दुनिया में जब भी किसी जहाज पर खतरनाक बीमारी फैलती है, तो मामला सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय चिंता बन जाता है. इन दिनों डच क्रूज शिप MV Hondius इसी वजह से सुर्खियों में है. जहाज पर हंतावायरस संक्रमण के कई मामले मिलने के बाद 3 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई यात्री और क्रू सदस्य बीमार बताए जा रहे हैं. इस जहाज पर 2 भारतीय नागरिक भी मौजूद हैं. हालांकि एक्सपर्ट्स और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी WHO ने फिलहाल भारत के लिए किसी बड़े खतरे से इनकार किया है. फिर भी इस घटना ने दुनिया को यह याद दिला दिया कि आधुनिक समय में बीमारी का एक छोटा प्रकोप भी कितनी तेजी से अंतरराष्ट्रीय संकट बन सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मामलों में असली लड़ाई अक्सर पर्दे के पीछे शुरू होती है.
आखिर क्या हुआ MV Hondius पर?
एमवी होंडियस (MV Hondius) एक एक्सपेडिशन क्रूज शिप है, जो अंटार्कटिका और दक्षिण अटलांटिक क्षेत्रों में यात्राएं कराता है. मई 2026 में जहाज पर अचानक कई यात्रियों में गंभीर संक्रमण के लक्षण दिखाई देने लगे. जांच में हंतावायरस संक्रमण की आशंका सामने आई. स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि 3 यात्रियों की मौत हो गई और कई लोगों को ICU में भर्ती करना पड़ा. कई देशों ने जहाज को तुरंत अपने बंदरगाह पर रुकने की अनुमति नहीं दी. इसके कारण जहाज को समुद्र में ही रोकना पड़ा.
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हंतावायरस क्या है?
हंतावायरस एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक वायरस है, जो आमतौर पर संक्रमित चूहों या उनके मल-मूत्र के संपर्क से फैलता है. कुछ मामलों में इंसानों के बीच सीमित संक्रमण की संभावना भी सामने आई है. WHO के मुताबिक, इस मामले में एंडीज हंतावायरस स्ट्रेन होने की आशंका है. यह स्ट्रेन बेहद दुर्लभ माना जाता है और इसके इंसानों में फैलने के कुछ ही मामले दर्ज हुए हैं.
डॉक्टर ने बताया, असली काम पर्दे के पीछे शुरू होता है. ग्लोबल इमरजेंसी रिस्पॉन्स स्पेशलिस्ट डॉक्टर सबीन कपासी के अनुसार, किसी अंतरराष्ट्रीय जहाज पर बीमारी फैलने के बाद तुरंत कई गुप्त लेकिन बेहद जरूरी प्रक्रियाएं शुरू हो जाती हैं.
उन्होंने बताया कि सबसे पहले इंटरनेशनल हेल्थ रेगुलेशन्स यानी IHR सिस्टम एक्टिव किया जाता है. इसके तहत जहाज की मेडिकल टीम पास के बंदरगाह और WHO को जानकारी देती है.
इसके बाद:
- यात्रियों की मूवमेंट ट्रैक की जाती है.
- संक्रमित लोगों को अलग किया जाता है.
- लैब टेस्ट की प्रक्रिया शुरू होती है.
- अलग-अलग देशों के स्वास्थ्य विभाग आपस में जानकारी साझा करते हैं.
डॉ. कपासी के अनुसार आम लोगों को यह कॉर्डिनेशन दिखाई नहीं देता, लेकिन यही कदम किसी बीमारी को वैश्विक संकट बनने से रोकते हैं.
क्रूज जहाज पर बीमारी फैलना इतना खतरनाक क्यों?
क्रूज जहाजों में हजारों लोग सीमित जगह में रहते हैं. अलग-अलग देशों के यात्री एक-दूसरे के संपर्क में आते हैं. ऐसे में संक्रमण तेजी से फैल सकता है.
एमवी होंडियस मामले में अर्जेंटीना, दक्षिण अफ्रीका, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम और केप वर्डे जैसे कई देशों को एक साथ काम करना पड़ाय यही वजह है कि इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी.
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डब्ल्यूएचओ क्या कर रहा है?
WHO लगातार इस मामले की निगरानी कर रहा है. संस्था का डिजीज आउटब्रेक न्यूज प्लेटफॉर्म दुनिया भर के देशों को अपडेट शेयर करने में मदद कर रहा है. हालांकि WHO किसी देश को मजबूर नहीं कर सकता कि वह जहाज को अपने बंदरगाह पर आने दे. यह फैसला हर देश अपनी सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को देखते हुए लेता है.
कोविड-19 के बाद अब कई देशों ने ऐसे मामलों के लिए नई इमरजेंसी योजनाएं तैयार की हैं. इनमें मेडिकल निकासी, जहाज पर क्वारंटाइन और खास आइसोलेशन जोन जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं.
क्या भारत को चिंता करनी चाहिए?
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल भारत में घबराने जैसी स्थिति नहीं है. भारतीय स्वास्थ्य एजेंसियों ने एहतियात के तौर पर निगरानी बढ़ा दी है. डॉक्टरों के अनुसार इस तरह के मामलों में सबसे जरूरी चीज होती है, समय पर जानकारी, तेज जांच और देशों के बीच सही तालमेल. यही कारण है कि WHO और कई देश लगातार मिलकर स्थिति को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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