Type-1 Diabetes Affects On Brain: आज के समय में टाइप-1 डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं, खासकर बच्चों और युवाओं में यह बीमारी ज्यादा देखने को मिल रही है. पहले इसे सिर्फ ब्लड शुगर (Blood Sugar) से जुड़ी बीमारी माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. हाल ही में आई एक नई रिसर्च ने इस बीमारी को लेकर लोगों की चिंता बढ़ा दी है. इस अध्ययन में बताया गया है कि टाइप-1 डायबिटीज का असर सिर्फ शरीर पर ही नहीं, बल्कि दिमाग (Brain) और याददाश्त (Memory) पर भी पड़ सकता है. इसलिए इस बीमारी को हल्के में लेना बिल्कुल सही नहीं है.
क्या कहती है रिसर्च?
Nature (2025) में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित लोगों में दिमाग की काम करने की क्षमता पर असर देखा गया है. इसमें याददाश्त कमजोर होना, ध्यान लगाने में परेशानी और सोचने की गति धीमी होना शामिल है. रिसर्च में यह भी सामने आया है कि जब ब्लड शुगर बार-बार ऊपर-नीचे होता है, तो इसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है. खासकर जब शुगर बहुत कम हो जाती है या लंबे समय तक ज्यादा रहती है, तो यह स्थिति दिमाग के लिए नुकसानदायक हो सकती है. इससे नई चीजें सीखने और उन्हें याद रखने में दिक्कत हो सकती है.

कितने समय से चल रही है बीमारी, इसका पड़ता है दिमाग पर असर
इस अध्ययन में यह भी पाया गया कि बीमारी कब शुरू हुई और कितने समय से चल रही है, इसका भी असर पड़ता है. अगर किसी बच्चे को कम उम्र में टाइप-1 डायबिटीज हो जाती है, तो इससे उसके दिमाग के विकास पर असर पड़ सकता है. ऐसे बच्चों में पढ़ाई और समझने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. वहीं, जो लोग लंबे समय से इस बीमारी से जूझ रहे हैं, उनमें भी धीरे-धीरे दिमाग पर असर बढ़ सकता है. बार-बार शुगर का बदलना दिमाग को कमजोर बना सकता है. इसलिए समय रहते इसे कंट्रोल करना बहुत जरूरी है.
रोजमर्रा की जिंदगी पर असर
टाइप-1 डायबिटीज का असर सिर्फ याददाश्त तक सीमित नहीं रहता. इससे रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हो सकते हैं. जैसे किसी काम पर ध्यान न लग पाना, सही समय पर सही फैसला न ले पाना और काम को ठीक से प्लान न कर पाना. इसका असर पढ़ाई, नौकरी और लोगों के साथ रिश्तों पर भी पड़ सकता है. कई बार व्यक्ति को थकान महसूस होती है, आत्मविश्वास कम हो जाता है और तनाव या चिंता भी बढ़ सकती है.
कैसे रखें खुद को सुरक्षित?
डॉक्टरों का कहना है कि सबसे जरूरी है ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना. इसके लिए नियमित जांच कराना, सही समय पर इंसुलिन लेना, संतुलित खाना खाना और रोजाना थोड़ी एक्सरसाइज करना जरूरी है.
इसके साथ ही दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए अच्छी नींद लेना, तनाव कम करना और समय-समय पर डॉक्टर से सलाह लेना भी जरूरी है. सही देखभाल और जागरूकता से इस बीमारी के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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