विज्ञापन

फार्मेसी पर CCTV, पर्ची की जांच और रिकॉर्डिंग... दवा खरीदने के नियम बदल सकते हैं

अब कैमरे की नजर में बिकेंगी दवाएं? सरकार के नए प्रस्ताव से बदल सकते हैं मेडिकल स्टोर के नियम. यहां जानें-

फार्मेसी पर CCTV, पर्ची की जांच और रिकॉर्डिंग... दवा खरीदने के नियम बदल सकते हैं
अब मेडिकल स्टोर से बिना पर्चे नहीं मिलेगी कई दवाएं? CCTV निगरानी वाला नया नियम ला सकती है सरकार
Pexels

हम सब की आदत होती है कि जरा सा सिरदर्द हुआ, जुकाम लगा या बदन में दर्द हुआ, तो सीधे पास के मेडिकल स्टोर पर पहुंच जाते हैं. वहां जाकर बस इतना बोलते हैं कि 'भैया एक अच्छी सी दवा दे दो' और केमिस्ट बिना किसी डॉक्टर के पर्चे के हाथ में गोली थमा देता है. कई बार तो लोग बच्चों की खांसी के लिए भी खुद ही जाकर कफ सिरप खरीद लाते हैं. केंद्र सरकार की ओर से जारी एक ड्राफ्ट प्रस्ताव के अनुसार, भविष्य में डॉक्टर के पर्चे पर मिलने वाली दवाओं की बिक्री पर निगरानी बढ़ सकती है. प्रस्ताव में मेडिकल स्टोरों पर CCTV कैमरे लगाने और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की बात कही गई है.

सरकार एक ऐसा नया नियम लाने की तैयारी में है, जिसके बाद मेडिकल स्टोर से दवा लेना पहले जितना आसान नहीं रहेगा.

सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि देश के तमाम मेडिकल स्टोरों और फार्मेसी पर अब सीसीटीवी कैमरे (CCTV) लगाना जरूरी किया जाएगा. इसका मतलब यह हुआ कि जब भी आप डॉक्टर के पर्चे वाली कोई दवा खरीदेंगे, तो कैमरे की तीसरी आंख आप पर और दुकानदार पर पूरी नजर रखेगी.

आइए समझते हैं कि सरकार का यह नया नियम क्या है और एक आम इंसान के तौर पर आपकी जेब और आदतों पर इसका क्या असर पड़ने वाला है.

गजट नोटिफिकेशन में आखिर क्या कहा गया है

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 8 सितंबर को एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है. इसमें 'ड्रग्स रूल्स 1945' के नियम 65 में एक नया बदलाव करने की बात कही गई है.

  • इसके मुताबिक, अगर कोई भी मेडिकल स्टोर वाला डॉक्टर के पर्चे पर मिलने वाली दवा बेचता है, तो उसकी दुकान पर काम करता हुआ सीसीटीवी कैमरा होना जरूरी होगा. 
  • दवा बेचते समय की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग साफ दिखनी चाहिए ताकि बाद में कोई अधिकारी जांच कर सके.
  • सबसे अहम बात यह है कि दुकानदार को यह सीसीटीवी फुटेज कम से कम 3 महीने तक संभालकर (सेव करके) रखनी होगी.
  • यह नियम सिर्फ आम रिटेल दुकानों पर लागू होगा, थोक व्यापारियों यानी होलसेल वालों को इससे बाहर रखा गया है.

सरकार को आखिर यह कदम क्यों उठाना पड़ा?

हमारे देश में बिना डॉक्टर की सलाह के खुद ही दवा खाने यानी 'सेल्फ मेडिकेशन' की बहुत बुरी बीमारी है. कई मेडिकल स्टोर वाले थोड़े से मुनाफे के चक्कर में नींद की गोलियां, तेज एंटीबायोटिक्स और नशीले कफ सिरप बिना किसी पर्चे के धड़ल्ले से बेचते हैं.

सबसे बड़ी चिंता बच्चों की सेहत को लेकर है. बड़े लोगों के कफ सिरप और दवाइयां अक्सर बच्चों को बिना सोचे-समझे दे दी जाती हैं, जिससे बच्चों की जान पर बन आती है.

गलत दवा या गलत डोज मिलने से मरीज की तबियत सुधरने के बजाय और बिगड़ जाती है. सीसीटीवी लगने से मेडिकल स्टोर वालों में डर रहेगा और वो बिना सही पर्चे के कोई भी कड़ा साल्ट या सिरप देने से साफ मना कर देंगे.

अगर किसी मरीज के साथ कोई अनहोनी होती है, तो पुलिस और ड्रग विभाग कैमरे की फुटेज देखकर तुरंत पकड़ लेंगे कि दुकानदार ने पर्चा देखा था या नहीं.

क्या सिर्फ खास दवाओं पर ही कैमरा चलेगा?

हमारे यहां दवाओं की कुछ खास श्रेणियां होती हैं जैसे शेड्यूल H, H1 और शेड्यूल X. ये वो दवाइयां हैं जिन पर लाल रंग की धारी बनी होती है और जिनहे बिना डॉक्टर के पर्चे के बेचना कानूनन जुर्म है.

लेकिन इस नए प्रस्ताव में सरकार ने सिर्फ इन तीन श्रेणियों का नाम नहीं लिया है. इसका दायरा काफी बड़ा है. नियम में लिखा है कि डॉक्टर के पर्चे पर दी जाने वाली 'कोई भी दवा' अगर बेची जाएगी, तो वह कैमरे की निगरानी में ही होगी. यानी अगर डॉक्टर ने कोई साधारण एंटीबायोटिक भी लिखी है, तो उसे लेते वक्त भी नियम का पालन करना होगा.

कफ सिरप को लेकर सरकार इतनी सख्त क्यों है?

अगर आपको याद हो, तो कुछ समय पहले कफ सिरप की गुणवत्ता और उसके गलत इस्तेमाल को लेकर काफी बवाल मचा था. इसके बाद सरकार ने कफ सिरप को बिना पर्चे के बेचने पर पूरी तरह रोक लगा दी थी.

छोटे बच्चों के मामले में दवा की एक बूंद भी ऊपर-नीचे होना बहुत खतरनाक हो सकता है. कई कफ सिरप में ऐसे तत्व होते हैं जिनका कुछ लोग नशे के रूप में गलत इस्तेमाल करने लगते हैं. नया नियम आने के बाद मेडिकल स्टोर वाला किसी भी अनजान शख्स को यूं ही खांसी की दवा की बोतल नहीं थमा पाएगा.

क्या यह नियम आज से ही लागू हो गया है

नहीं, अभी आपको बहुत ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है. यह अभी सिर्फ एक ड्राफ्ट यानी प्रस्ताव है, कोई फाइनल कानून नहीं बना है.

सरकार ने 8 सितंबर को यह प्रस्ताव जारी करके आम जनता, डॉक्टरों और दवा दुकानदारों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं.
लोग अपने विचार सरकार को भेजेंगे कि इसमें क्या दिक्कतें आ सकती हैं. सबके सुझाव सुनने के बाद सरकार तय करेगी कि इसे हूबहू लागू करना है या इसमें कुछ ढील देनी है.

जब सरकार इसे फाइनल गैजेट में नोटिफाई करेगी, तब जाकर यह पूरे देश में पूरी तरह से लागू होगा.

आम आदमी की जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा

अगर यह नियम पक्का हो जाता है, तो एक आम नागरिक के तौर पर आपकी आदतों में कुछ बड़े बदलाव आएंगे:

  1. अपनी पुरानी पर्ची संभाल कर रखें: अब आप बिना डॉक्टर के पर्चे के मेडिकल स्टोर से तेज दवाइयां या सिरप नहीं मांग पाएंगे.
  2. एक्सपायर्ड पर्चा नहीं चलेगा: पुराने 6 महीने पहले के पर्चे दिखाकर बार-बार दवा लेने की आदत बदलनी होगी.
  3. ज्यादा सुरक्षा: इसका एक बड़ा फायदा यह होगा कि आपको कोई भी झोलाछाप या गैर-जिम्मेदार दुकानदार गलत और नकली दवा देने की हिम्मत नहीं करेगा.
  4. बिल और पक्का रिकॉर्ड: मेडिकल स्टोर वाले अब हर लेन-देन को ज्यादा जिम्मेदारी से करेंगे, जिससे मरीजों की सुरक्षा पहले से कहीं बेहतर हो जाएगी.

कुल मिलाकर देखा जाए तो यह कदम मरीजों की भलाई के लिए ही उठाया जा रहा है. थोड़ी परेशानी जरूर होगी कि हर बार डॉक्टर के पास जाना पड़ेगा, लेकिन गलत दवा खाकर अस्पताल में भर्ती होने से तो यह हजार गुना बेहतर है. अगली बार जब भी मेडिकल जाएं, तो डॉक्टर की लिखी सही पर्ची साथ ले जाना बिल्कुल न भूलें.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Cough Syrup Sales, Cough Syrup Regulations India, Pharmacy Regulations India
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com