नोएडा @50: दादरी, जेवर, खुर्जा, बुलंदशहर... अब किधर और कितना बढ़ेगा सपनों का नगर?
17 अप्रैल 1976 को नोएडा की नींव पड़ी, अब जेवर एयरपोर्ट (Jewar Airport) के आगे ये न्यू नोएडा (New Noida) की ओर बढ़ रहा है. गोल्डन जुबली के इस पड़ाव पर असली सवाल यही है कि नोएडा अब आगे कहां बढ़ेगा? जवाब यहां है.
Noida 50 Years: ज्यादा नहीं, बस 50 साल पीछे की सोचिए. यमुना और हिंडन नदियों के बीच बसे उस वीरान इलाके की कल्पना कीजिए, जहां कुछ गांव, खेत हुआ करते थे. ये जो दिल्ली से सटा नोएडा है न, ये वही इलाक है. नोएडा सेक्टर 16 की फिल्मसिटी हो या कि सेक्टर 18 में देश के सबसे बडे शॉपिंग मॉल्स में शुमार- DLF मॉल ऑफ इंडिया... ये सब उत्तर प्रदेश के गांव नया बांस, अट्टा हुआ करते थे. 17 अप्रैल 1976 को कुछ सरकारी फाइलों पर 'NOIDA' यानी न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेट अथॉरिटी' की मुहर लगी और कुछ दशकों में पूरी तस्वीर बदल गई. नोएडा बना, फिर विस्तार हुआ, ग्रेटर नोएडा बना और ये सफर जारी है. यूपी की GDP में करीब 10 फीसदी और राजस्व में 22 फीसदी से ज्यादा योगदान देने वाले इस शहर की कहानी दिलचस्प है.
आज जब नोएडा अपने 50 वर्ष पूरे कर रहा है, गोल्डन जुबली मना रहा है, तो साथ-साथ ये शहर एक नई करवट भी ले रहा है. जेवर की तरफ भागती सड़कें, दादरी की ओर झुकता नक्शा, जोर-शोर से अपनी कहानी बयां कर रहा है.
कहानी ये कि नोएडा यहीं नहीं रुकने वाला. तो सवाल यही है कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गौड़ सिटी, अल्फा-बीटा-गामा-थीटा के बाद अब कहां... एक अलग ही रफ्तार में बढ़े जा रहे इस शहर का विस्तार अब किस ओर होने वाला है. नोएडा@50 सीरीज की पहली न्यूज स्टोरी यहीं से शुरू करते हैं.
'न्यू नोएडा': दादरी-बुलंदशहर की ओर बढ़ता शहर
नोएडा का अगला और सबसे बड़ा विस्तार पूर्व और दक्षिण-पूर्व दिशा में होने वाला है. नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बाद अब बारी है 'न्यू नोएडा' की, जिसे DNGIR (Dadri-Noida-Ghaziabad Investment Region) के नाम से प्लान किया गया है. ये नया शहर मौजूदा नोएडा से आगे बढ़कर दादरी और बुलंदशहर बॉर्डर तक फैलेगा.
मास्टर प्लान 2041 के मुताबिक, यह करीब 20 हजार एकड़ जमीन पर विकसित होगा. इसकी सबसे खास बात यह है कि ये सिर्फ रिहायशी विस्तार नहीं होगा, बल्कि यह 'इंडस्ट्रियल-ड्रिवन' सिटी होगा. जहां मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग को प्राथमिकता मिलेगी.

80 गांव जुड़ेंगे, 6 लाख लोग बसेंगे
मास्टर प्लान 2041 के मुताबिक, यहां 40% जमीन उद्योगों के लिए आरक्षित है, 13% रिहायशी और 18% हिस्सा हरियाली के लिए छोड़ा गया है. DNGIR के लिए करीब 80 गांवों को अधिसूचित किया गया है, जिनमें ज्यादातर बुलंदशहर और कुछ गौतम बुद्ध नगर से हैं. 80 गांवों को मिलाकर बनने वाले इस शहर में 6 लाख की आबादी को बसाने की तैयारी है. प्लान के मुताबिक, यह करीब 20-21 हजार एकड़ जमीन पर विकसित होगा और चार चरणों में 2041 तक पूरा होगा. साफ है कि नोएडा का अगला चेहरा 'इंडस्ट्री + इंफ्रास्ट्रक्चर' के कॉम्बिनेशन से बनेगा.

मनोज गौड़
जेवर एयरपोर्ट: दक्षिण की ओर बढ़ता नोएडा
नोएडा का एक बड़ा ग्रोथ इंजन जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट है. एयरपोर्ट के आसपास सिर्फ रनवे नहीं, बल्कि एक पूरा इकोनॉमिक इकोसिस्टम तैयार हो रहा है. एयरोसिटी, डेटा सेंटर, फिल्म सिटी और इंडस्ट्रियल पार्क जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स तैयार हो रहे हैं.
यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे सेक्टर-18, 20 और आसपास के इलाकों में जमीन की कीमतें और डिमांड रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रही हैं. रियल एस्टेट डिमांड तेजी से बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं. काउंटी ग्रुप इसे 'एयरोट्रोपोलिस' बताता है, जहां एयरपोर्ट ही शहर के विकास की धुरी बन जाता है.

अमित मोदी
दादरी-खुर्जा कॉरिडोर: लॉजिस्टिक्स का नया पावरहाउस
कनेक्टिविटी के मामले में नोएडा अब 'मल्टी-नोडल' होने जा रहा है. नोएडा का विस्तार सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि इकोनॉमिक कॉरिडोर के रूप में भी हो रहा है. दादरी पहले से ही ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का जंक्शन है, जहां मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब और वेयरहाउसिंग प्रोजेक्ट तेजी से विकसित हो रहे हैं. खुर्जा और दादरी के बीच पूरा बेल्ट अब लॉजिस्टिक्स-सेंट्रिक इंडस्ट्रियल जोन बनता जा रहा है, जो भविष्य में ई-कॉमर्स, एक्सपोर्ट और सप्लाई चेन के लिए अहम होगा.

प्रतीक तिवारी
एक बार फिर जरा पीछे चलें?
नोएड के जिस इतिहास की चर्चा हमनें शुरुआत में की, वो खेतों से ग्लोबल हब तक का सफर दिखाता है. नोएडा का ये सफर तीन बड़े कालखंडों में बंटा है. 80 और 90 के दशक में यहां छोटे उद्योगों की सुगबुगाहट शुरू हुई. 2000 के बाद रियल एस्टेट और बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों ने एंट्री मारी, लेकिन असली बदलाव पिछले दशक में आया जब नोएडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और डेटा सेंटर हब बनकर उभरा.
आज स्थिति यह है कि गौतम बुद्ध नगर अकेले उत्तर प्रदेश की जीडीपी में करीब 10-11% का योगदान देता है और राज्य के राजस्व में इसकी हिस्सेदारी लगभग 25% है.

बदलता ट्रेंड: केवल घर नहीं, अच्छी 'लाइफस्टाइल' भी
नोएडा अब सस्ते और छोटे फ्लैट्स के बाजार से बाहर निकलकर 'लग्जरी लिविंग' के दौर में प्रवेश कर चुका है. सेक्टर-150 जैसे इलाके ग्रीन लिविंग के केंद्र बन चुके हैं, जहां स्मार्ट टाउनशिप और क्लब हाउस कल्चर हावी है. दिल्ली के मुकाबले यहां की चौड़ी सड़कें और बेहतर प्लानिंग लोगों को स्थायी रूप से बसने के लिए प्रेरित कर रही है.

यश मिगलानी
कनेक्टिविटी: विस्तार की असली चाबी
नोएडा की इस पूरी विकास गाथा के पीछे सबसे बड़ी ताकत है कनेक्टिविटी. मेट्रो का विस्तार अब ग्रेटर नोएडा वेस्ट और जेवर तक होने जा रहा है. नए एक्सप्रेसवे और एलिवेटेड सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है, जिससे दिल्ली और आसपास के शहरों से दूरी लगातार कम हो रही है. यही वजह है कि प्रॉपर्टी एक्सपर्ट्स अगले कुछ वर्षों में यहां निवेश पर शानदार रिटर्न की उम्मीद कर रहे हैं.

हरविंदर सिंह सिक्का
नोएडा के 50 साल के सफर को अगर देखा जाए, तो पहले 50 साल शहर की 'बुनियाद' बनाने के थे, लेकिन अगले 10 साल इसे 'ग्लोबल मैप' पर स्थापित करने के होंगे. रियल एस्टेट वर्ल्ड इसे तीन जोन में बांट कर देखता है. कोर नोएडा, जो कि आईटी और कॉरपोरेट हब है. ग्रेटर नोएडा और वेस्ट, मिड-सेगमेंट हाउसिंग के लिए, जबकि न्यू नोएडा और जेवर को इंडस्ट्री, लॉजिस्टिक्स और भविष्य के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है.
साफ है कि नोएडा अब अपनी सीमाओं में नहीं समा रहा, बल्कि कॉरिडोर के जरिए दादरी, खुर्जा और जेवर तक फैलकर एक महा-नगर (Megacity) का रूप ले रहा है. सपनों का ये नगर अब ग्लोबल सिटी बनने की राह पर है.
ये भी पढ़ें: Video: सोने-चांदी से ज्यादा उजले-पीले धातुओं की ये जोड़ी कर रही कमाल, Expert ने बताई मुनाफे की चाल
-
KVS-NVS शिक्षक भर्ती: जाति प्रमाण पत्र पर लगी शर्तों से अधर में लटका सैकड़ों का भविष्य, अभ्यर्थियों ने सुनाई दर्द भरी दास्तां
नवोदय और केंद्रीय विद्यालयों के 15 हजार पदों की शिक्षक भर्ती में OBC-NCL सर्टिफिकेट के लिए जारी की गई शर्त से हजारों अभ्यर्थियों के सामने चुनौती खड़ी हो गई है.
-
अगर चुनाव फिक्स हैं तो कांग्रेस बहिष्कार क्यों नहीं करती? राहुल के 'ध्यान भटकाने' वाले जवाब में कितना लॉजिक
चुनाव बॉयकॉट की जबरदस्त मांग 'कॉकरोच जनता पार्टी' की तरफ से आई है. लेकिन क्या बॉयकॉट से कोई फायदा होता है? रिसर्च, उदाहरण और एक्सपर्ट्स का एनालिसिस हमें इस बारे में क्या बताते हैं, आइए जानते हैं.
-
हवा में टेरर, भारतीय पायलट बना फाइटर… समझिए Flydubai की फ्लाइट में क्या-क्या हुआ था?
Flydubai की फ्लाइट FZ1073 में एक को-पायलट ने भारतीय कैप्टन पर चाकू से हमला कर दिया. वह प्लेन को अपने कब्जे में लेना चाहता था, ताकि उसे क्रैश कर सके.
-
गांव की ताकत समझो और तरक्की करो- कारोबारियों ने समझ लिया वित्त मंत्री का मंत्र तो हो सकते हैं मालामाल
The Rural India Consumption Story: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कंपनियों से गांव और ग्रामीण ग्राहकों पर फोकस करने को क्यों कहा? आइए, कंजप्शन, FMCG, ऑटो सेल्स, इनकम और क्रेडिट के आंकड़ों के आधार पर रुरल इंडिया की 'पावर' समझने की कोशिश करते हैं .
-
नाबालिग मुस्लिम लड़कियों को HC के फैसले से कैसे मिली ढाल? बालिकाओं को वधू बनने से रोक पाएगा ये फैसला
दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत शादी वैध है भी तब भी नाबालिग पत्नी से बनाए गए संबंध POCSO के दायरे में आएंगे.
-
ज्ञानेश कुमार के पास है गिरफ्तारी का 'सुरक्षा कवच', फिर ऐसा क्यों कहा जा रहा कि बच नहीं पाएंगे?
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार एक बार फिर विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं. उनकी गिरफ्तारी की मांग भी हो रही है. लेकिन ज्ञानेश कुमार के पास कानून का सुरक्षा कवच भी है.
-
जिस 'पितृसत्ता' पर हमलावर रहते हैं राहुल, वह शब्द आया कहां से? क्या होता है इसका मतलब
जमुई की घटना को राहुल गांधी ने 'पितृसत्ता' से जोड़ दिया. लेकिन ये 'पितृसत्ता' शब्द आया कहां से और इसका मतलब क्या होता है? जानते हैं.
-
EXCLUSIVE: ऑपरेशन सिंदूर के 16 महीने बाद भी पाकिस्तान उस रनवे को ठीक कर रहा है, जिसपर भारत ने दागी थी मिसाइल
भारतीय वायु सेना ने मुशफ पर किए गए हमलों में इस्तेमाल हथियारों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन गड्ढे का आकार और गहराई देखकर ऐसा लगता है कि सुखोई-30 MKI विमान से छोड़ी जाने वाली हवा से जमीन पर मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था.
-
उत्तर प्रदेश में इंसानों-जानवरों के बीच क्यों बढ़ रहा टकराव? मुरादाबाद-बिजनौर में बार-बार दिखे तेंदुए
उत्तर प्रदेश के बिजनौर और मुरादाबाद में तेंदुओं के हमलों से किसान दहशत में हैं. गन्ने के खेत तेंदुओं के ठिकाने बन गए हैं. पिछले दिनों CM योगी ने माना कि सूबे में ह्यूमन-वाइल्डलाइफ कॉन्फ्लिक्ट में 4000 से ज्यादा मौतें हुई हैं.