नेपाल-तिब्बत सीमा पर भीषण फ्लैश फ्लड से हुई तबाही का दर्द मध्य प्रदेश के भोपाल तक पहुंच गया है. ग्लेशियर का एक बड़ा टुकड़ा टूटने से पहाड़ से बर्फ, बड़ी चट्टानें और कीचड़ भरा पानी इतनी रफ्तार से नीचे उतरा कि रास्ते में जो आया, सब बह गया. घर ताश के पत्तों की तरह ढह गए, सड़कें और पुल उखड़ चुके हैं. इस तबाही में दर्जनों लोग जान गंवा चुके हैं और सैकड़ों का अब तक कुछ पता नहीं है.
ऐसी आपदा में असली परेशानी तब शुरू होती है जब बाढ़ का पानी उतरने लगता है. गंदे पानी में सीवर का कचरा, मरे हुए जानवर और जहरीले केमिकल मिल जाते हैं. पीने का पानी, शौचालय और अस्पताल जैसी जरूरी सेवाएं बंद हो जाती हैं, ऐसे में बीमारियों का फैलना तय है.

गंदा पानी कैसे बनता है बीमारी की वजह?
- पेट खराब होना और दस्त लगना: गंदा पानी या खराब खाना खाते ही उल्टी, दस्त और पेट में मरोड़ शुरू हो जाता है.
- टाइफाइड और हेपेटाइटिस ए: अगर मल-मूत्र मिला पानी खाने-पीने की चीजों में चला जाए, तो लिवर और आंतों में गंभीर इंफेक्शन हो सकता है.
- स्किन इंफेक्शन और लेप्टोस्पायरोसिस: लगातार गंदे पानी में रहने से त्वचा गलने लगती है. चूहों और जानवरों के पेशाब में मौजूद बैक्टीरिया त्वचा के कटे हिस्से से अंदर जाकर व्यक्ति को बुरी तरह बीमार कर सकता है.
- टिटनेस का खतरा: बाढ़ के मलबे या लोहे से चोट लगने पर तुरंत टिटनेस का टीका न लगे तो जान को खतरा हो सकता है.
खुद को सुरक्षित कैसे रखें?
गंदे पानी से दूर रहें:
जब तक बहुत ज्यादा मजबूरी न हो, गंदे पानी में पैर न रखें और न ही गाड़ियां उतारें. ऊपर से शांत दिखने वाले पानी के नीचे बिजली के कटे-फटे तार, छिपे हुए गड्ढे या तेज बहाव का खतरा हो सकता है. बच्चों को तो इस पानी के आसपास खेलने बिल्कुल न दें.
खाने-पीने में पूरी सावधानी बरतें:
ऐसी हालत में नल, हैंडपंप या कुएं के पानी पर सीधा भरोसा करना भारी पड़ सकता है. पीने, खाना पकाने या ब्रश करने के लिए हमेशा उबला हुआ या सीलबंद बोतलबंद पानी का ही इस्तेमाल करें, जो भी खाने-पीने की चीज बाढ़ के पानी के संपर्क में आ चुकी हो, उसे बिना सोचे-समझे तुरंत फेंक दें.
छोटे-मोटे कट या चोट को हलके में न लें:
अगर शरीर पर कहीं भी खरोंच या कट लगा है, तो उसे तुरंत साफ पानी और साबुन से धोएं. घाव पर सूजन, लाली या मवाद जैसी शिकायत दिखे तो बिना लापरवाही के डॉक्टर को दिखाएं और टिटनेस का टीका जरूर लगवाएं.
हाथों को साफ रखने की आदत बनाएं:
गंदी जगहों को छूने के बाद, रसोई में जाने से पहले और खाना खाने से पहले साबुन और पानी से हाथ धोने की आदत बनाए रखें. अगर साफ पानी न मिले तो सैनिटाइज़र का उपयोग करें, लेकिन पहली पसंद साबुन-पानी ही होना चाहिए.
तबीयत बिगड़ने के संकेतों को पहचानें:
अगर घर में किसी को पेट दर्द, लगातार उल्टी-दस्त, तेज बुखार या बहुत ज्यादा ढीलापन महसूस हो, तो इसे आम मौसमी बीमारी समझकर टालने की गलती न करें. बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर बहुत तेजी से होता है, इसलिए लक्षण सामने आते ही तुरंत नजदीकी डॉक्टर या मेडिकल कैंप में जाकर सलाह लें.
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