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This Article is From Aug 19, 2025

अल्ट्रासाउंड की मदद से शरीर के किसी भी हिस्से में पहुंचाई जा सकती है दवा, साइड इफेक्ट्स की गुंजाइश भी कम

Ultrasound-guided Drug Delivery: इस अध्ययन में टीम ने चूहों पर प्रयोग किया और दिखाया कि उनकी प्रणाली ब्रेन के विशिष्ट क्षेत्रों में केटामाइन और अंगों की विशिष्ट नसों तक दर्द निवारक दवाएं पहुंचा सकती है. एक नए सुक्रोज फॉर्मूलेशन का उपयोग करके उन्होंने पाया कि नैनो कण ज्यादा सुरक्षित, स्थिर और उत्पादन में आसान हैं.

अल्ट्रासाउंड की मदद से शरीर के किसी भी हिस्से में पहुंचाई जा सकती है दवा, साइड इफेक्ट्स की गुंजाइश भी कम
इस शोध को नेचर नैनोटेक्नोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित किया गया है.

Drug Delivery Systems: अमेरिकी शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक विकसित की है जिसमें अल्ट्रासाउंड का उपयोग करके शरीर के किसी भी हिस्से में दवा पहुंचाई जा सकती है, जिससे दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने नैनोकणों का उपयोग करके एक प्रणाली विकसित की है जो दवाओं को उनके इच्छित गंतव्य तक पहुंचाने में मदद करती है. इस शोध को नेचर नैनोटेक्नोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित किया गया है. इस अध्ययन में टीम ने चूहों पर प्रयोग किया और दिखाया कि उनकी प्रणाली ब्रेन के विशिष्ट क्षेत्रों में केटामाइन और अंगों की विशिष्ट नसों तक दर्द निवारक दवाएं पहुंचा सकती है. एक नए सुक्रोज फॉर्मूलेशन का उपयोग करके उन्होंने पाया कि नैनो कण ज्यादा सुरक्षित, स्थिर और उत्पादन में आसान हैं.

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इसे काम करने के लिए थोड़ी सी चीनी भी जरूरी

स्टैनफोर्ड मेडिसिन में रेडियोलॉजी के सहायक प्रोफेसर राग ऐरन ने कहा, "पता चला कि इसे काम करने के लिए बस थोड़ी सी चीनी की जरूरत है." शोधकर्ताओं ने पाया कि नैनोकणों के अंदर 5 प्रतिशत सुक्रोज घोल उन्हें शरीर में अपेक्षाकृत स्थिर बनाता है, फिर भी अल्ट्रासाउंड उत्तेजना के प्रति प्रतिक्रियाशील बनाता है.

इसका मतलब है कि जब नैनोकणों को ब्लड फ्लो में पहुंचाया जाता है और पूरे शरीर में पहुंचाया जाता है, तब भी ज्यादातर दवा वहीं पहुंचती है जहां उसकी जरूरत होती है. अल्ट्रासाउंड की एक पतली किरण, बाहरी रूप से लगाई जाती है, लक्ष्य पर सटीक निशाना साधती है और दवा छोड़ती है.

ऐसी प्रणाली में कई तरह की दवाओं को सुरक्षित और ज्यादा प्रभावी बनाने की क्षमता है. ऐरन ने कहा, "हम थेरेपी इफेक्ट को ज्यादा और लक्ष्य से बाहर के प्रभावों को न्यूनतम कर सकते हैं."

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टीम ने कैसे-कैसे की स्टडी?

शुरुआत में, नैनोकणों में एक पॉलीमर आवरण होता था जो असामान्य रासायनिक यौगिकों के एक तरल कोर से भरा होता था. लेकिन, जब यह कारगर नहीं हुआ, तो टीम ने अल्ट्रासाउंड के प्रति इसकी प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए पॉलीमर से लेकर सॉल्ट तक, कई सामान्य पदार्थों को तरल कोर में मिलाने की कोशिश की.

अंत में, उन्होंने चीनी का प्रयोग किया. कई प्रकार की शर्कराओं और सांद्रताओं का परीक्षण करने के बाद, शोधकर्ताओं ने पाया कि तरल कोर में 5 प्रतिशत सुक्रोज मिलाने से शरीर के तापमान पर अल्ट्रासाउंड प्रतिक्रिया और स्थिरता का सबसे अच्छा संतुलन प्राप्त हुआ.

इसके बाद शोधकर्ताओं ने चूहों पर ड्रग डिलीवर सिस्टम की टेस्टिंग की. जब शोधकर्ताओं ने ब्रेन के किसी विशेष क्षेत्र पर अल्ट्रासाउंड लगाया, तो नैनोकणों ने उस क्षेत्र में ब्रेन के अन्य भागों की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा दवा पहुंचाई.

शोधकर्ताओं ने कहा कि अगर यह प्रणाली मनुष्यों में काम करती है, तो डॉक्टर डिप्रेशन के इलाज में केटामाइन के भावनात्मक प्रभावों को अलग करने में सक्षम हो सकते हैं.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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अवधेश पैन्यूली
Senior Sub Editor
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