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Rapido पर लगा 10 लाख रुपये का जुर्माना, CCPA ने डार्क पैटर्न को लेकर की बड़ी कार्रवाई

CCPA ने पाया कि Rapido ऐप पर राइडर की बुकिंग प्रोसेस होने के दौरान ही ऐसे मैसेज दिखते थे, जिसमें लिखा जाता था, कीमत जितनी ज्यादा होगी, राइड मिलने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी.

Rapido पर लगा 10 लाख रुपये का जुर्माना, CCPA ने डार्क पैटर्न को लेकर की बड़ी कार्रवाई
Rapido पर भारी जुर्माना
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने 'रैपिडो' (Rapido) चलाने वाली कंपनी 'रोपेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज़ प्राइवेट लिमिटेड' (Roppen Transportation Services Private Limited) पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. CCPA ने यह जुर्माना गुमराह करने वाले विज्ञापनों, अनुचित बिज़नेस प्रैक्टिस, अनुचित अनुबंध और 'डार्क पैटर्न' जैसे  राइड कन्फर्म होने से पहले ही राइडर्स को ज्यादा पैसे देने के लिए प्रोत्साहित करना, ऐसे आरोप जांच में साबित होने के बाद लगाया है.

उपभोक्ता मामलों की सचिव और CCPA की चीफ़ कमिश्नर निधि खरे और कमिश्नर अनुपम मिश्रा ने अपने फैसले में कहा, यह कार्रवाई CCPA की ओर से भारत में काम करने वाले कैब और बाइक-टैक्सी एग्रीगेटर प्लैटफ़ॉर्म सेक्टर में की गई विस्तृत जांच के बाद की गई है. इस जांच का मकसद राइड से पहले टिपिंग और डायनामिक प्राइसिंग से जुड़े तौर-तरीकों को एग्जामिन करना था.

अलग-अलग प्लैटफॉर्म की जांच के दौरान, CCPA ने पाया कि Rapido ऐप पर राइडर की बुकिंग प्रोसेस होने के दौरान ही ऐसे मैसेज दिखते थे, जिसमें लिखा जाता था, कीमत जितनी ज्यादा होगी, राइड मिलने की संभावना उतनी ही ज़्यादा होगी और कैप्टन 60 रुपये पर राइड स्वीकार नहीं कर रहे हैं. +10, +20, +30 जोड़कर देखें.

राइड बुकिंग के बाद ज्यादा पैसे की मांग

CCPA ने पाया कि इस तरह के प्रॉम्प्ट्स कन्फर्म शेमिंग के बराबर हैं. जांच में पाया गया कि रैपिडो का एल्गोरिदम पहले राइडर को किराया बताता है, और राइडर द्वारा उस किराए पर बुकिंग करने के बाद, उनसे ज्यादा पैसे देने के लिए कहता है. CCPA ने माना कि इस तरह के बिजनेस प्रैक्टिस से राइडर को गलतफहमी होती है कि जल्दी राइड मिलने के लिए उन्हें ज्यादा पैसे देने होंगे, जबकि वे पहले ही बुकिंग कर चुके होते हैं और इन मामलों में मोल-भाव की गुंजाइश कम होती है. 

इस तरीके को कन्फर्म शेमिंग माना गया, जो 'डार्क पैटर्न्स की रोकथाम और नियमन के लिए गाइडलाइंस, 2023' के तहत एक 'डार्क पैटर्न' है. ऐसा इसलिए है क्योंकि इससे जल्दबाज़ी का एहसास होता है और ज्यादा पैसे न देने पर राइड खोने का डर पैदा होता है.

कलर-कोडेड प्राइसिंग स्लाइडर को दूसरा 'डार्क पैटर्न' पाया गया

CCPA ने रैपिडो के "अपनी कीमत तय करें" (Set your price) वाले स्लाइडर की भी जांच की. इसमें पाया गया कि राइडर के कीमत तय करने के फैसले को प्रभावित करने के लिए कलर-कोडेड किया गया था. उपभोक्ता मामलों के विभाग के द्वारा जारी एक रिलीज के मुताबिक, कीमत बढ़ाने पर हरे रंग में राइड मिलने की ज्यादा संभावना दिखाई देती थी. कीमत कम करने पर लाल या नारंगी रंग की चेतावनी दिखाई देती थी. स्लाइडर में कीमत कम करने की तुलना में उसे बढ़ाने के लिए ज़्यादा गुंजाइश थी. 

CCPA ने माना कि यह दूसरा 'डार्क पैटर्न' यानी "इंटरफेस इंटरफेरेंस" है, क्योंकि इंटरफेस का डिजाइन ग्राहकों को विज़ुअली ज्यादा पैसे देने के लिए प्रेरित करता था, भले ही साथ में लिखा टेक्स्ट कुछ भी हो.

टिप मर्जी से दिया जाने वाला पेमेंट

CCPA ने माना कि टिप आम तौर पर सर्विस मिलने के बाद अपनी मर्जी से दिया जाने वाला पेमेंट होता है और इसे सर्विस देने की शर्त के तौर पर पेश नहीं किया जाना चाहिए. अपने आदेश में CCPA ने 'मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस, 2025' का जिक्र करते हुए कहा है कि इन गाइडलाइंस के मुताबिक, टिपिंग का फीचर सिर्फ राइड पूरी होने के बाद ही दिया जाना चाहिए, न कि बुकिंग के समय या राइड के दौरान. 

रैपिडो ने तर्क दिया था कि टिपिंग अपनी मर्जी से की जाती है, उसका मैचिंग एल्गोरिदम इस बात से बेअसर रहता है कि राइडर ने कोई अतिरिक्त रकम दी है या नहीं, और ये प्रॉम्प्ट्स असल में राइडर और ड्राइवर के बीच ऑफ़लाइन बातचीत की तरह ही रियल-टाइम बातचीत को दिखाते हैं.

CCPA इससे पहले Uber, Ola, Rapido और Namma Yatri जैसे प्लेटफ़ॉर्म को नोटिस जारी कर चुकी है. इस मामले में Uber और Ola की जांच अभी भी चल रही है.

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