- 7 जून 2026 को भूटान के पुनाखा के पास 5.6 तीव्रता का भूकंप लगभग 10 किलोमीटर की उथली गहराई पर आया
- भूकंप के झटके पूर्वोत्तर भारत के असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तरी बंगाल और बिहार में महसूस किए गए
- ब्रह्मपुत्र बेसिन की मोटी जलोढ़ तलछट भू-कंपन को बढ़ाकर मध्यम तीव्रता के भूकंप को लंबी दूरी तक महसूस कराती है
7 जून, 2026 को रात लगभग 11:06 बजे भूटान के पुनाखा के पास लगभग 5.6 तीव्रता का भूकंप आया. मगर भूकंप के झटके पूर्वोत्तर भारत के कई क्षेत्रों में महसूस किए गए. असम, मेघालय सहित पूर्वोत्तर के अन्य हिस्सों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. भूकंप के झटके सिर्फ भूटान और भारत के पूर्वोतर राज्यों में ही नहीं बल्कि बांग्लादेश, नेपाल और चीन में भी महसूस किए गए.
हिमालय ने एक बार फिर याद दिलाया है कि यह पृथ्वी के सबसे सक्रिय भूवैज्ञानिक क्षेत्रों में से एक है. भूटान के पुनाखा के पास मात्र 10 किमी की उथली गहराई पर 5.6 तीव्रता का भूकंप आया, जिससे पूर्वी हिमालय क्षेत्र में व्यापक रूप से झटके महसूस किए गए. भूकंप का केंद्र भूटान स्थित पुनाखा बताया गया. भूकंप की तीव्रता 5.6 रही. इसकी गहराई 10 किमी रही. भारत के गुवाहाटी से भूकंप केंद्र की दूरी लगभग 250 किमी है.
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इस घटना को विशेष रूप से रोचक बनाने वाली बात केवल इसकी तीव्रता ही नहीं, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव क्षेत्र भी है. कंपन भूटान से बहुत दूर तक फैला और इसके कई हिस्सों में महसूस किया गया. भारत के असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तरी बंगाल और बिहार तक भूकंप के झटके महसूस किए गए.
क्यों इतनी दूरी तक महसूस हुए झटके
महसूस किया गया क्षेत्र पूरी तरह से गोलाकार नहीं है. बल्कि, यह पूर्वी हिमालयी चाप के साथ-साथ दक्षिण की ओर ब्रह्मपुत्र-बांग्लादेश के मैदानों तक फैला हुआ है. इससे पता चलता है कि भूकंप के अनुभव में क्षेत्रीय भूविज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका रही. ब्रह्मपुत्र बेसिन के नीचे मौजूद मोटी जलोढ़ तलछट भू-कंपन को बढ़ा सकती है, जिससे मध्यम तीव्रता के भूकंप भी आश्चर्यजनक रूप से लंबी दूरी तक महसूस किए जा सकते हैं.
यह भूकंप उस विशाल टकराव क्षेत्र में आया, जहां भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट के साथ धीमी लेकिन निरंतर गति से अभिसरण कर रही है. इस निरंतर टकराव से उत्पन्न तनाव हिमालय के निर्माण और दुनिया के कुछ सबसे महत्वपूर्ण भूकंपों के लिए जिम्मेदार हैं.
हालांकि, 5.6 तीव्रता के भूकंप को मध्यम माना जाता है, यह इस बात का एक और प्रमाण है कि पूर्वी हिमालय एक गतिशील और विकसित होती हुई टेक्टोनिक सिस्टम बनी हुई है.
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