अक्सर लोग गॉल ब्लैडर में स्टोन को एक नॉर्मल प्रॉब्लम मानकर सिर्फ ऑपरेशन तक ही बात खत्म समझ लेते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि गॉल ब्लैडर में स्टोन बनने के पीछे फैटी लिवर और शरीर में बढ़ी हुई चर्बी भी एक बड़ी वजह हो सकती है? इतना ही नहीं, ये आगे चलकर ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हार्ट और किडनी की बीमारियों की बड़ी वजह भी बन सकती है. इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बाइलरी साइंसेंस के डायरेक्टर डॉ. एस.के. सरीन ने NDTV से बातचीत में इस विषय पर जानकारी दी.
कैसे शुरू होती है स्टोन की परेशानी-
डॉ. एस.के. सरीन के मुताबिक जब शरीर में एक्स्ट्रा फैट जमा होने लगता है तो उसका असर सिर्फ लिवर तक सीमित नहीं रहता. लिवर से बनने वाला बाइल गॉल ब्लैडर में जमा होता है. अगर लंबे समय तक शरीर में फैट ज्यादा बना रहे तो बाइल्स का बैलेंस बिगड़ सकता है और धीरे धीरे उसमें स्टोन बनने लगते हैं. उन्होंने बताया कि गॉल ब्लैडर में स्टोन होना अक्सर इस बात का संकेत होता है कि शरीर का मेटाबॉलिज्म सही तरीके से काम नहीं कर रहा. ऐसे लोगों में आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, दिल की बीमारी और किडनी से जुड़ी समस्याओं का खतरा नॉर्मल लोगों की तुलना में ज्यादा हो सकता है.
ऑपरेशन के बाद भी रखें वजन पर कंट्रोल-
डॉ. सरीन ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का गॉल ब्लैडर ऑपरेशन से निकाल दिया गया है तो आमतौर पर शरीर खुद को नई स्थिति के अनुसार ढाल लेता है. इसलिए सिर्फ गॉल ब्लैडर निकल जाने से घबराने की जरूरत नहीं होती. हालांकि ये भी नहीं माना जाना चाहिए कि बीमारियों ने पीछा छोड़ दिया है. उनका कहना है कि जिन लोगों को गॉल ब्लैडर में स्टोन हो चुका है. उन्हें अपना वजन कंट्रोल में रखना चाहिए और फैटी लिवर से बचने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनानी चाहिए. बैलेंस फूड, रेगुलर एक्सरसाइज और ओबेसिटी से बचना भी बेहद जरूरी है.
फैमिली हिस्ट्री का असर-
डॉ. सरीन ने ये भी बताया कि गॉल ब्लैडर में स्टोन बनने की टेंडेंसी फैमिली हिस्ट्री का भी हिस्सा हो सकती है. अगर माता या पिता को स्टोन की समस्या रही है तो बच्चों में इसका खतरा कई गुना बढ़ सकता है. इसलिए बच्चों का वजन बचपन से ही कंट्रोल में रखना जरूरी है. आजकल छोटे बच्चों में भी फैटी लिवर के मामले सामने आ रहे हैं. जो आगे चलकर कई गंभीर बीमारियों की वजह बन सकते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि गॉल ब्लैडर में स्टोन को केवल एक सर्जरी वाली बीमारी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ये इस बात का भी संकेत है कि शरीर की मेटाबॉलिक हेल्थ ठीक नहीं है.
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