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This Article is From Dec 03, 2024

जल्दी डायग्नोस और सही इलाज से 70 प्रतिशत मिर्गी रोगी जी सकते हैं नॉर्मल लाइफ, जानें एक्सपर्ट्स के टिप्स

Epilepsy Cure: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का अनुमान है कि दुनिया भर में लगभग 50 मिलियन लोग मिर्गी से पीड़ित हैं. फोर्टिस अस्पताल में न्यूरोलॉजी के प्रमुख निदेशक और प्रमुख डॉ. प्रवीण गुप्ता ने बताया, "भारत में 10-12 मिलियन लोग मिर्गी से पीड़ित हैं."

जल्दी डायग्नोस और सही इलाज से 70 प्रतिशत मिर्गी रोगी जी सकते हैं नॉर्मल लाइफ, जानें एक्सपर्ट्स के टिप्स
पिछले 5 सालों में 1,000 बच्चों में से 22.2 बच्चे इस बीमारी से प्रभावित हुए हैं.

Epilepsy Treatment: हेल्थ एक्सपर्ट्स ने कहा है कि मिर्गी (न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर) का जल्द ही पता लगाने और बेहतर उपचार से इससे पीड़ित 70 प्रतिशत रोगियों को सामान्य जीवन जीने में मदद मिल सकती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का अनुमान है कि दुनिया भर में लगभग 50 मिलियन लोग मिर्गी से पीड़ित हैं. फोर्टिस अस्पताल में न्यूरोलॉजी के प्रमुख निदेशक और प्रमुख डॉ. प्रवीण गुप्ता ने बताया, "भारत में 10-12 मिलियन लोग मिर्गी से पीड़ित हैं, जो कुल आबादी का एक प्रतिशत से ज्यादा और वैश्विक का लगभग छठा हिस्सा है. भारत में इसका आंकड़ा प्रति 1,000 जनसंख्या पर 3.0 से 11.9 के बीच है. यह तेजी से बढ़ते मामले हमारे लिए एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनते जा रहे है. इस ओर जल्‍द ही काम करने की जरूरत है."

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क्या होते हैं मिर्गी के लक्षण? | What Are The Symptoms of Epilepsy? 

मिर्गी के लक्षणों में अचानक सुन्न होना, शरीर में अकड़न, कांपना, बेहोशी, बोलने में कठिनाई और अनकंट्रोल पेशाब (इनवोलंटरी यूरिनेशन) शामिल हैं. यह बीमारी काफी लंबे समय से चली आ रही है. इसके बावजूद भी लोगों में इसको लेकर जागरूकता की कमी है. आकाश हेल्थकेयर के निदेशक एवं न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मधुकर भारद्वाज ने कहा कि भारत में 8-12 साल की आयु के बच्चों में मिर्गी की बीमारी आम है. पिछले 5 सालों में 1,000 बच्चों में से 22.2 बच्चे इस बीमारी से प्रभावित हुए हैं.

बच्चों में मिर्गी का जन्मजात विकार और संक्रमण प्रमुख कारण:

हालांकि, गुप्ता ने कहा कि वयस्कों में भी यह स्थिति काफी बढ़ रही है. गुप्ता ने कहा, "बच्चों में जन्मजात विकार और संक्रमण प्रमुख कारण होते हैं, जबकि युवा वयस्कों में ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी, न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस और मेनिन्जाइटिस इसके बड़े कारक हैं. हमारे देश में टेपवर्म संक्रमण के कारण होने वाला न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस लगभग 30 प्रतिशत मिर्गी के मामलों के लिए जिम्मेदार है. बुजुर्गों में स्ट्रोक और न्यूरोडीजेनेरेटिव स्थितियां प्रमुख कारण होती हैं."

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एक्सपर्ट ने क्या कहा जानिए...

विशेषज्ञों ने मिर्गी से पीड़ित महिलाओं के सामने शादी और गर्भावस्था को लेकर आने वाली चुनौतियों के बारे में भी बताया. गुप्ता ने कहा, "हार्मोनल बदलाव इस समस्या को बढ़ा सकते हैं, जैसा कि कैटामेनियल मिर्गी में देखा जाता है जबकि सामाजिक दृष्टिकोण अक्सर उनके व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करते हैं. इसके बावजूद उपचार में प्रगति ने ज्यादातर महिलाओं को सामान्य जीवन जीने की अनुमति दी है क्योंकि आधुनिक दवाएं गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित साबित हुई हैं."

भारद्वाज ने कहा, "समय पर इसका पता लगाने के साथ और इसके बेहतर उपचार से 70 प्रतिशत रोगियों को सही दवा और एक खास लाइफस्टाइल के जरिए सामान्य जीवन जीने में मदद मिल सकती है."

इन स्थितियों से निपटने के लिए एंटी-एपिलेप्टिक दवाएं, डाइट थेरेपी जैसे कि केटोजेनिक डाइट, शराब से परहेज और सर्जिकल हस्तक्षेप जैसे कि रेसेक्टिव ब्रेन सर्जरी और वेगस नर्व स्टिमुलेशन शामिल हैं.

भारद्वाज ने मिर्गी से पीड़ित व्यक्तियों से यह भी आग्रह किया कि वे ड्राइविंग, विमान उड़ाने या फैक्ट्री में काम करने जैसे जोखिम भरे कामों से बचें, जिसमें नुकीली वस्तुएं शामिल हों, क्योंकि ये दौरे के दौरान खुद को और दूसरों को खतरे में डाल सकते हैं.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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