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75 की उम्र में डंबल उठाते दिखे 'थलाइवा' रजनीकांत, क्या इस उम्र में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग सेफ है? जानिए एक्सपर्ट्स

75 साल की उम्र में भी रजनीकांत रेगुलर वर्कआउट करते हैं. जानिए इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट और चीफ कार्डियक ट्रांसप्लांट फिजिशियन डॉ. साई सुधाकर के अनुसार 70 के बाद स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, वॉक और फिटनेस रूटीन कितना जरूरी है.

75 की उम्र में डंबल उठाते दिखे 'थलाइवा' रजनीकांत, क्या इस उम्र में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग सेफ है? जानिए एक्सपर्ट्स
75 की उम्र और हार्ट सर्जरी के बाद भी इतने फिट कैसे हैं रजनीकांत? 70+ वालों के लिए फिटनेस के जरूरी नियम
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भारतीय सिनेमा के 'थलाइवा' यानी सुपरस्टार रजनीकांत ने इंडस्ट्री में अपने 51 शानदार साल पूरे कर लिए हैं. इस खास मौके का जश्न 15 अगस्त को उनकी आने वाली फिल्म 'धर्मन' (Dharman) के सेट पर निर्देशक अश्वथ मारिमुथु और पूरी टीम के साथ केक काटकर मनाया गया. आज 75 साल की उम्र में भी रजनीकांत का जादू बिल्कुल कम नहीं हुआ है, लेकिन सिनेमा के अलावा एक और चीज है जो आजकल लोगों का ध्यान खींच रही है और वह है उनकी गजब की फिटनेस. इस उम्र में भी रजनीकांत का रेगुलर वर्कआउट करना और एक्टिव रहना वाकई प्रेरणा देने वाला है.

खासकर तब, जब उनका एक पुराना मेडिकल इतिहास रहा है. कुछ साल पहले उनकी कैरोटिड आर्टरी की एक बड़ी सर्जरी हुई थी. ऐसे में 75 साल की उम्र में जिम में पसीना बहाना और डंबल उठाना कई लोगों के मन में यह सवाल खड़ा करता है कि क्या 70 के दशक में भी दिल या नसों की बीमारी के बाद इस तरह भारी एक्सरसाइज करना सुरक्षित है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि उम्र चाहे जो हो, फिजिकल एक्टिविटी बंद नहीं करनी चाहिए, लेकिन इसे अपनी सेहत और डॉक्टर की सलाह के मुताबिक ढालना सबसे जरूरी है.

रजनीकांत की हेल्थ हिस्ट्री और उनका फिटनेस रूटीन

साल 2021 में रजनीकांत को अचानक चक्कर आने की शिकायत हुई थी, जिसके बाद उनकी 'कैरोटिड आर्टरी कैरोटिड आर्टरी रिवास्कुलराइजेशन' सर्जरी की गई थी. कैरोटिड आर्टरी हमारे शरीर की वो मुख्य नसें होती हैं जो दिल से दिमाग तक ऑक्सीजन युक्त साफ खून पहुंचाती हैं. अगर इनमें रुकावट या ब्लॉकेज आ जाए, तो स्ट्रोक या लकवे का खतरा बहुत बढ़ जाता है.

ग्लेनइगल्स हॉस्पिटल (फोर्टिस नेटवर्क), हैदराबाद के चीफ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट और चीफ कार्डियक ट्रांसप्लांट फिजिशियन डॉ. साई सुधाकर बताते हैं कि किसी को दिल या नसों की बीमारी होना या उसकी कोई सर्जरी होने का यह कतई मतलब नहीं है कि वह इंसान पूरी तरह आराम की मुद्रा में चला जाए और हिलना-डुलना ही बंद कर दे.

डॉ. सुधाकर कहते हैं, "रजनीकांत का 75 साल का होना सिर्फ सिनेमा के लिए एक माइलस्टोन नहीं है, बल्कि यह हम सभी के लिए एक सीख है कि उम्र बढ़ने का मतलब सुस्त या लाचार हो जाना नहीं होता." उनका मानना है कि उम्र के 70वें पड़ाव पर भी अगर आप थोड़ी बहुत स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं, तो यह आपकी जिंदगी की क्वालिटी और आत्मनिर्भरता के लिए एक बेहतरीन इन्वेस्टमेंट है. हालांकि, किसी भी पुरानी बीमारी के बाद वर्कआउट शुरू करने से पहले मेडिकल जांच बेहद जरूरी है.

70 के बाद स्ट्रेंथ ट्रेनिंग क्यों है इतनी जरूरी?

अक्सर हमारे समाज में यह धारणा बनी हुई है कि बुढ़ापे में सिर्फ धीरे-धीरे टहलना या हल्का-फुल्का हाथ-पैर हिलाना ही काफी है. लेकिन मेडिकल साइंस कहता है कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर की मांसपेशियां (Muscles) और ताकत प्राकृतिक रूप से तेजी से घटने लगती है. इसे 'सार्कोपेनिया' कहते हैं. मांसपेशियां कमजोर होने से शरीर का बैलेंस बिगड़ने लगता है, उठने-बैठने में दिक्कत आती है और गिरने या चोट लगने का खतरा काफी बढ़ जाता है.

रजनीकांत को हाल ही में ट्रेनर की निगरानी में स्क्वाट्स और इंक्लाइन डंबल प्रेस जैसी स्ट्रेंथ एक्सरसाइज करते देखा गया था. यह देखकर जोश में आना तो ठीक है, लेकिन बुजुर्गों को बिना अपनी सेहत समझे किसी सेलिब्रिटी की नकल नहीं करनी चाहिए. डॉ. सुधाकर साफ कहते हैं कि 70 के बाद आपका मकसद किसी हीरो जैसी बॉडी बनाना नहीं, बल्कि खुद को इतना फिट रखना होना चाहिए कि आप अपने रोजमर्रा के काम बिना किसी के सहारे कर सकें.

70 पार के लोगों को कैसा वर्कआउट करना चाहिए?

हर इंसान का शरीर और उसकी क्षमता अलग होती है. जिसने जवानी से कसरत की हो, उसका शरीर अलग बर्ताव करेगा और जिसने 70 की उम्र में शुरुआत की हो, उसकी जरूरतें बिल्कुल अलग होंगी.

मुंबई के ग्लेनइगल्स हॉस्पिटल की इंटरनल मेडिसिन कंसलटेंट डॉ. मंजूषा अग्रवाल के अनुसार, 70 के बाद एक्सरसाइज का लक्ष्य किसी खेल का चैंपियन बनना नहीं, बल्कि शरीर का लचीलापन, बैलेंस और दिल की ताकत बनाए रखना है. एक बुजुर्ग व्यक्ति को अपने रूटीन में इन चार चीजों को जरूर शामिल करना चाहिए:

  1. पैदल चलना और हल्की एरोबिक एक्सरसाइज: रोजाना खुली हवा में टहलना सबसे सुरक्षित और आसान कसरत है. इससे दिल की धड़कन और फेफड़े मजबूत रहते हैं. शुरुआत में धीमी गति से चलें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं.
  2. रेजिस्टेंस और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: मांसपेशियों को ढीला होने से बचाने के लिए हल्के डंबल, रेजिस्टेंस बैंड या फिर अपने शरीर के वजन के सहारे की जाने वाली एक्सरसाइज (जैसे कुर्सी से उठना-बैठना) बहुत फायदेमंद होती हैं. दिल या जोड़ों के मरीजों को वजन उठाने से पहले अपने फिजिशियन से बात कर लेनी चाहिए.
  3. बैलेंस बनाने वाले व्यायाम: उम्र के साथ शरीर का संतुलन बिगड़ने लगता है जिससे पैर फिसलने का डर रहता है. दीवार का सहारा लेकर एक पैर पर खड़े होना या हल्के बैलेंसिंग मूवमेंट्स करना बुजुर्गों को गिरने से बचाता है.
  4. स्ट्रेचिंग और मोबिलिटी: हल्के हाथों से बदन को स्ट्रेच करना जोड़ों को खुलने में मदद करता है. इससे हाथ-पैर में जकड़न नहीं आती और कपड़े पहनना, झुकना या मुड़ना आसान हो जाता है.

सिर्फ कसरत काफी नहीं, इन बातों का भी रखें ध्यान

अगर आप 70 की उम्र में एक्टिव रहना चाहते हैं, तो सिर्फ जिम जाने से काम नहीं चलेगा. डॉ. सुधाकर की सलाह है कि ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसी पुरानी बीमारियों की नियमित जांच कराते रहें. तंबाकू और बीड़ी-सिगरेट से पूरी तरह दूरी बनाएं, रात को 7-8 घंटे की गहरी नींद लें और तनाव बिल्कुल न लें. जिन लोगों की नसों या दिल की सर्जरी हुई है, उनके लिए समय-समय पर डॉक्टर को दिखाना और दवाओं का नियम से सेवन करना सबसे ज्यादा जरूरी है.

बुढ़ापे में डाइट का रोल और बढ़ जाता है

उम्र बढ़ने पर शरीर को खाने की ज्यादा जरूरत नहीं होती, लेकिन सही पोषण की जरूरत दोगुनी हो जाती है. डॉ. मंजूषा बताती हैं कि बुजुर्गों के शरीर में मसल्स को टूटने से बचाने के लिए पर्याप्त प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन डी का होना बहुत जरूरी है.

  • खाने में दालें, फलियां, दूध, दही, पनीर, सोयाबीन और जो लोग मांसाहारी हैं वे अंडे या मछली शामिल कर सकते हैं.
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि शरीर डिहाइड्रेशन का शिकार न हो.
  • ताजे फल, हरी सब्जियां और मोटा अनाज खाएं.
  • जिन लोगों को किडनी की बीमारी है, वे प्रोटीन की मात्रा डॉक्टर से पूछकर ही तय करें.

क्या सर्जरी के बाद भारी कसरत सुरक्षित है?

कैरोटिड सर्जरी के बाद मरीज पूरी तरह बिस्तर पकड़ ले, यह जरूरी नहीं है. लेकिन सर्जरी के तुरंत बाद भारी वजन उठाना या अचानक तेज दौड़ना बहुत बड़ा खतरा बन सकता है. शरीर को धीरे-धीरे नए रूटीन की आदत डालने दें.

डॉ. मंजूषा चेतावनी देती हैं कि कई बार लोग जोश में आकर अपनी उम्र और क्षमता से ज्यादा कसरत करने लगते हैं, जो दिल के लिए जानलेवा हो सकता है. 30 साल के युवक की कसरत और 75 साल के बुजुर्ग की कसरत में जमीन-आसमान का फर्क होता है. अगर एक्सरसाइज करते वक्त जरा सा भी सीने में भारीपन, चक्कर, आंखों के आगे अंधेरा, सांस फूलना या अजीब सी थकान लगे, तो उसी वक्त रुक जाएं और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.

कुल म‍िलाकर

रजनीकांत की फिटनेस हमें यह शानदार संदेश देती है कि उम्र सिर्फ एक नंबर है अगर आपका हौसला मजबूत हो. उनका वर्कआउट यह नहीं कहता कि आप भी कल से भारी डंबल उठाना शुरू कर दें, बल्कि यह सिखाता है कि बुढ़ापे में भी आप बिना किसी के सहारे स्वाभिमान से जी सकते हैं.

70 की उम्र पार करने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आपकी एक्टिव लाइफ खत्म हो गई. सही खानपान, हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, वॉक और डॉक्टरों की उचित सलाह के साथ आप 70, 75 या 80 की उम्र में भी पूरी तरह चुस्त और सेहतमंद रह सकते हैं.

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