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दिल्ली पुलिस ने दबोचा फर्जी कॉल सेंटर का मास्टरमाइंड, फ्रेंचाइजी के नाम पर करता था साइबर ठगी

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने जन सहायता केंद्र की फर्जी फ्रेंचाइजी और डिस्ट्रीब्यूटर आईडी देने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के मुख्य आरोपी मोहम्मद शिराज को गिरफ्तार किया है. यह गैंग नोएडा से फर्जी कॉल सेंटर चला रहा था.

दिल्ली पुलिस ने दबोचा फर्जी कॉल सेंटर का मास्टरमाइंड, फ्रेंचाइजी के नाम पर करता था साइबर ठगी
दिल्ली पुलिस ने दबोचा फर्जी कॉल सेंटर का मास्टरमाइंड, फ्रेंचाइजी के नाम पर करता था साइबर ठगी

द‍िल्‍ली में बाहरी उत्तरी जिला की साइबर क्राइम पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है. दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे साइबर धोखाधड़ी गिरोह के मुख्य सदस्य को गिरफ्तार किया है, जो नकली कॉल सेंटर चला रहा था. यह गैंग लोगों को मोटी कमाई कराने वाली बिजनेस फ्रेंचाइजी और डिस्ट्रीब्यूटर आईडी देने के नाम पर फ्रॉड करता था.

दिल्ली पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान मोहम्मद शिराज के रूप में हुई है, जो तुगलकाबाद एक्सटेंशन, कालकाजी, दिल्ली का रहने वाला है. उसके पास से अपराध में इस्तेमाल किए गए कई डिजिटल सबूत भी बरामद हुए हैं. 


डीसीपी ने जानकारी दी कि यह पूरा मामला तब सामने आया जब अफजल खान नाम के एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि उनसे ₹21,330 की ठगी की गई है. जालसाजों ने उन्हें जन सहायता केंद्र की फ्रेंचाइजी और डिस्ट्रीब्यूटर आईडी देने का झांसा दिया था, लेकिन पैसे मिलते ही वे गायब हो गए. इस शिकायत के आधार पर 23 मई  को साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज हुआ. 

डीसीपी ने बताया कि इसके बाद साइबर सेल की टीम ने तकनीकी जांच और पैसों के लेनदेन का बारीकी से पीछा किया. इससे पुलील को आरोपी की सही लोकेशन का पता लगाऔर मोहम्मद शिराज को रंगे हाथों दबोच लिया. दिल्ली पुलिस टीम ने आरोपी के पास से धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाले 2 एंड्रॉइड स्मार्टफोन, 1 वाई-फाई राउटर, 2 चालू सिम कार्ड बरामद किया है. 

फेसबुक पर जन सहायता केंद्र की फ्रेंचाइजी

दिल्ली पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि वह अपने साथियों (राहुल उर्फ अमित और वैष्णवी) के साथ मिलकर नोएडा से एक नकली कॉल सेंटर चला रहा था. यह गैंग सबसे पहले फेसबुक पर जन सहायता केंद्र की फ्रेंचाइजी देने के लुभावने विज्ञापन पोस्ट करता था. 

दिल्ली पुलिस के मुताबिक जब लोग जाल में फंसकर संपर्क करते, तो उनसे रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर QR कोड के ज़रिए पैसे ट्रांसफर करवा लिए जाते थे. जैसे ही पैसे खाते में आते, आरोपी तुरंत पीड़ित का नंबर ब्लॉक कर देते थे. बाद में ठगे गए पैसों को आपस में बांट लिया जाता था.  फिलहाल दिल्ली पुलिस अब इस गिरोह के बाकी साथियों को पकड़ने और दूसरे पीड़ितों का पता लगाने में जुटी है. मामले की आगे की जांच जारी है. 

दिल्ली पुलिस की नागरिकों से अपील

कोई भी सरकारी एजेंसी (CBI, TRAI, या पुलिस) आपको फोन या व्हाट्सएप कॉल पर गिरफ्तार नहीं कर सकती. ऐसा कोई कानून नहीं है. अपने पैसे को 'वेरीफाई' करने या अपना नाम पाक-साफ साबित करने के लिए कभी किसी को पैसे न भेजें. यह पूरी तरह फ्रॉड है.  निवेश पर पक्के मुनाफे का वादा हमेशा एक घोटाला होता है. व्हाट्सएप पर शेयर किए गए किसी भी ऐप के जरिए निवेश न करें.  अगर कोई आपको डराता या धमकाता है, तो तुरंत नेशनल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं. किसी भी अनजान कॉलर के साथ अपना OTP, बैंक खाते की जानकारी, या आधार/PAN कार्ड जैसी जरूरी चीजें कभी शेयर न करें. 

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