Salabhasana Karne Se kaunse Fayde Hote Hain: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में योग का महत्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. योग न सिर्फ शरीर को स्वस्थ रखता है बल्कि, मानसिक शांति भी प्रदान करता है. इसी क्रम में 'शलभासन' (salabhasana)एक ऐसा प्रभावी योगासन है, जो शरीर को कई तरह के स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं नहीं होती हैं.
क्या है शलभासन में शलभ का अर्थ?
शलभासन एक संस्कृत शब्द है. इसमें 'शलभ' का अर्थ टिड्डा और 'आसन' का अर्थ 'मुद्रा' होता है. यानी की यह आसन टिड्डे की तरह उड़ान भरने वाली मुद्रा (Mudra) है. इसके नियमित अभ्यास से पीठ, कमर और पैरों की मांसपेशियों (muscles) को मजबूती मिलती है. रक्तचाप नियंत्रित और हृदय संबंधी समस्याओं में सुधार होता है. यह हृदय की क्रियाओं को सुचारू रूप से चलाने में भी मदद करता है.
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रीढ़ की हड्डी और जांघों को बनाता है मजबूत
आयुष मंत्रालय के अनुसार, शलभासन एक महत्वपूर्ण हठयोग (Hath Yoga) आसन है, जो मुख्य रूप से पीठ के निचले हिस्से, रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord), जांघों (Thighs)और नितंबों (Hips) की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है. यह कमर दर्द में राहत, पाचन (Digestion) में सुधार, फेफड़ों (Lungs) की क्षमता बढ़ाने और पेट की चर्बी (Belly fat) कम करने में अत्यंत प्रभावी है, जो शरीर को स्थिरता और मन को शांति प्रदान करता है.
शुरुआती अभ्यासकर्ताओं के लिए यह योगासन (Yogasana) थोड़ा सा चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि इसमें पीठ, कंधों और पैरों की ताकत और संतुलन तीनों की जरूरत होती है, लेकिन जब आप इसे धीरे-धीरे सीखते हैं और रोज सिर्फ 5 मिनट देते हैं, तो शरीर खुद आपका साथ देने लगता है.
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कैसे करें शलभासन?
इसे करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेटकर सामान्य शलभासन की स्थिति में आए, फिर पैरों को ऊपर उठाएं और शरीर का संतुलन कंधों, ठोड़ी और भुजाओं पर बनाए रखें. शुरुआत में पैरों को ज्यादा ऊपर ले जाना जरूरी नहीं है, जितना आराम से हो सके उतना करें. धीरे-धीरे आपकी पीठ की मांसपेशियां मजबूत होंगी और पैरों में लचीलापन बढ़ेगा. जब शरीर थोड़ा अभ्यस्त हो जाए, तब पैरों को ऊपर ले जाकर संतुलन बनाने की कोशिश करें और घुटने मोड़कर पंजों से सिर छूने का प्रयास करें.
गंभीर पीठ दर्द (Back Pain), स्लिप डिस्क (Sleep Disk) या हर्निया (Hernia) वाले लोग इससे बचें. हृदय रोग (Heart Disease), उच्च रक्तचाप (High B. P.), या पेट के अल्सर (Stomach Ulcer) की समस्या होने पर न करें. गर्भवती महिलाएं (Pregnant Women) इस आसन को न करें.
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