मेडिकल साइंस में अक्सर ऐसी खोजें सामने आती हैं, जो एक बीमारी के इलाज से आगे बढ़कर दूसरी गंभीर समस्या का समाधान भी दे देती हैं. हाल ही में वैज्ञानिकों की एक टीम ने ऐसी ही एक बड़ी खोज की है. क्रोनिक किडनी डिजीज और हार्ट फेलियर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा फाइनरेनोन (Finerenone) अब महिलाओं में समय से पहले ओवेरियन इनसफिशिएंसी (Premature Ovarian Insufficiency - POI) के इलाज में भी असरदार साबित हो सकती है.
यह शोध जापान की जुंटेंडो विश्वविद्यालय (Juntendo University) और हांगकांग विश्वविद्यालय (University of Hong Kong) के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया है. यह अध्ययन अमेरिकी जर्नल साइंस के इलेक्ट्रॉनिक संस्करण में प्रकाशित हुआ है.
क्या है समय से पहले ओवेरियन इनसफिशिएंसी?
जब किसी महिला के पीरियड्स 40 साल की उम्र से पहले बंद हो जाते हैं, तो उसे समय से पहले ओवेरियन इनसफिशिएंसी कहा जाता है. इस स्थिति में ओवरी में फाइब्रोसिस यानी टिश्यू हार्डनिंग हो जाते हैं, जिससे फॉलिकल्स (अंडाणु विकसित करने वाली संरचनाएं) की वृद्धि रुक जाती है. इसका सीधा असर प्रजनन क्षमता पर पड़ता है और कई मामलों में बांझपन की समस्या सामने आती है.
फाइनरेनोन कैसे कर सकती है मदद?
फाइनरेनोन एक ऐसी दवा है, जो किडनी और हार्ट के टिशू में फाइब्रोसिस को रोकने में मदद करती है. वैज्ञानिकों ने सोचा कि अगर यह दवा अन्य अंगों में फाइब्रोसिस कम कर सकती है, तो क्या यह ओवरी में भी फॉलिकल ग्रोथ को बढ़ा सकती है?
इस सवाल का जवाब पाने के लिए पहले चूहों पर परीक्षण किया गया. परिणाम चौंकाने वाले थे, जिन चूहों को फाइनरेनोन दी गई, उनमें सामान्य से ज्यादा संतानें पैदा हुईं और बच्चों में कोई असामान्यता नहीं पाई गई.

क्लिनिकल ट्रायल में क्या हुआ?
चूहों पर सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद, वैज्ञानिकों ने POI से पीड़ित महिलाओं पर क्लिनिकल ट्रायल किया. मरीजों को फाइनरेनोन दी गई और साथ ही ओवरी स्टिमुलेशन तथा ओवम मैचुरेशन के लिए अन्य दवाएं भी दी गईं.
इसकी वजह से इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) के जरिए एक सफल फर्टिलाइज्ड अंडा प्राप्त हुआ. इससे यह संकेत मिलता है कि यह दवा प्रजनन क्षमता को पुनर्जीवित करने में मददगार हो सकती है.
पहले से मौजूद इलाज और नई दिशा
2013 में प्रोफेसर काजुहिरो कवामुरा ने इन विट्रो एक्टिवेशन नामक एक तकनीक विकसित की थी. इसमें लैप्रोस्कोपी के जरिए ओवरी का हिस्सा निकालकर विशेष दवा से फॉलिकल्स को एक्टिव किया जाता है और फिर उसे वापस ट्रांसप्लांट किया जाता है. हालांकि, इस प्रक्रिया में जनरल एनेस्थीसिया की जरूरत होती है, जो हर मरीज के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता.
इसी वजह से टीम एक ऐसी ओरल दवा की तलाश में थी, जो बिना सर्जरी के समान प्रभाव दे सके. करीब 1,300 दवाओं की जांच के बाद फाइनरेनोन सबसे उपयुक्त साबित हुई.
यह शोध इनफर्टिलिटी के इलाज में एक नई उम्मीद जगा रहा है. हालांकि अभी और बड़े लेवल पर टेस्ट की जरूरत है, लेकिन शुरुआती परिणाम उत्साहजनक हैं. अगर आगे भी यह दवा सुरक्षित और प्रभावी साबित होती है, तो भविष्य में कई महिलाओं के लिए मातृत्व का सपना साकार करना आसान हो सकता है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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