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हीटवेव का असर सिर्फ सेहत पर ही नहीं, पीरियड्स भी हो सकते हैं गड़बड़, एक्सपर्ट्स से समझें

Heatwave And Periods: बढ़ता तापमान शरीर के हार्मोनल संतुलन, मूड और पीरियड्स से जुड़े लक्षणों को गहराई से प्रभावित कर सकता है, जानें कैसे.

हीटवेव का असर सिर्फ सेहत पर ही नहीं, पीरियड्स भी हो सकते हैं गड़बड़, एक्सपर्ट्स से समझें
Can a heat wave delay your period?

Heatwave And Periods: बढ़ते तापमान में अपने साथ हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और गर्मी से होने वाली बीमारियां लेकर आता है, ऐसा तो हम सभी ने सुना है, लेकिन क्या आपको पता है बहुत ज्यादा तापमान शरीर के हार्मोनल संतुलन, मूड और पीरियड्स से जुड़े लक्षणों को गहराई से प्रभावित कर सकता है, खासकर उन महिलाओं में जो रिसोर्स की कमी वाले इलाकों में रहती हैं. चलिए विस्तार से समझते हैं कैसे हीटवेव पीरियड्स को प्रभावित कार सकता है.

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हीटवेव क्या है? | What Is A Heatwave?

WHO के अनुसार जब कई दिनों तक दिन और रात का तापमान बहुत ज्यादा रहता है और शरीर पर बेहद गर्मी का दबाव पड़ता है, तो ऐसी स्थिति को हीटवेव कहते हैं. जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में हीटवेव और तेजी से और बार-बार हो रही है.

बहुत ज्यादा गर्मी से शरीर पर क्या असर पड़ता है?

WHO के अनुसार, जब शरीर अपने तापमान को कंट्रोल नहीं कर पाता, तब हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है, जिससे दिल, किडनी और पहले से मौजूद बीमारियां जैसे डायबिटीज, दिल की बीमारी, सांस की समस्या और खराब हो सकती हैं. इतना ही नहीं लंबे समय तक गर्मी में रहने से शरीर में स्ट्रेस का लेवल भी बढ़ सकता है.

गर्मी पीरियड्स को क्यों प्रभावित करती हैं?

डॉ. साक्षी गोयल, सीनियर कंसल्टेंट (Obstetrics & Gynecology), रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के अनुसार, लंबे समय तक तेज गर्मी में रहने से शारीरिक तनाव बढ़ता है जिससे मासिक धर्म से जुड़े हार्मोन गड़बड़ा जाते हैं. गर्मी हाइपोथैलेमस को भी प्रभावित कर सकती है, जिसके कारण,

  • पीरियड्स देर से आ सकते हैं.
  • अनियमित हो सकते हैं. 
  • कुछ समय के लिए रुक भी सकते हैं. 
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डिहाइड्रेशन लक्षणों को और बढ़ा सकता है

हीटवेव में शरीर का पानी जल्दी-जल्दी कम होने लगता है, जिसके कारण पहले से मौजूद लक्षण और ज्यादा महसूस होते हैं, जैसे

  • थकान
  • सिरदर्द
  • मूड का बदलना
  • पेट का फूलना

डॉ. गोयल बताती हैं कि गर्मी में नींद ठीक न आने से भावनात्मक परेशानी और भी बढ़ जाती है खासकर उन महिलाओं में जिन्हें पीरियड्स के दौरान तेज दर्द (डिसमेनोरिया) होता है.

स्ट्रेस हार्मोन बढ़ना (कोर्टिसोल)

डॉ. कीर्ति खेतान Director of Obstetrics & Gynaecology सीके बिड़ला अस्पताल, बताती हैं कि गर्मी के कारण कोर्टिसोल नाम का हार्मोन ज्यादा बनता है. यह हार्मोन महिलाओं के एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन को प्रभावित करता है, जिससे पीरियड्स लेट होने लगते हैं.
बहुत पसीना आने से शरीर के मिनरल्स (सोडियम, पोटेशियम) कम हो जाते हैं और PMS के लक्षण जैसे चिड़चिड़ापन, थकान और सिरदर्द और बढ़ जाते हैं.

दिमाग और मूड पर गर्मी का असर

आर्टेमिस हॉस्पिटल की डॉ. निधि राजोटिया बताती हैं कि ज्यादा गर्मी से शरीर में सेरोटोनिन का स्तर बदल सकता है, जिससे

  • घबराहट
  • चिड़चिड़ापन
  • बेचैनी

जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. अगर ज्यादा पसीना निकलता है, तो शरीर से जरूरी मिनरल्स कम हो जाते हैं, जिससे पीरियड्स के दौरान कमजोरी और ज्यादा बेचैनी महसूस हो सकती है.

महिलाओं के लिए जरूरी टिप्स 

  • खूब पानी पिएं
  • ORS, नींबू पानी या नारियल पानी लें
  • धूप में ज्यादा समय न रहें
  • पोषक और हल्का खाना खाएं 
  • पूरी नींद लें
  • अपने पीरियड्स को ट्रैक करें

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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