Heart Attack Risk: पीरियड्स के दौरान पेट में होने वाले क्रैम्प्स और तेज दर्द को अक्सर सामान्य माना जाता है. कई लोग इसे थोड़ी-बहुत तकलीफ़ के रूप में सह लेte हैं और दर्द निवारक दवाइयां ले लेते हैं. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि क्या ऐसे दर्द का दिल पर कोई असर भी हो सकता है? क्या पीरियड दर्द सीधे-सीधे हार्ट अटैक जैसा खतरा बढ़ा सकता है? वैज्ञानिक रिसर्च और मेडिकल विशेषज्ञ कहते हैं कि हर दर्द दिल का संकेत नहीं होता, लेकिन कुछ स्थितियों में पीरियड से जुड़े कारणों के कारण हार्ट और कार्डियोवैस्कुलर (हार्ट की ब्लड वेसल्स) सेहत पर असर पड़ सकता है. यहां समझिए कि कैसे यह जोखिम बढ़ सकता है और कब इसे गंभीरता से लेना चाहिए.
पीरियड्स का दर्द कैसे और कब रिस्क बढ़ाता है? | How and When Does Menstrual Pain Increase the Risk?
1. दर्द की तीव्रता और शरीर की प्रतिक्रिया
पीरियड्स के समय गर्भाशय की मांसपेशियां सिकुड़ती हैं ताकि पुरानी परत बाहर निकल सके. इसके लिए शरीर प्रोस्टाग्लैंडिंस नामक रसायन बनाता है, जो दर्द और ऐंठन का कारण होते हैं. इस दर्द को कभी-कभी बहुत दर्दनाक बताया जाता है, कुछ व्यक्तियों की तुलना में यह हार्ट अटैक के दर्द जैसा तकलीफ देने वाला बताया गया है. हालांकि यह तुलना सार्वजनिक अनुभव पर आधारित है और हर महिला को लागू नहीं होती, फिर भी इससे यह पता चलता है कि कुछ महिलाओं के लिए क्रैम्प बहुत ज्यादा दर्दनाक हो सकते हैं.
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यह ध्यान रखना जरूरी है कि पीरियड का दर्द आमतौर पर हार्ट अटैक नहीं होता. लेकिन, दर्द की तीव्रता यह संकेत दे सकती है कि शरीर में किसी तरह की असामान्यता या तनाव है.
2. भारी मासिक धर्म (Heavy Menstrual Bleeding) और दिल का जोखिम
कुछ महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान बहुत हैवी ब्लीडिंग (HMB) होता है. हाल की शोध में पाया गया है कि भारी ब्लीडिंग युवा महिलाओं में हार्ट डिजीज (Cardiovascular Disease, CVD) का जोखिम बढ़ा सकती है, यहां तक कि अगर मासिक चक्र नियमित भी हो.
कैसे?
- भारी ब्लीडिंग से एनीमिया (रेड ब्लड सेल्स की कमी) होती है.
- इससे दिल को शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है.
- लंबे समय में यह दिल पर तनाव डाल सकता है.
अगर भारी ब्लीडिंग बार-बार होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है ताकि हार्ट रिस्क जोखिम को कम किया जा सके.
3. पीरियड डिसऑर्डर (जैसे PCOS, एंडोमेट्रियोसिस) और कार्डियोवैस्कुलर रिस्क
कुछ रिसर्च से पता चलता है कि कुछ मेंट्रुअल डिसऑर्डर्स जैसे PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम), एंडोमेट्रियोसिस और अनियमित चक्र, दिल की बीमारियों के जोखिम से जुड़े हैं. इन स्थितियों में सूजन और हार्मोनल असंतुलन जैसे कारण हो सकते हैं जो लंबे समय में दिल और ब्लड वेसल्स पर प्रभाव डालते हैं.
उदाहरण के लिए:
- PCOS से हाई ब्लड प्रेशर और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी स्थितियां हो सकती हैं.
- इससे दिल पर एक्स्ट्रा दबाव और दिल की बीमारी का जोखिम बढ़ सकता है.
4. दर्द निवारक दवाइयां और दिल पर असर
बहुत-सारी महिलाएं पीरियड क्रैम्प्स के लिए NSAIDs जैसे इबुप्रोफेन या नैप्रोक्सेन का इस्तेमाल करती हैं. अगर इन दवाओं को लगातार या बिना सलाह के लिया जाए, तो कुछ अध्ययनों के अनुसार इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है, खासकर उन लोगों में जिनके पहले से दिल की बीमारी का खतरा है. इसलिए दर्द की दवा लेते समय हमेशा डॉक्टर की सलाह लें, खासकर अगर आपको पहले से स्वास्थ्य समस्याएं हैं.
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5. दर्द और हार्ट अटैक, सीधे-सीधे रिश्ता नहीं, लेकिन संकेत मिल सकते हैं
सीधा-सीधा हर पीरियड दर्द हार्ट अटैक नहीं कराता, पर नीचे की बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
- अगर दर्द इतना ज्यादा है कि रोजमर्रा का काम मुश्किल हो जाता है.
- ब्लड स्राव बहुत भारी है.
- दर्द के साथ सांस लेने में कमी, सीने में दर्द, बेहोशी या चक्कर आते हैं.
- तो आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
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