हर साल 17 सितंबर को World Patient Safety Day मनाया जाता है, जिसका मकसद इलाज के दौरान मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. अस्पताल में सही इलाज जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है दवा, जांच, संक्रमण और मेडिकल रिकॉर्ड से जुड़ी सावधानियां बरतना. आइए जानते हैं 5 ऐसे नियम जो हर मरीज और तीमारदार को पता होने चाहिए.
हम सब कभी न कभी अस्पताल या डॉक्टर के पास इलाज करवाने जरूर जाते हैं. चाहे हल्की-फुल्की खासी-बुखार हो या फिर कोई बड़ा आपरेशन, अस्पताल के नाम से ही आम इंसान के हाथ-पांव फूलने लगते हैं. हमारे देश में एक आम धारणा है कि भारत में कई लोग डॉक्टरों पर पूरा भरोसा करते हैं, लेकिन मरीजों के लिए अपने इलाज को समझना और सवाल पूछना भी उतना ही जरूरी है.. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अस्पताल जाकर सही इलाज पाना तो ठीक है, पर वहां होने वाली छोटी-छोटी गलतियों से बचना कितना जरूरी है.
इसी बात को दुनिया भर में समझाने के लिए हर साल 17 सितंबर को विश्व मरीज सुरक्षा दिवस यानी 'World Patient Safety Day' मनाया जाता है. इसका सीधा मतलब यह है कि इलाज के दौरान किसी मरीज को कोई नुकसान न पहुंचे. चलिए आज एकदम आसान भाषा में बात करते हैं कि जब आप या आपका कोई अपना बीमार पड़े, तो अस्पताल में किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि मरीज पूरी तरह महफूज रहे.
World Patient Safety Day क्यों मनाया जाता है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में लाखों लोग सिर्फ इसलिए गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं या जान गंवा देते हैं, क्योंकि इलाज के दौरान कोई न कोई मानवीय चूक हो जाती है.
- कभी गलत दवा मरीज के हाथ में थमा दी जाती है.
- कभी किसी जांच रिपोर्ट की अदला-बदली हो जाती है.
- कई बार तो अस्पताल के गंदे माहौल से ही नया इंफेक्शन लग जाता है.
- इन गलतियों से बचने के लिए मरीज और उसके परिवार का जागरूक होना सबसे बड़ी ढाल है.
डॉक्टर से सवाल पूछने में कभी हिचकिचाएं नहीं
हमारे यहां आज भी लोग डॉक्टर से सवाल करने में डरते हैं. मरीज को लगता है कि अगर उसने ज्यादा पूछताछ की तो डॉक्टर साहब गुस्सा न हो जाएं. पर सच्चाई यह है कि आपका शरीर आपका है और उस पर क्या इलाज हो रहा है, यह जानने का पूरा हक आपको है.
- जब भी डॉक्टर पर्चे पर कोई दवा लिखे, तो उससे पूछिए कि यह किस मर्ज की दवा है.
- डॉक्टर से साफ-साफ पूछें कि इस दवा को दिन में कितनी बार, खाने से पहले या बाद में लेना है.
- अगर कोई दवा महंगी लग रही है, तो झिझक छोड़कर डॉक्टर से उसका जेनेरिक विकल्प पूछने में संकोच मत कीजिए.
- अगर कोई गंभीर बीमारी बताई गई है और आप संतुष्ट नहीं हैं, तो किसी दूसरे अच्छे डॉक्टर से दूसरी राय (सेकंड ओपिनियन) जरूर लें. इसमें कोई बुराई नहीं है.
दवाइयों की पर्ची और एक्सपायरी डेट को लेकर न बरतें लापरवाही
अस्पताल या मेडिकल स्टोर से दवा लेते वक्त अक्सर लोग जल्दीबाजी में रहते हैं. यही लापरवाही कई बार जानलेवा साबित हो जाती है.
- दवा खरीदते समय मेडिकल वाले से साफ पूछ लें कि कौन सी गोली कब खानी है और उस पर पेन से लिखवा लें.
- मेडिकल स्टोर पर ही दवा के रैपर पर लिखी एक्सपायरी डेट को अपनी आखों से अच्छी तरह देख लें.
- अगर किसी खास दवा या पेनिसिलिन से आपको कभी एलर्जी हुई हो, तो डॉक्टर को सबसे पहले इस बारे में बताएं.
- घर में जो पुरानी दवाइयां बची रहती हैं, उन्हें बिना डाक्टर की सलाह के अपने मन से कभी न खाएं.
अस्पताल में संक्रमण से बचाव के लिए क्या करें?
अस्पताल वो जगह है जहां हर तरह के मरीज आते हैं, इसलिए वहां संक्रमण यानी इंफेक्शन फैलने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है.
- मरीज के पास जाने से पहले और उसके कमरे से बाहर निकलते समय साबुन या सैनिटाइजर से हाथ जरूर धोएं.
- अस्पताल के बिस्तर, रेलिंग या दीवारों को बार-बार छूने से बचें.
- अगर कोई नर्स या स्टाफ मरीज को इंजेक्शन लगाने या ड्रिप चढ़ाने आ रहा है, तो ध्यान दें कि उसने नए दस्ताने और नई सीरिंज का इस्तेमाल किया है या नहीं.
- मरीज से मिलने के लिए पूरे खानदान को अस्पताल लेकर न जाएं, इससे मरीज और मिलने वाले दोनों को खतरा रहता है.
मेडिकल रिपोर्ट और फाइलें संभालकर रखना क्यों जरूरी है?
अक्सर देखा जाता है कि जब कोई अचानक बीमार पड़ता है, तो पुरानी रिपोर्ट ढूंढने में ही आधा दिन निकल जाता है.
मरीज की पुरानी बीमारियों, खून की जांच, एक्स-रे और डिस्चार्ज कार्ड की एक अलग फाइल बनाकर हमेशा तैयार रखें.
जब भी अस्पताल में कोई नया टेस्ट हो, तो रिपोर्ट मिलते ही चेक करें कि उस पर मरीज का नाम और उम्र बिल्कुल सही लिखी है या नहीं.
अपनी पुरानी दवाइयों की पर्ची डॉक्टर को जरूर दिखाएं, ताकि वह कोई ऐसी नई दवा न लिख दे जो पुरानी दवा के साथ मिलकर नुकसान करे.
मरीज की आवाज उसकी सबसे बड़ी सुरक्षा क्यों है?
मरीज सुरक्षा दिवस का सबसे बड़ा संदेश यही है कि मरीज और उसके तीमारदार को इलाज की प्रक्रिया में भागीदार बनना होगा. अगर आपको अस्पताल में कोई चीज गलत लग रही है, नर्स ड्रिप उल्टी लगा रही है, या दवा खाने के बाद शरीर पर लाल चकत्ते पड़ रहे हैं, तो चुपचाप मत बैठिए. तुरंत ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ को बुलाकर बताइए.
अस्पताल कोई डरने की जगह नहीं है, लेकिन वहां आंख-कान खुला रखना हर आम इंसान की जिम्मेदारी है. अगली बार जब भी आप किसी अपने को लेकर अस्पताल या क्लीनिक जाएं, तो इन बुनियादी बातों को जरूर याद रखें. थोड़ी सी सतर्कता और समझदारी किसी भी बड़ी अनहोनी से बचा सकती है. स्वास्थ्य के मामले में सावधानी उपचार को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद कर सकती है..
भारत में मरीजों के कौन-कौन से अधिकार हैं?
- मरीज को अपनी बीमारी की जानकारी पाने का अधिकार है.
- मरीज इलाज के विकल्पों के बारे में पूछ सकता है.
- जरूरत पड़ने पर सेकंड ओपिनियन लेने का अधिकार है.
- मेडिकल रिकॉर्ड की कॉपी मांगने का अधिकार है.
- मरीज की निजी जानकारी गोपनीय रखी जानी चाहिए.
FAQs-
World Patient Safety Day कब मनाया जाता है?
हर साल 17 सितंबर को विश्व मरीज सुरक्षा दिवस मनाया जाता है.
मरीज की सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी बात क्या है?
दवाओं की सही जानकारी, डॉक्टर से संवाद और मेडिकल रिकॉर्ड संभालकर रखना.
क्या मरीज डॉक्टर से सवाल पूछ सकता है?
हां, मरीज को अपनी बीमारी और इलाज से जुड़ी जानकारी लेने का पूरा अधिकार है.
अस्पताल में संक्रमण से कैसे बचें?
हाथ साफ रखें, भीड़ से बचें और स्वच्छता नियमों का पालन करें.
सेकंड ओपिनियन क्या होता है?
किसी बीमारी या इलाज को लेकर दूसरे विशेषज्ञ डॉक्टर की राय लेना.
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