इराक से एक ऐसी खौफनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरी इंसानियत को शर्मसार कर दिया है. राजधानी बगदाद में महज 15 साल की एक मासूम बच्ची कौसर बशर अल-हुसैजावी की उसके ही पिता, चाचा और मंगेतर ने मिलकर बेरहमी से हत्या कर दी. कौसर का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने अपनी मर्जी के खिलाफ एक शराबी और ड्रग डीलर चचेरे भाई से शादी करने से इनकार कर दिया था.
इस वारदात का सबसे घिनौना और क्रूर चेहरा हत्या के बाद देखने को मिला. कौसर की जान लेने के बाद उसके कबीले और परिवार के पुरुषों में कोई गम नहीं था, बल्कि वे सड़कों पर उतर आए. सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं. इन वीडियो में कबीले के लोग कौसर की मौत पर ढोल-नगाड़ों के साथ नाच-गाकर जश्न मनाते दिख रहे हैं. इस हत्या के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा भड़क उठा है.
13 साल की उम्र में जबरन शादी
द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, कौसर इराक की राजधानी बगदाद के दक्षिण-पूर्वी इलाके अल-नहरवान की रहने वाली थी. उसकी जिंदगी में दुखों का पहाड़ तब टूटा, जब महज 13 साल की उम्र में उसे स्कूल से निकाल दिया गया और उसकी एक शराबी और उम्रदराज शख्स से जबरन शादी कर दी गई. कौसर ने एक साल तक उस नरक को झेला. उसे लगातार शारीरिक हिंसा और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा.
फिर कौसर किसी तरह उस हिंसक पति के चंगुल से भागकर अपने मायके लौट आई. लेकिन, उसकी परवाह करने के बजाय उसके अपने परिवार ने ही उसे घर में नजरबंद कर दिया. उस पर लगातार वापस पति के पास जाने का दबाव बनाया जाने लगा. आखिरकार, खुदकुशी की धमकियों और लंबे संघर्ष के बाद साल 2025 के आखिर में अदालत से उसका आधिकारिक तौर पर तलाक हो गया.
जेल से छूटे ड्रग डीलर भाई से शादी का दबाव
तलाक के कुछ समय बाद ही कौसर का चचेरा भाई भी जेल से छूटकर बाहर आया. उसने कौसर के माता-पिता से उसकी शादी की बात की. पूरा इलाका जानता था कि वह लड़का शराब और ड्रग्स की तस्करी में शामिल है. कौसर ने इस शादी से साफ इनकार कर दिया, लेकिन उसके परिवार ने कबीलाई रूढ़िवादिता का हवाला देते हुए उसकी एक न सुनी.
शादी का दिन जैसे-जैसे नजदीक आ रहा था, कौसर को दोबारा उसी दुराचार और हिंसा के नरक में जाने का डर सताने लगा. आखिरकार मई की शुरुआत में वह घर से भाग गई. उसके पास न तो पैसे थे और न ही आजीविका का कोई साधन, क्योंकि उसे कभी पढ़ने या कमाने का मौका ही नहीं दिया गया था. वह सिर्फ अपने बदन के कपड़ों और हिजाब के सहारे घर से निकल पड़ी.
अपहरण की शिकार हुई
घर से भागने के बाद रास्ते में एक पड़ोसी ने उसका अपहरण कर लिया और तीन दिनों तक उसे बंधक बनाकर रखा. इस दौरान कौसर को गंभीर यातनाएं झेलनी पड़ीं. जब वह किसी तरह मुक्त होकर लौटी, तो उसने परिवार को रो-रोकर बताया कि वह अपनी मर्जी से नहीं गई थी, बल्कि उसे जबरन घसीटकर ले जाया गया था. इलाके के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज भी कौसर की बात को सच साबित कर रहे थे.
इसके बावजूद, कबीले और परिवार ने उसकी एक न सुनी. कौसर के पिता, चाचा और होने वाले मंगेतर ने पहले उससे बंद कमरे में पूछताछ की और फिर उसे एक कार में डालकर बगदाद के बाहरी इलाके में एक सुनसान मैदान में ले गए.
10 गोलियां मारीं, कुल्हाड़ी से सिर काटा और गड्ढे में फेंका
सुनसान इलाके में ले जाकर कबीले के मर्दों ने 10 साल की बच्ची जैसी दिखने वाली कौसर पर एक के बाद एक 10 गोलियां दाग दीं. इतने से भी जब उनका दिल नहीं भरा, तो कुल्हाड़ी से वार कर उसके सिर के दो टुकड़े कर दिए. हत्या के बाद उसकी लाश को बिना किसी कफन या धार्मिक रीति-रिवाज के एक गड्ढे में फेंक दिया गया और ऊपर से थोड़ी सी मिट्टी डाल दी गई.
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