- लंबे समय तक स्टेटिक स्ट्रेचिंग करने से मांसपेशियों की ताकत और स्पीड अस्थायी रूप से कम हो सकती है
- डायनामिक स्ट्रेचिंग वर्कआउट से पहले शरीर की मांसपेशियों में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाकर चोट लगने का खतरा कम करती है
- स्टेटिक स्ट्रेचिंग वर्कआउट के बाद कूल डाउन के दौरान करना सबसे उपयुक्त होता है.
सालों से हम यह सुनते आए हैं कि जिम या किसी भी कसरत की शुरुआत करने से पहले अच्छी तरह स्ट्रेचिंग कर लेनी चाहिए. बहुत से लोग रनिंग या वेट उठाने से पहले जांघों, कंधों या पिंडलियों को खींचकर 20-30 सेकंड तक उसी पोजीशन में खड़े रहते हैं. लोगों का मानना होता है कि इससे बदन खुल जाता है, नसें लचीली होती हैं और चोट लगने का डर नहीं रहता. लेकिन पिछले कुछ सालों में मेडिकल और स्पोर्ट्स साइंस की नई रिसर्च ने इस पुरानी सोच को पूरी तरह बदल दिया है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि वर्कआउट से तुरंत पहले स्टेटिक स्ट्रेचिंग (Static Stretching) यानी एक जगह रुककर मांसपेशियों को लंबे समय तक खींचना हमेशा फायदेमंद नहीं होता. खासकर तब, जब आप भारी वजन उठाने, तेज दौड़ने या कोई ऐसा वर्कआउट करने जा रहे हों जिसमें ताकत और स्पीड की जरूरत होती है. इसका यह मतलब कतई नहीं है कि स्ट्रेचिंग खराब है, बल्कि सारा खेल इसकी सही टाइमिंग और तरीके का है.
स्टेटिक स्ट्रेचिंग क्या होती है और इससे क्या नुकसान हो सकता है?
जब आप किसी मांसपेशी को स्ट्रेच करके 15 से 60 सेकंड के लिए उसी हालत में रोके रखते हैं, तो उसे स्टेटिक स्ट्रेचिंग कहते हैं. जैसे अपने पैर के अंगूठे छूकर वहीं रुके रहना या हाथ को सीने के आर-पार खींचकर रखना.
यह स्ट्रेचिंग शरीर का लचीलापन (Flexibility) बढ़ाने के लिए बहुत अच्छी है. लेकिन अगर आप हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज या भारी वजन उठाने से ठीक पहले बहुत देर तक स्टेटिक स्ट्रेचिंग करते हैं, तो मांसपेशियां कुछ समय के लिए ढीली पड़ जाती हैं. इससे आपकी ताकत (Strength) और स्पीड में अस्थायी रूप से कमी आ सकती है.
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डायनामिक वार्मअप क्यों है सबसे बेहतर विकल्प?
एक्सपर्ट्स अब कसरत से पहले डायनामिक स्ट्रेचिंग (Dynamic Stretching) यानी हिलते-डुलते हुए किए जाने वाले वार्मअप की सलाह देते हैं. यह आपके शरीर को आने वाले वर्कआउट के लिए पूरी तरह तैयार करता है:
- यह एक्टिव मांसपेशियों में ब्लड सर्कुलेशन को तेज करता है.
- शरीर का तापमान और दिल की धड़कन धीरे-धीरे बढ़ती है.
- जोड़ों (Joints) की मूवमेंट स्मूद हो जाती है और शरीरिक जकड़न खुलती है.
- यह नर्वस सिस्टम को अलर्ट करता है ताकि आप चोट से बच सकें.
अगर आप पैरों की एक्सरसाइज करने जा रहे हैं, तो रुककर स्ट्रेच करने के बजाय बिना वजन के स्क्वाट्स, चलते हुए लंजेस या लेग स्विंग्स करना ज्यादा फायदेमंद होता है.
क्या स्ट्रेचिंग करने से चोट नहीं लगती?
यह सोचना बिल्कुल गलत है कि सिर्फ स्ट्रेचिंग कर लेने से चोट लगने का खतरा खत्म हो जाएगा. एक्सरसाइज के दौरान चोट कई कारणों से लग सकती है, जैसे गलत तकनीक, अचानक बहुत भारी वजन उठाना, शरीर की जरूरत से ज्यादा कसरत करना या पूरी रिकवरी न मिलना. एक अच्छा वार्मअप शरीर को तैयार जरूर करता है, लेकिन इसके साथ-साथ सही तकनीक और समझदारी से ट्रेनिंग करना भी उतना ही जरूरी है.
स्टेटिक स्ट्रेचिंग करने का सबसे सही समय कब है?
स्टेटिक स्ट्रेचिंग करने का सबसे बेहतरीन समय वर्कआउट खत्म होने के बाद यानी 'कूल डाउन' के वक्त होता है. कसरत के बाद शरीर की मांसपेशियां पहले से गर्म होती हैं, जिससे उन्हें बिना किसी दर्द या खिंचाव के लचीला बनाना आसान हो जाता है. इसके अलावा आप दिन के किसी दूसरे समय पर भी अलग से फ्लेक्सिबिलिटी सेशन कर सकते हैं.
एक सही और परफेक्ट वार्मअप कैसा होना चाहिए?
वार्मअप बहुत ज्यादा उलझा हुआ या थकाने वाला नहीं होना चाहिए.
1. सबसे पहले 5 से 10 मिनट तक हल्की जॉगिंग, तेज चाल में टहलना या हल्की साइकिलिंग करें.
2. इसके बाद जो एक्सरसाइज आप मुख्य वर्कआउट में करने वाले हैं, उसी के हल्के और डायनामिक मूवमेंट्स करें.
3. अगर आप वेट लिफ्टिंग कर रहे हैं, तो सीधे भारी वजन उठाने के बजाय पहले खाली रॉड या बहुत हल्के डंबल से शुरुआत करें.
कुल मिलाकर
वर्कआउट से पहले लंबे समय तक एक ही जगह रुककर स्ट्रेच करने की पुरानी आदत को अब बदलने का वक्त आ गया है. अपनी कसरत की शुरुआत हमेशा हल्के डायनामिक मूवमेंट्स और वार्मअप से करें. वहीं अपने बदन का लचीलापन बढ़ाने वाली स्टेटिक स्ट्रेचिंग को कसरत खत्म होने के बाद के लिए बचाकर रखें.
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