हमारे घरों में पूजा-पाठ बिना आरती और कपूर के अधूरा सा लगता है. आरती की थाली में जैसे ही कपूर जलता है, पूरा घर एक मीठी सी खुशबू से भर जाता है. मन शांत होता है और घर का माहौल एकदम पावन लगने लगता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस कपूर के धुंए को हम रोज अपनी सांसों में भर रहे हैं, वो फेफड़ों के लिए कितना ठीक है.
इसी सवाल का सही जवाब जानने के लिए हमने बात की नई दिल्ली के जाने-माने एक्सपर्ट डॉ. सैयद अहमद खान से. उन्होंने बताया कि कपूर का इस्तेमाल सदियों से दवाओं और पूजा में होता रहा है, लेकिन आज बाजार का तरीका काफी बदल चुका है.
पूजा में रोजाना जलाते हैं कपूर, सांसों के लिए कितना सुरक्षित?
पूजा में कौन सा कपूर इस्तेमाल होता है
डॉ. खान बताते हैं कि सालों पहले भीमसेनी या प्राकृतिक कपूर मिलता था. इस कपूर को सीधा पेड़ों की छाल से निकाला जाता था. यूनानी चिकित्सा और आयुर्वेद में इसे बहुत फायदेमंद माना जाता है. इस प्राकृतिक कपूर को हवा साफ करने में भी काम में लिया जाता था. यह हवा के बैक्टीरिया को खत्म करता है और बंद नाक को खोलने में मदद करता है. Also Read: असली भीमसेनी कपूर की पहचान कैसे करें? खरीदने से पहले इन 5 ट्रिक से करें चेक
आजकल मिलने वाला कपूर
पर आज कल बाजार में जो टिकिया मिलती है, उनमें से ज्यादातर सिंथेटिक होती हैं. यह केमिकल और पेट्रोलियम बाई-प्रोडक्ट्स से बनाई जाती हैं. जब हम इस तरह के कैमिकल वाले कपूर को बंद कमरे में रोज जलाते हैं, तो इसका धुआं धीरे-धीरे सांस की नलियों को नुकसान पहुंचाने लगता है.
फेफड़ों पर इसका क्या असर पड़ता है?
डॉ. खान के मुताबिक, जो लोग पहले से दमा (अस्थमा), ब्रोंकाइटिस या एलर्जी की परेशानी झेल रहे हैं, उनके लिए यह धुआं ट्रिगर का काम करता है.
- बंद कमरे में कपूर जलाने से ऑक्सीजन का स्तर थोड़ा कम हो सकता है और धुआं फेफड़ों में जमा होने लगता है.
- इससे अचानक खांसी उठना, आंखों में जलन होना और सीने में भारीपन महसूस हो सकता है.
- छोटे बच्चों और बुजुर्गों के फेफड़े बहुत नाजुक होते हैं, इसलिए उन्हें इसके तेज धुंए से ज्यादा परेशानी हो सकती है.
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कपूर जलाते वक्त इन बातों का रखें ध्यान
डॉ. खान का कहना है कि पूजा में कपूर जलाना बंद करने की जरूरत नहीं है, बस कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
1. हमेशा शुद्ध या भीमसेनी कपूर ही खरीदें, भले ही यह थोड़ा महंगा मिले.
2. कपूर जब भी जलाएं, कमरे की खिड़की या दरवाजा खुला रखें ताकि ताजी हवा आती रहे.
3. अगर घर में कोई दमे का मरीज या नवजात बच्चा है, तो उनके ठीक सामने कपूर न जलाएं.
4. बहुत ज्यादा मात्रा में कपूर एक साथ न जलाएं, एक छोटा सा टुकड़ा काफी होता है.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
असली और मिलावटी कपूर की पहचान कैसे करें?
असली कपूर को जब आप जलाएंगे तो उसमें से काला धुआं नहीं निकलेगा और जलने के बाद कोई राख नहीं बचेगी. मिलावटी कपूर जलने पर काला धुआं और नीचे सफेद या काली राख छोड़ देता है.
क्या कपूर की खुशबू सूंघने से सर्दी-जुकाम ठीक होता है?
हां, असली प्राकृतिक कपूर की हल्की महक बंद नाक को खोलने और सांस लेने में राहत देती है, लेकिन इसे बहुत पास से ज्यादा देर तक नहीं सूंघना चाहिए.
क्या रोज पूजा में कपूर जलाना पूरी तरह सुरक्षित है?
अगर कमरा खुला है और कपूर असली है, तो थोड़ी मात्रा में रोजाना जलाना सुरक्षित है. बंद कमरे में सिंथेटिक कपूर जलाना नुकसानदायक हो सकता है.
एक्सपर्ट के बारे में: डॉ. सैयद अहमद खान यूनानी चिकित्सा के वरिष्ठ विशेषज्ञ हैं. वे नई दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल के यूनानी मेडिकल सेंटर में पूर्व डिप्टी डायरेक्टर एवं हेड रह चुके हैं. वर्तमान में वे दरीयागंज स्थित सदर यूनानी क्लिनिक में प्रैक्टिस करते हैं और श्वसन रोगों, पाचन संबंधी समस्याओं तथा लाइफस्टाइल डिजीज के यूनानी उपचार में विशेष अनुभव रखते हैं.
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