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दिल्ली की हवा में पाया गया स्टैफिलोकोकी नाम का सुपरबग, जानिए कितना खतरनाक है ये और कैसे बचें

Superbug in Delhi Air: हवा में मौजूद यह सुपरबग कितना खतरनाक है, यह शरीर में कैसे पहुंचता है और आम लोग इससे कैसे खुद को सुरक्षित रख सकते हैं? आइए जानते हैं आसान भाषा में.

दिल्ली की हवा में पाया गया स्टैफिलोकोकी नाम का सुपरबग, जानिए कितना खतरनाक है ये और कैसे बचें
सुपरबग्स ऐसे बैक्टीरिया होते हैं, जिन पर आम एंटीबायोटिक दवाओं का असर बहुत कम या बिल्कुल नहीं होता.

Staphylococcus Superbug: दिल्ली की हवा को लेकर अब तक चर्चा प्रदूषण, धूल, धुएं और जहरीली गैसों तक सीमित थी. लेकिन, अब एक नई और ज्यादा चिंताजनक बात सामने आई है. हाल ही में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के रिसर्चर्स द्वारा की गई एक स्टडी में यह सामने आया है कि दिल्ली की हवा में स्टैफिलोकोकी (Staphylococci) नाम का एक सुपरबग मौजूद है. यह खबर इसलिए गंभीर है क्योंकि सुपरबग्स ऐसे बैक्टीरिया होते हैं, जिन पर आम एंटीबायोटिक दवाओं का असर बहुत कम या बिल्कुल नहीं होता. यानी अगर ये शरीर में प्रवेश कर जाएं, तो इलाज मुश्किल हो सकता है. सवाल यह है कि हवा में मौजूद यह सुपरबग कितना खतरनाक है, यह शरीर में कैसे पहुंचता है और आम लोग इससे कैसे खुद को सुरक्षित रख सकते हैं?

क्या होता है स्टैफिलोकोकी सुपरबग?

स्टैफिलोकोकी एक प्रकार का बैक्टीरिया समूह है, जो आमतौर पर त्वचा, नाक, गले में पाया जा सकता है. सामान्य स्थिति में यह हमेशा नुकसानदेह नहीं होता, लेकिन जब यही बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधी (Antibiotic Resistant) हो जाता है, तब इसे सुपरबग कहा जाता है. ऐसे बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण जल्दी ठीक नहीं होता और गंभीर रूप ले सकता है.

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हवा में सुपरबग कैसे पहुंचा?

रिसर्चर्स के अनुसार, दिल्ली जैसे बड़े शहरों में बहुत ज्यादा वायु प्रदूषण, अस्पतालों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से निकलने वाले सूक्ष्म कण, कचरा और सीवेज सिस्टम. इन सबके कारण बैक्टीरिया हवा में घुलकर एरोसोल कणों के रूप में फैल सकते हैं. सांस के साथ ये बैक्टीरिया शरीर के अंदर पहुंच सकते हैं, जो सबसे बड़ा खतरा है.

कितना खतरनाक हो सकता है यह सुपरबग?

  • स्टैफिलोकोकी सुपरबग से जुड़े संभावित खतरे फेफड़ों का संक्रमण (खासतौर पर अस्थमा या COPD मरीजों में)
  • त्वचा और घावों में संक्रमण.
  • कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में गंभीर बीमारी.
  • अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए ज्यादा जोखिम

क्योंकि इन पर दवाओं का असर सीमित होता है, इसलिए संक्रमण लंबा चल सकता है और जटिलताएं बढ़ सकती हैं.

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किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है?

  • बुजुर्ग
  • बच्चे
  • अस्थमा, एलर्जी या फेफड़ों की बीमारी वाले लोग
  • डायबिटीज या कमजोर इम्यून सिस्टम वाले मरीज
  • अस्पतालों में काम करने वाले लोग

सुपरबग से बचाव के लिए क्या कर सकते हैं?

  • बाहर निकलते समय मास्क पहनें, खासकर प्रदूषण वाले दिनों में.
  • घर में एयर प्यूरीफायर या अच्छी वेंटिलेशन रखें.
  • हाथ और चेहरे की साफ-सफाई का ध्यान रखें.
  • बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक का इस्तेमाल न करें.
  • इम्यूनिटी मजबूत रखने के लिए बैलेंस डाइट, नींद और व्यायाम अपनाएं.

दिल्ली की हवा में स्टैफिलोकोकी जैसे सुपरबग की मौजूदगी यह बताती है कि प्रदूषण का खतरा अब सिर्फ आंखों से दिखने वाला नहीं रहा. यह एक पब्लिक हेल्थ अलर्ट है, जो साफ-सफाई, सही दवा उपयोग और पर्यावरण सुधार की जरूरत को और गंभीर बनाता है. अगर समय रहते सतर्कता और सही आदतें अपनाई जाएं, तो इस अदृश्य खतरे से खुद को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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