बारिश की फुहारें, ठंडी हवा और हरियाली कई लोगों का मूड अच्छा कर देती है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यही मौसम परेशानी की वजह बन जाता है. सूरज की रोशनी कम मिलना, लंबे समय तक घर के अंदर रहना, रोजमर्रा की दिनचर्या बिगड़ना और लगातार नमी वाला मौसम कुछ लोगों के मूड पर असर डाल सकता है. नतीजा यह होता है कि बिना किसी खास वजह के उदासी महसूस होने लगती है, काम में मन नहीं लगता और शरीर में सुस्ती बनी रहती है. यही स्थिति मॉनसून ब्लूज़ कहलाती है.
क्या है मॉनसून ब्लूज?
मॉनसून ब्लूज़ कोई अलग बीमारी नहीं, बल्कि बारिश के मौसम में होने वाले मूड में बदलाव को कहा जाता है. इसमें व्यक्ति खुद को पहले की तुलना में ज्यादा उदास, थका हुआ या चिड़चिड़ा महसूस कर सकता है. अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें या रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने लगें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. अगर बारिश के दिनों में बिना वजह उदासी महसूस हो, हर समय थकान रहे, किसी काम में मन न लगे, नींद ज्यादा आए या कम हो जाए, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने लगे या लोगों से मिलने का मन न करे, तो ये मॉनसून ब्लूज़ के संकेत हो सकते हैं.
बारिश का मौसम मूड पर असर क्यों डालता है?
बारिश के दौरान कई दिनों तक धूप कम निकलती है. माना जाता है कि सूरज की रोशनी कम मिलने से शरीर की जैविक घड़ी और मूड से जुड़े कुछ हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं. इसके अलावा लगातार घर के अंदर रहना, कम शारीरिक गतिविधि और बदली वाला मौसम भी कई लोगों के मूड पर असर डाल सकता है.
मूड बेहतर रखने के लिए क्या करें?
जहां तक संभव हो, दिन में थोड़ी देर प्राकृतिक रोशनी में जरूर रहें. हल्की वॉक, योग या एक्सरसाइज करें. दोस्तों और परिवार के लोगों से बातचीत करते रहें और अपनी पसंद का कोई काम करने के लिए भी समय निकालें. रोज एक तय समय पर सोने और उठने की आदत भी मूड बेहतर रखने में मदद कर सकती है.
इसके अलावा खानपान का ख्याल रखें. संतुलित डाइट लें, मौसमी फल और सब्जियां खाएं और पर्याप्त पानी पीते रहें. बहुत ज्यादा जंक फूड, मीठी चीजें और जरूरत से ज्यादा कैफीन लेने से बचें. सही खानपान शरीर के साथ-साथ मानसिक सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है.
अगर उदासी लगातार दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक बनी रहे, रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, नींद या भूख में बड़ा बदलाव आए या किसी भी तरह के नकारात्मक विचार आने लगें, तो बिना देर किए किसी मनोचिकित्सक या क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए.
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