म्यूजिक कंपोजर विशाल ददलानी ने 19 साल की उम्र में अचानक वेजिटेरियन बनने का फैसला किया. उन्होंने खुद एक पॉडकास्ट के दौरान बताया कि उन्होंने 19 साल की उम्र में मीट खाना छोड़ दिया था. उनका मन अचानक बदल गया और वे पूरी तरह से प्लांट-बेस्ड डाइट पर आ गए. 'ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे' पॉडकास्ट के होस्ट से बात करते हुए उन्होंने कहा, "मैं 30 साल पहले शाकाहारी बन गया था. जब मैं लगभग 19 साल का था, तो मैं दिन में तीनों बार सिर्फ मीट ही खाता था. मुझे पसंद नहीं कि कोई चीज मुझ पर हावी हो." वे आगे कहते हैं, "इसी वजह से मैंने स्मोकिंग भी छोड़ दी. मुझे खुद पर चिढ़ होने लगी थी. मैं दिन में 40 सिगरेट पीता था. फिर एक दिन मैंने उन्हें छोड़ दिया. न मीट खाया, न स्मोकिंग की."
अब यहां बड़ा सवाल ये है कि जब आप अचानक से एक दिन मीट खाना बंद कर देते हैं और पूरी तरह वेजिटेरियन हो जाते हैं? या जब आप मांस खाना बंद कर देते हैं तो शरीर पर क्या असर होता है? इन्हीं सवालों को ध्यान में रखे हुए एनडीटीवी ने आयुर्वेदाचार्य एवं योग गुरु प्रो. डॉ. राम अवतार ने से खास बातचीत की. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित डॉ. राम अवतार को योग, आयुर्वेद, नाड़ी विज्ञान और न्यूरोथेरेपी के क्षेत्र में 38 वर्षों से अधिक का अनुभव है.
क्या आप रातों-रात शाकाहारी बन सकते हैं?
डॉक्टर राम अवतार का कहना है कि कई लोग ऐसा करते हैं, वे अचानक मीट खाना छोड़ देते हैं, लेकिन न्यूट्रिएंट प्लानिंग (पोषक तत्वों की योजना) जरूरी है, क्योंकि नॉन-वेजिटेरियन डाइट में विटामिन B12, आयरन, जिंक, विटामिन D, कैल्शियम, आयोडीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड और प्रोटीन होते हैं. रोजाना की डाइट में अचानक बदलाव करने पर शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया कर सकता है, आगे डॉक्टर ने बताया कि अगर बदलाव अच्छी तरह से प्लान किया गया हो, तो यह बदलाव सफल हो सकता है.
मीट छोड़ने के बाद शुरुआती कुछ दिनों में क्या होता है?
डॉक्टर राम अवतार के मुताबिक मीट छोड़ने के शुरुआती कुछ दिनों में, मीट से मिलने वाले पोषण की भरपाई के लिए शरीर को ज़्यादा फाइबर की जरूरत होती है. आपकी डाइट में फल, सब्जियां और फलियां (Legumes) शामिल होनी चाहिए ताकि आपका पाचन तंत्र इन बदलावों के अनुकूल हो सके.
शाकाहारी डाइट का पाचन पर क्या असर पड़ता है?
डॉक्टर का मानना है कि शाकाहारी डाइट में ज्यादा डाइटरी फाइबर की जरूरत होती है, क्योंकि यह गट बैक्टीरिया को पोषण देता है. ये बैक्टीरिया शॉर्ट-चेन फैटी एसिड (SCFAs) बनाते हैं, जैसे कि ब्यूटायरेट. ये फैटी एसिड आपकी आंतों की परत को स्वस्थ रखते हैं और पाचन में मदद करते हैं.
क्या मांस छोड़ना पाचन में सुधार कर सकता है?
डॉक्टर राम अवतार कहने हैं इसका जवाब हां है, लेकिन पाचन तंत्र पर असल असर रोजाना के खान-पान की आदतों पर निर्भर करता है. 'फ्रंटियर्स ऑफ न्यूट्रिशन' में छपी रिसर्च से पता चलता है कि शाकाहारियों में गट का माहौल अलग-अलग तरह का होता है, और इससे मोशन (मल त्याग) की प्रक्रिया नियमित रह सकती है. लेकिन पाचन स्वास्थ्य पर असल असर में बुनियादी इम्यूनिटी की बड़ी भूमिका होती है.
कैसे करें प्रोटीन की भरपाई
अगर आपकी शाकाहारी डाइट में दाल, राजमा, चना, सोया, टोफू, पनीर, दूध, दही, नट्स और बीज जैसी चीजें शामिल हैं, तो प्रोटीन की भरपाई हो जाती है.
हेल्दी शाकाहारी थाली कैसे तैयार करें
- नाश्ता: घर पर बना सादा दही, ओट्स, नट्स और सीड्स.
- दोपहर का खाना: दाल, रोटी और सब्जी.
- रात का खाना: राजमा, पनीर या सलाद जैसे विकल्प चुने जा सकते हैं.
- स्नैक्स: भुने हुए चने या फल.
मीट छोड़ते समय किन्हें ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?
लोगों को अपनी डाइट में बदलाव हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि उन्हें इस बात पर ध्यान देना होगा कि पोषण के नजरिए से उनके शरीर को क्या चाहिए. जिन लोगों को ज़्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है, वे हैं:
- गर्भवती महिलाएं
- एथलीट
- बुजुर्ग लोग
- जिनमें विटामिन B12 की कमी हो
- आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया (खून की कमी) से पीड़ित लोग
शाकाहारी डाइट अपनाने के लिए कुछ टिप्स
- अपने एनर्जी लेवल को बनाए रखने के लिए प्रोटीन अधिक लें.
- लंबे समय तक सेहतमंद रहने के लिए विटामिन B12 के सेवन पर नजर रखें.
- शरीर में ऑक्सीजन का सही प्रवाह बनाए रखने के लिए आयरन से भरपूर फूड्स शामिल करें.
- पोषण का संतुलन बनाए रखने के लिए अलग-अलग तरह की दालें और फलियां खाएं.
- मीट की जगह अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड न खाएं, क्योंकि इससे आपके शरीर में सोडियम का स्तर बिगड़ सकता है.
एक्सपर्ट शॉर्ट बायो:
डॉ. राम अवतार दिल्ली सरकार के योग विभाग के सेवानिवृत्त प्रोजेक्ट ऑफिसर हैं. उनके पास योग और ध्यान (Yoga & Meditation) के क्षेत्र में 38 से अधिक वर्षों का दीर्घकालिक और व्यावहारिक अनुभव है. वे योग, प्राणायाम, ध्यान, नाड़ी विज्ञान, जड़ी-बूटी/पारंपरिक चिकित्सा, प्राकृतिक चिकित्सा (Naturopathy), रेकी, होम्योपैथी और आयुर्वेद के माध्यम से कई जटिल एवं असाध्य रोगों का सफल इलाज कर चुके हैं.
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