दिल्ली में हर साल मानसून के बाद डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छर जनित बीमारियां लोगों की परेशानी बढ़ा देती हैं. इनसे निपटने के लिए दिल्ली नगर निगम (MCD) और उत्तर रेलवे ने मिलकर एक बेहद शानदार और अनोखी पहल शुरू की है. दिल्ली में मच्छरों के पनपने की जगहों को खत्म करने के लिए पटरियों के किनारे मॉस्किटो टर्मिनेटर ट्रेन-2026 को मैदान में उतार दिया गया है.
कहां से हुई शुरुआत?
इस अभियान की शुरुआत नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से की गई. महापौर प्रवेश वाही ने हरी झंडी दिखाकर इस ‘मॉस्किटो टर्मिनेटर ट्रेन' को रवाना किया. इस मौके पर दिल्ली नगर निगम और उत्तर रेलवे के कई बड़े अधिकारी भी मौजूद रहे. अधिकारियों का कहना है कि साफ-सुथरी दिल्ली ही एक स्वस्थ दिल्ली की मजबूत नींव है, और इसी सोच के साथ यह जॉइंट मुहिम चलाई जा रही है.
कैसे काम करेगी यह ट्रेन?
अक्सर रेलवे ट्रैक के आसपास खाली पड़ी जमीन और निचले इलाकों में बारिश का पानी भर जाता है, जो मच्छरों के पैदा होने के लिए सबसे सेफ जगह बन जाती है. इस समस्या से निपटने के लिए इस ट्रेन के साथ खास पावर स्प्रे टैंक लगाए गए हैं. पहले चरण में यह ट्रेन लगभग 75 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक और उसके आसपास के इलाकों को कवर करेगी. ट्रेन के जरिए पटरियों के दोनों तरफ मौजूद पानी के भराव वाले स्थानों और संभावित जगहों पर एंटी-लार्वा दवाओं का छिड़काव किया जाएगा ताकि मच्छर अंडे न दे सकें.
किन-किन इलाकों को किया जाएगा कवर?
यह अभियान सितंबर तक चलेगा और इसके दायरे में दिल्ली के तमाम बड़े रेलवे रूट और उससे जुड़े इलाके आएंगे.
- नई दिल्ली से साहिबाबाद
- आदर्श नगर - बादली
- दिल्ली जंक्शन और दिल्ली शाहदरा
- हजरत निजामुद्दीन और लाजपत नगर
- सराय रोहिल्ला, पटेल नगर और सफदरजंग
- किशनगंज, सदर बाजार और दिल्ली कैंट
- पालम-गुड़गांव, फरीदाबाद और ओखला-तुगलकाबाद
मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियां- (Most dangerous mosquito-borne diseases)
1. मलेरिया-
मलेरिया एक नुकसानदायक और बड़े पैमाने पर फैली बीमारी है. मादा एनोफिलीज मच्छर इस बीमारी को फैलाती हैं, जिससे बुखार, सिरदर्द और कंपकंपी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं.
2. डेंगू-
यह वायरल इन्फेक्शन 100 देशों में फैला हुआ है, और बीमारी फैलाने वाले मच्छरों की वजह से हर साल लगभग 390 मिलियन लोग डेंगू से संक्रमित होते हैं. गंभीर मामलों में, डेंगू को कभी-कभी "हड्डी तोड़ बुखार" (break bone fever) भी कहा जाता है.

3. जिका-
यह वायरस अक्सर बिना किसी लक्षण के रहता है, लेकिन इससे मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, सिरदर्द, बुखार, चकत्ते और आंखों में इन्फेक्शन (conjunctivitis) हो सकता है.
4. पीत ज्वर-
एडीस और हीमोगोगस (Haemogogus) मच्छर की प्रजातियां इसके मुख्य वाहक हैं, और संक्रमित मादा मच्छर के काटने से सिरदर्द, बुखार, मांसपेशियों में दर्द और जी मिचलाना जैसे लक्षण हो सकते हैं.
5. चिकनगुनिया-
चिकनगुनिया वायरस एडीस एल्बोपिक्टस और एडीस एजिप्टी मच्छरों द्वारा लोगों में फैलता है. हालांकि चिकनगुनिया बीमारी का इनक्यूबेशन पीरियड 2-6 दिनों का होता है.
मच्छरों से बचने के लिए अपनाएं ये तरीके-
- घर के आस-पास या गमलों में पानी बिल्कुल जमा न होने दें. रुका हुआ पानी मच्छरों का घर होता है.
- शाम के समय खिड़की और दरवाजे बंद रखें ताकि मच्छर बाहर से अंदर न आ सकें.
- सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करना सबसे सेफ और पुराना तरीका है.
- फुल बाजू के कपड़े पहनें ताकि मच्छर आपके शरीर की स्किन तक न पहुंच सकें.
किसे सबसे ज्यादा काटते हैं मच्छर-
फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (एफआईयू) के शोधकर्ताओं ने 119 लोगों पर यह अध्ययन किया. इसमें दुनिया की तीन ऐसी मच्छर प्रजातियों को शामिल किया गया, जो इंसानों में कई गंभीर बीमारियां फैला सकती हैं. शोधकर्ताओं ने देखा कि इन तीनों प्रजातियों को इंसानों की गंध और शरीर से निकलने वाले अलग-अलग रासायनिक संकेत किस तरह आकर्षित करते हैं.
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