Pancreatic Cancer Drug Daraxonrasib: पैंक्रियाटिक कैंसर (Pancreatic Cancer) उन कैंसर में शामिल है, जिनका इलाज सबसे मुश्किल माना जाता है. इसकी वजह यह है कि ज्यादातर मरीजों में बीमारी का पता तब चलता है, जब कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल चुका होता है. ऐसे में ऑपरेशन का मौका भी कम बचता है और कीमोथेरेपी (Chemotherapy) से भी बहुत ज्यादा फायदा नहीं मिल पाता.
अब एक नई दवा ने डॉक्टरों और मरीजों दोनों की उम्मीद बढ़ा दी है. डैराक्सोनरैसिब (Daraxonrasib) नाम की गोली ने बड़े क्लीनिकल ट्रायल (Clinical Trial) में कीमोथेरेपी के मुकाबले बेहतर नतीजे दिए हैं. इससे न सिर्फ मरीज पहले के मुकाबले ज्यादा समय तक जीवित रहे, बल्कि कई लोगों की जिंदगी की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला.
नई दवा में ऐसा क्या खास है?
डैराक्सोनरैसिब (Daraxonrasib) रोजाना ली जाने वाली एक गोली है. यह अभी एक्सपेरिमेंटल दवा है, यानी इसे आम मरीजों के लिए मंजूरी नहीं मिली है. हालांकि फेज III क्लीनिकल ट्रायल में इसके नतीजों ने कैंसर विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. कई डॉक्टर इसे पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज में पिछले कई सालों की सबसे बड़ी प्रगति मान रहे हैं.
करीब 500 मरीजों पर हुए ट्रायल में डैराक्सोनरैसिब (Daraxonrasib) ने कीमोथेरेपी (Chemotherapy) को पीछे छोड़ दिया. इस दवा से इलाज कराने वाले मरीजों की मीडियन ओवरऑल सर्वाइवल 13 महीने से ज्यादा दर्ज की गई, जबकि कीमोथेरेपी लेने वाले मरीजों में यह सात महीने से भी कम रही. यानी नई दवा ने मरीजों को औसतन करीब छह महीने का अतिरिक्त समय दिया. कई मरीजों में दर्द भी कम हुआ और उनकी लाइफ क्वालिटी में भी सुधार देखने को मिला.
दवा कैसे करती है काम?
पैंक्रियाटिक कैंसर के करीब 90 प्रतिशत मामलों में RAS (Rat Sarcoma) नाम का प्रोटीन लगातार सक्रिय रहता है. यही प्रोटीन कैंसर कोशिकाओं को लगातार बढ़ने का संकेत देता रहता है. डैराक्सोनरैसिब (Daraxonrasib) इस प्रोटीन को सीधे निशाना बनाती है और उसके सिग्नल को रोकने की कोशिश करती है. इससे कैंसर कोशिकाओं की बढ़त धीमी पड़ सकती है.
क्या इससे कैंसर पूरी तरह ठीक हो जाएगा?
फिलहाल इसका जवाब 'नहीं' है. इस रिसर्च से जुड़े और दूसरे कैंसर विशेषज्ञों ने साफ कहा है कि यह दवा पैंक्रियाटिक कैंसर का इलाज नहीं है. हालांकि जिन मरीजों में बीमारी काफी फैल चुकी है, उनके लिए यह मौजूदा इलाज के मुकाबले बेहतर विकल्प साबित हो सकती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह दवा भविष्य में और असरदार इलाज विकसित करने का रास्ता भी खोल सकती है.
कुछ साइड इफेक्ट भी हैं
इस दवा के कुछ साइड इफेक्ट भी सामने आए हैं. सबसे ज्यादा देखने वाली समस्या त्वचा पर रैश रही. इसके अलावा कुछ मरीजों में मतली, उल्टी, दस्त और मुंह में छाले की शिकायत भी हुई. हालांकि ट्रायल में यह भी सामने आया कि कीमोथेरेपी (Chemotherapy) की तुलना में इस दवा की वजह से इलाज बीच में छोड़ने वाले मरीज काफी कम थे.
अमेरिका की दवा नियामक संस्था FDA (U.S. Food and Drug Administration) ने अभी डैराक्सोनरैसिब (Daraxonrasib) को पूरी मंजूरी नहीं दी है. हालांकि गंभीर हालत वाले कुछ पैंक्रियाटिक कैंसर मरीजों के लिए, जिनके पास इलाज का दूसरा विकल्प नहीं है, इस दवा तक विशेष पहुंच की अनुमति दी गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आगे के नतीजे भी इसी तरह सकारात्मक रहे, तो आने वाले समय में यह दवा इलाज का अहम हिस्सा बन सकती है.
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