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आईआईटी बॉम्बे ने विकसित किया 'सुपर डेटाबेस', अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी बीमारियों की खुलेगी गुत्थी

BrainProt v3.0 एक ऐसा डेटाबेस है, जो जीन से लेकर प्रोटीन तक के विभिन्न जैविक डेटा को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ता है. इसका मकसद स्वस्थ और बीमार दोनों स्थितियों में मानव मस्तिष्क के कामकाज को व्यवस्थित रूप से समझना है.

आईआईटी बॉम्बे ने विकसित किया 'सुपर डेटाबेस', अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी बीमारियों की खुलेगी गुत्थी

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के बायोइंजीनियर्स की एक टीम ने BrainProt और DrugProtAI नाम के दो नए स्मार्ट प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं. ये प्लेटफॉर्म मस्तिष्क से जुड़ी अलग-अलग बीमारियों के बिखरे हुए डेटा को एक जगह लाकर शोधकर्ताओं को नए बायोमार्कर खोजने, इलाज के विकल्प समझने और दवाओं के लिए उपयुक्त टारगेट पहचानने में मदद करेंगे.

BrainProt v3.0 एक ऐसा डेटाबेस है, जो जीन से लेकर प्रोटीन तक के विभिन्न जैविक डेटा को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ता है. इसका मकसद स्वस्थ और बीमार दोनों स्थितियों में मानव मस्तिष्क के कामकाज को व्यवस्थित रूप से समझना है. यह अपनी तरह का पहला सिस्टम है, जो जीनोमिक्स, ट्रांसक्रिप्टोमिक्स, प्रोटीओमिक्स, बायोमार्कर रिसर्च और कई डेटाबेस से जुड़े मल्टी-डिजीज डेटा को एक ही पोर्टल पर एकीकृत करता है.

IIT बॉम्बे के बायोसाइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर संजीव श्रीवास्तव ने बताया,
“BrainProt में ऐसे संसाधन भी शामिल हैं, जिनकी मदद से मानव मस्तिष्क के बाएं और दाएं हिस्सों (हेमिस्फियर) में प्रोटीन की अभिव्यक्ति में अंतर को 20 न्यूरोएनाटॉमिकल क्षेत्रों में समझा जा सकता है. यह अपनी तरह का पहला संसाधन है.”

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BrainProt में 56 मानव मस्तिष्क रोगों और 52 मल्टी-ओमिक्स डेटा सेट की जानकारी शामिल है, जो 1,800 से अधिक मरीजों के सैंपल से तैयार किए गए हैं. इन डेटा सेट्स में 11 बीमारियों के लिए ट्रांसक्रिप्टोमिक डेटा और छह बीमारियों के लिए प्रोटीओमिक डेटा शामिल है.

वहीं, DrugProtAI को यह समझने के लिए विकसित किया गया है कि कोई प्रोटीन दवा के लिए उपयुक्त लक्ष्य (ड्रग्गेबल) है या नहीं, ताकि महंगे और समय लेने वाले प्रयोगों से पहले ही इसका अंदाजा लगाया जा सके. यह इसलिए भी अहम है, क्योंकि अभी केवल करीब 10 प्रतिशत मानव प्रोटीन्स पर ही FDA-स्वीकृत दवाएं मौजूद हैं, जबकि 3–4 प्रतिशत प्रोटीन्स पर अभी शोध चल रहा है.

स्टडी के सह-लेखक डॉ. अंकित हालदार के अनुसार, “किसी प्रोटीन पर वर्षों का शोध करने से पहले DrugProtAI यह अनुमान लगाता है कि वह प्रोटीन दवा के लिए कितना उपयुक्त है. यह सिर्फ प्रोटीन के सीक्वेंस पर नहीं, बल्कि उसकी कोशिकाओं में मौजूदगी, संरचनात्मक गुणों और अन्य खास विशेषताओं को भी ध्यान में रखता है.” यह टूल एक ‘ड्रग्गेबिलिटी इंडेक्स' तैयार करता है, जो एक प्रॉबेबिलिटी स्कोर होता है. स्कोर जितना ज्यादा होगा, उतनी ही संभावना होगी कि उस प्रोटीन में दवा बनने की क्षमता है. कम स्कोर का मतलब है कि उस प्रोटीन पर दवा विकसित करना ज्यादा मुश्किल हो सकता है.

हालदार ने आगे कहा, “DrugProtAI को सीधे BrainProt में जोड़कर हमने ऐसा सिस्टम बनाया है, जिसमें शोधकर्ता किसी बीमारी के मार्कर की पहचान से लेकर उसकी अभिव्यक्ति, उसकी ड्रग्गेबिलिटी और उससे जुड़ी मौजूदा दवाओं या क्लिनिकल ट्रायल्स की जानकारी तक—सभी कुछ एक घंटे के अंदर हासिल कर सकते हैं.”

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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