World Lung Day 2026 : चेस्ट एक्स रे- कराने के बाद जह रिपोर्ट नॉर्मल आती है, तो हम में से कई लोग राहत की सांस ले लेते हैं. हमें लगता है कि अब फेफड़ों से जुड़ी कोई समस्या नहीं है. लेकिन क्या सचमुच एक नॉर्मल एक्स-रे ये साबित कर देता है कि आपका लंग्स पूरी तरह से सुरक्षित है? डॉक्टर बताते हैं कि ऐसा हर एक केस में नहीं होता है. उनका कहना है कि अगर खांसी, सांस फूलना या सीने में दर्द जैसे लक्षण आपको लगातार बने रहते हैं, तो सिर्फ एक नॉर्मल चेस्ट एक्स रे के भरोसे रहना बिल्कुल भी सही नहीं होता है.
वैशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के सीनियर डायरेक्टर, पल्मोनोलॉजी डॉ. शरद जोशी का कहना है कि चेस्ट एक्स-रे फेफड़ों की स्थिति का एक शुरुआती और महत्वपूर्ण संकेत जरूर देता है, लेकिन ये पूरी कहानी नहीं बताता. कई बार बीमारी शुरुआती चरण में होती है या ऐसी जगह होती है, जो सामान्य एक्स-रे में साफ दिखाई नहीं देती.
एक्स-रे नॉर्मल होने के बाद भी क्यों दिखाई देते हैं लक्षण?
डॉ. जोशी बताते हैं कि लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी या सीने में अनकंफर्ट होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. इनमें अस्थमा, क्रॉनिक एयरवे डिजीज, एलर्जी, एसिड रिफ्लक्स, इंफेक्शन या अन्य लंग्स से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं.
इसी वजह से डॉक्टर सिर्फ रिपोर्ट नहीं देखते, बल्कि मरीज के लक्षणों की ड्यूरेशन, उनकी गंभीरता और उससे जुड़े अन्य संकेतों का भी मूल्यांकन करते हैं.
CT स्कैन ही पहला ऑप्शन नहीं होता
डॉक्टर कहते हैं कि एक्स-रे के बाद सीधे सीटी स्कैन नहीं कराया जाता है. डॉक्टर सबसे पहले मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री समझते हैं. वे ये जानने की कोशिश करते हैं कि व्यक्ति धूम्रपान करता है या नहीं, किसी तरह की धूल, धुएं या केमिकल के संपर्क में रहता है या नहीं, उसे पहले कोई इंफेक्शन हुआ था या नहीं या फिर कोई एलर्जी और पुरानी बीमारी है या नहीं.
इसके बाद कई बार स्पाइरोमेट्री जैसी कुछ टेस्ट कराने सलाह दी जाती है. ये सांस लेने की क्षमता और वायुमार्ग में रुकावट का पता लगाने में मदद करती है. अस्थमा और COPD जैसी बीमारियों को डायग्नोज करने के लिए इस तरह के टेस्ट उपयोगी होते हैं.
किन परिस्थितियों में दूसरे टेस्ट की पड़ती है जरूरत?
डॉक्टर कहते हैं कि अगर लक्षण लगातार बने रहें या डॉक्टर को किसी गंभीर समस्या का संदेह हो, तो चेस्ट CT स्कैन कराया जा सकता है. CT स्कैन फेफड़ों की संरचना को एक्स-रे की तुलना में कहीं अधिक विस्तार से दिखाता है.
इसके अलावा मरीज की स्थिति और लक्षणों के आधार पर ऑक्सीजन स्तर, खून की जांच, बलगम की जांच और अन्य विशेष परीक्षण भी कराए जा सकते हैं.
किन लक्षणों को इग्नोर करने से बचना चाहिए?
डॉ. जोशी बताते हैं कि कुछ लक्षण ऐसे हैं, जो आगे की जांच की मांग करते हैं. इनमें शामिल हैं-
लगातार या बढ़ती हुई खांसी
खांसी के साथ खून आना
बिना वजह वजन कम होना
बार-बार सीने में संक्रमण होना
लगातार सीने में दर्द
बढ़ती हुई सांस की तकलीफ
अगर इनमें से कोई भी समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
कुछ मरीजों को अलग-अलग टेस्ट कराने की पड़ती है जरूरत
डॉ. शरद जोशी का कहना है कि हर मरीज के लिए एक जैसी जांच नहीं होती. बीमारी और लक्षणों के अनुसार कुछ लोगों को एलर्जी टेस्ट, पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (PFT), FeNO टेस्ट या PET-CT की जरूरत पड़ सकती है. वहीं, कुछ जटिल मामलों में बीमारी की पुष्टि के लिए ब्रोंकोस्कोपी, EBUS या थोरेकोस्कोपी जैसी टेस्ट कराने पड़ सकते हैं.
सिर्फ रिपोर्ट नहीं, लक्षण भी रखते हैं मायने
डॉक्टर कहते हैं कि जांच कराने का फैसला सिर्फ डर या चिंता के आधार पर नहीं, बल्कि लक्षणों और व्यक्ति के रिस्क कारकों के आधार पर होना चाहिए. हर लंबे समय तक रहने वाली खांसी किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती, लेकिन उसका कारण जानना जरूरी है.
विश्व फेफड़ा दिवस (World Lung Day) के अवसर पर डॉक्टरों का संदेश साफ है कि अगर आपके लक्षण बने हुए हैं, तो केवल इसलिए उन्हें नजरअंदाज न करें क्योंकि एक्स-रे नॉर्मल आया है. सही समय पर सही जांच कराना ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है.
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