषक कण आखिर हमारे फेफड़ों, दिल और पूरे शरीर को कितना नुकसान पहुंचा सकते हैं. यहां यशोदा हॉस्पिटल के कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विशाल खांते से समझते हैं इस बारे में-
क्या है पार्टिकुलेट मैटर?
डॉक्टर खांते बताते हैं कि पार्टिकुलेट मैटर धूल, धुआं, वाहन उत्सर्जन, फैक्ट्री के धुएं और निर्माण कार्यों से निकलने वाले सूक्ष्म कण होते हैं. इनमें PM10 और PM2.5 सबसे ज्यादा चर्चा में रहते हैं. PM2.5 इतना छोटा होता है कि ये फेफड़ों की गहराई तक पहुंचने के बाद सीधे ब्लड वेसेल्स में प्रवेश करके इसको नुकसान पहुंचा सकते हैं.
फेफड़ों को कैसे पहुंचाता है नुकसान?
डॉक्टर का कहना है कि जब PM2.5 शरीर में पहुंचता है, तो यह रेस्पिरेटरी सिस्टम में सूजन पैदा कर सकता है. इसके कारण खांसी, सांस फूलना, सीने में जकड़न और अस्थमा के दौरे बढ़ सकते हैं. लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) और फेफड़ों की क्षमता में कमी का खतरा भी बढ़ जाता है.
हार्ट को कैसे नुकसान पहुंचाता है PM?
डॉक्टर का कहना है कि PM2.5 के सूक्ष्म कण फेफड़ों से ब्लड में पहुंचकर शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाते हैं. इससे आर्टरी में नुकसान हो सकता है और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है. यही वजह है कि अधिक प्रदूषण वाले दिनों में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अनियमित दिल की धड़कन के मामलों में वृद्धि देखने को मिलती है.
दिमाग पर भी पड़ता है असर
हाल के शोध बताते हैं कि लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से याददाश्त और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है. कुछ अध्ययनों में प्रदूषण को डिमेंशिया और स्ट्रोक के बढ़े हुए जोखिम से भी जोड़ा गया है.
खुद को प्रदूषण कैसे रखें सुरक्षित?
प्रदूषण का स्तर ज्यादा होने पर सुबह-शाम बाहर निकलने से बचें. जरूरत पड़ने पर N95 मास्क पहनें. घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है. पर्याप्त पानी पीना और पौष्टिक भोजन लेना भी शरीर को प्रदूषण के दुष्प्रभावों से लड़ने में मदद करता है. डॉक्टर का कहना है कि PM सिर्फ सांस की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर के लिए खतरा बन सकता है. इसलिए प्रदूषण को हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए.
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