Water Tank Diseases Risk : घर के अंदर पानी की बोतल, बाल्टी को अक्सर हम साफ करते रहते हैं, लेकिन छत की टंकी का ख्याल ही हमारे मन में नहीं आता है. ऐसे में कई बार सालों को टंकी साफ नहीं होती है. अगर आप भी ऐसी भूल कर रहे हैं, तो आपकी ये आदत आपको बीमार कर सकती है. दरअसल, जब आप टंकी को समय-समय पर साफ नहीं करते हैं, तो इससे पानी में कीचड़, बैक्टीरिया, गंदगी जमा होने लगते हैं, जो पानी की गुणवत्ता को खराब कर सकते हैं. इससे कई तरह की बीमारियां होने का खतरा बढ़ सकता है. यहां जानते हैं पानी की टंकी को समय पर साफ न करने से कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं?
क्यों गंदी हो जाती है पानी की टंकी?
समय के साथ टंकी में धूल, मिट्टी, पत्तियां, जंग के कण और अन्य अशुद्धियां जमा हो जाती हैं. कई बार टंकी का ढक्कन ठीक से बंद न होने पर कीड़े-मकौड़े, मच्छर या छोटे जीव भी अंदर पहुंच जाते हैं. इन कारणों से टंकी में बैक्टीरिया और फंगस पनपने लगते हैं, जो पानी को प्रदूषित कर सकते हैं.
पानी की टंकी गंदी होने से कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं?
सीके बिड़ला हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन, एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. तुषार तयाल का कहना है कि टंकी में जमा गंदगी हर बार सीधे तौर पर बीमारी का कारण बने, ऐसा जरूरी नहीं है. लेकिन लंबे समय तक सफाई न होने पर टंकी की तली में मिट्टी, धूल, जंग और दूसरी तलछट जमा हो सकती है, जिसकी वजह से कुछ बीमारियां होने का खतरा बढ़ सकता है
पेट के संक्रमण से लेकर हेपेटाइटिस तक का खतरा
डॉ. तयाल बताते हैं कि दूषित पानी का सबसे आम असर पाचन तंत्र पर दिखाई दे सकता है. संक्रमित पानी पीने से दस्त, उल्टी, पेट दर्द, ऐंठन और बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं. कुछ मामलों में संक्रमण इतना गंभीर हो सकता है कि शरीर में पानी औरइलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाए. दूषित पानी और खाना खाने से हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस ई जैसे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.
बच्चों और बुजुर्गों में लगातार उल्टी या दस्त विशेष चिंता का विषय है, क्योंकि उनमें डिहाइड्रेशन जल्दी हो सकता है. कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में भी इंफेक्शन का असर अधिक गंभीर हो सकता है.
सिर्फ RO लगाने से समस्या खत्म नहीं होती
कई घरों में ये मान लिया जाता है कि RO या वॉटर प्यूरीफायर होने के बाद पानी की सुरक्षा को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है. लेकिन प्यूरीफायर घर की पानी की टंकी की सफाई का विकल्प नहीं है.
अगर टंकी में लंबे समय से सेडिमेट जमा है या पानी का स्टोरेज एरिया साफ नहीं है, तो पूरी वॉटर सप्लाई सिस्टम की स्वच्छता पर ध्यान देना जरूरी है. इसी तरह प्यूरीफायर का फिल्टर समय पर न बदलना भी पानी की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है.
इसलिए सुरक्षित पानी के लिए पूरी चेन को देखना जरूरी है, पानी का सोर्स, स्टोरेज टैंक, पाइपलाइन और घर में इस्तेमाल होने वाला फिल्टरेशन या प्यूरीफिकेशन सिस्टम.
कब टंकी की सफाई करवानी चाहिए?
डॉ. तयाल बताते हैं कि टंकी की सफाई का ड्यूरेशन हर घर में एक जैसा नहीं हो सकता. ये इस बात पर निर्भर करता है कि पानी कहां से आ रहा है, टंकी किस प्रकार की है और उसमें कितनी जल्दी गंदगी जमा होती है. फिर भी टंकी को तब तक गंदा होने का इंतजार नहीं करना चाहिए, जब तक उसकी तली में मोटी परत दिखाई देने लगे.
नियमित रूप से टंकी की स्थिति देखना, उसका ढक्कन ठीक से बंद रखना और लीकेज या क्रैक्स को तुरंत ठीक करवाना जरूरी है. सफाई के दौरान सिर्फ ऊपर की गंदगी निकालना पर्याप्त नहीं होता है. कोशिश करें कि हर 3 से 6 महीने के बीच में पानी की टंकी को अच्छे से क्लीन कराएं. वहीं, अगर आपको पहले ही गंदा दिख रहा है, तो फौरन डॉक्टर की सलाह लें.
टंकी गंदी होने के संकेत क्या हैं?
- पानी से बदबू आना
- पानी का रंग हल्का पीला या धुंधला दिखना
- नल में मिट्टी या कण दिखाई देना
- टंकी के अंदर काई या गंदगी नजर आना
- बार-बार पेट संबंधी समस्याएं होना
कैसे रखें पानी को सुरक्षित?
टंकी का ढक्कन हमेशा बंद रखें, समय-समय पर उसकी जांच करें और सफाई के दौरान टंकी को पूरी तरह खाली कर अंदर की दीवारों को अच्छी तरह साफ करें. यदि संभव हो तो सफाई के बाद पानी को कीटाणुनाशक प्रक्रिया से भी गुजारें.
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