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आमतौर पर हमें सिर्फ काले, भूरे, सुनहरे, लाल या फिर सफेद बाल ही देखने को मिलते हैं, जानिए इसके पीछे की दिलचस्प वजह

Balo Ka Rang: आमतौर पर हमें काले, भूरे, सुनहरे, लाल या फिर सफेद बाल ही देखने को मिलते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हमें प्राकृतिक रूप से नीले, हरे या बैंगनी बाल देखने को क्यों नहीं मिलते?

आमतौर पर हमें सिर्फ काले, भूरे, सुनहरे, लाल या फिर सफेद बाल ही देखने को मिलते हैं, जानिए इसके पीछे की दिलचस्प वजह
Why usually we see black, brown, golden, red or white hair only
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Balo Ka Rang: आमतौर पर हमें काले, भूरे, सुनहरे, लाल या फिर सफेद बाल ही देखने को मिलते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बालों के रंग इतने सीमित क्यों होते हैं. आखिर क्यों हमें प्राकृतिक रूप से नीले, हरे या बैंगनी बाल देखने को नहीं मिलते. यह सवाल जितना दिलचस्प है, इसका जवाब भी उतना ही वैज्ञानिक है. दरअसल, बालों का रंग हमारे शरीर में बनने वाले एक खास पिगमेंट (Pigment) और पिगमेंट शरीर में कितनी सही मात्रा में है इस पर निर्भर करता है.

बालों का रंग कैसे तय होता है?

बालों का रंग मुख्य रूप से मेलानिन (Melanin) नाम के पिगमेंट से तय होता है. यह पिगमेंट बालों की जड़ों में बनता है और वही बालों को रंग देता है. मेलानिन के दो प्रकार होते हैं. पहला यूमेलानिन, जो काले और भूरे रंग के लिए जिम्मेदार होता है. दूसरा फिओमेलानिन (Phemelanin), जो लाल और पीले रंग की झलक देता है.

अलग-अलग रंग कैसे बनते हैं?

इन दोनों पिगमेंट की मात्रा और अनुपात ही बालों का असली रंग तय करते हैं. जब यूमेलानिन (Eumelanin) ज्यादा होता है तो बाल काले दिखते हैं. अगर इसकी मात्रा थोड़ी कम हो जाए तो बाल भूरे हो जाते हैं. वहीं जब यूमेलानिन बहुत कम होता है तो बाल सुनहरे नजर आते हैं. फिओमेलानिन ज्यादा होने पर बाल लाल दिखाई देते हैं.

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प्राकृतिक रूप से सीमित रंग ही क्यों?

हमारे शरीर में केवल यही दो तरह के पिगमेंट बनते हैं. यही वजह है कि बालों के रंग भी सीमित ही होते हैं. नीले या हरे जैसे रंगों के लिए हमारे शरीर में कोई प्राकृतिक पिगमेंट नहीं बनता. साथ ही बालों की बनावट भी ऐसी नहीं होती कि वह रोशनी को इस तरह तोड़ सके कि अलग रंग दिखें.

उम्र के साथ क्यों बदलता है रंग?

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर में मेलानिन बनना कम हो जाता है. जब यह पिगमेंट कम होने लगता है तो बाल ग्रे यानी सफेद दिखने लगते हैं. और जब मेलानिन बनना लगभग बंद हो जाता है, तो बाल पूरी तरह सफेद हो जाते हैं.

जेनेटिक्स का क्या रोल है?

बालों का रंग काफी हद तक आपके जीन पर निर्भर करता है. परिवार में जैसे बालों का रंग होता है, वैसे ही रंग आगे की पीढ़ियों में भी देखने को मिलता है.

हमारे बालों के रंग सीमित इसलिए होते हैं क्योंकि शरीर में केवल दो तरह के पिगमेंट बनते हैं. इन्हीं के अलग-अलग मिश्रण से सारे रंग तैयार होते हैं.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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