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रोज, हफ्ते में या महीने में कितनी शराब पीना है सुरक्षित? डॉक्टर ने बताई सेफ ड्रिंकिंग लिमिट

अक्सर लोगों के मन में शराब यानि अल्कोहल को लेकर हमेशा ये भ्रम रहता है कि इसे कितनी मात्रा में पीने से कुछ नहीं होगा. अगर आप भी इसी सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो इस आर्टिकल में जानें डॉक्टर सरीन ने क्या कहा.

रोज, हफ्ते में या महीने में कितनी शराब पीना है सुरक्षित? डॉक्टर ने बताई सेफ ड्रिंकिंग लिमिट
शराब कितनी पी सकते हैं.

दोस्तों के साथ पार्टी हो या किसी का बर्थडे, अक्सर एक सवाल जरूर सुनने को मिलता है एक एक पैग हो जाए? कई लोग ये भी जानना चाहते हैं कि आखिर कितनी मात्रा तक शराब पीना सेफ माना जा सकता है. जिससे लिवर पर कोई असर न पड़े. इस सवाल का जवाब इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बाइलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) के डायरेक्टर और देश के जाने-माने लिवर विशेषज्ञ डॉ. एस. के. सरीन ने दिया है. उनका जवाब उन लोगों की गलतफहमी दूर कर सकता है, जो सेफ लिमिट तलाश रहे हैं.

WHO की बात याद रखें-

डॉ. एस. के. सरीन का कहना है कि जब उनसे पूछा जाता है कि कितनी शराब पीने से लिवर को नुकसान नहीं होगा, तो इसका सीधा जवाब देना आसान नहीं है. इसकी वजह ये है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का रुख बिल्कुल साफ है. डॉ. सरीन कहते हैं, ‘WHO साफ कहता है कि Alcohol is a poison यानी अल्कोहल एक जहर है. उनका कहना है कि लोग अक्सर ये सुनकर खुश हो जाते हैं कि थोड़ी शराब पी सकते हैं और फिर उसी मात्रा को धीरे-धीरे बढ़ा देते हैं. इसलिए किसी तय सेफ लिमिट की बात करना सही नहीं है. 

क्या कभी-कभार शराब पीना ठीक है?

डॉ. सरीन मानते हैं कि प्रेक्टिकल लाइफ में हर किसी को शराब छोड़ने के लिए कहना आसान नहीं है. अगर किसी ने साल में कभी किसी खास मौके, जैसे बर्थडे या किसी सेलिब्रेशन में थोड़ी मात्रा में शराब पी ली, तो शरीर उसे मेटाबोलाइज कर सकता है. हालांकि, वो साफ कहते हैं कि इसे रोजमर्रा की आदत बना लेना सही नहीं है. कभी कभार और नियमित शराब पीने में बड़ा अंतर है. जितनी बार शराब पी जाएगी, लिवर पर उतना ही ज्यादा दबाव पड़ेगा.

हर व्यक्ति के लिए अलग होती है लिमिट-

डॉ. एस. के. सरीन बताते हैं कि ये कहना भी गलत होगा कि हर व्यक्ति के लिए एक जैसी मात्रा सेप है. किसी की बॉडी शराब को जल्दी प्रोसेस करती है तो किसी की नहीं. उम्र, वजन, पहले से मौजूद बीमारी और लाइफस्टाइल जैसी कई बातें इसमें भूमिका निभाती हैं.

यही वजह है कि एक व्यक्ति पर कम मात्रा का भी असर दिख सकता है. जबकि दूसरा व्यक्ति लंबे समय तक कोई बुरे नतीजे महसूस नहीं करता. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि उसके लिवर को नुकसान नहीं हो रहा.

जेनेटिक्स भी निभाते हैं बड़ी भूमिका-

डॉ. सरीन बताते हैं कि शराब का असर सिर्फ पीने की मात्रा पर ही निर्भर नहीं करता, बल्कि जेनेटिक्स भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं. जैसे कुछ लोग कम खाना खाने के बावजूद मोटापे या फैटी लिवर का शिकार हो जाते हैं. जबकि कुछ लोगों पर उतना असर नहीं दिखता. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर परिवार में कम उम्र में फैटी लिवर, गॉलब्लैडर स्टोन या लिवर से जुड़ी समस्याएं रही हैं. तो अगली पीढ़ी में भी इन बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए दूसरों से अपनी तुलना करने के बजाय अपने शरीर और फैमिली हेल्थ हिस्ट्री को समझना ज्यादा जरूरी है.

डॉक्टर की सलाह क्या है?

डॉ. एस. के. सरीन की सलाह साफ है कि अगर आप अपने लिवर को लंबे समय तक हेल्दी रखना चाहते हैं, तो शराब से जितनी दूरी बनाएंगे, उतना बेहतर होगा. किसी तय सेफ लिमिट पर भरोसा करने के बजाय शराब का सेवन कम से कम रखना ही सबसे सेफ ऑप्शन है.

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