Global Hug Your Kids Day 2024: आज ग्लोबल हग योर किड्स डे है. अपने बच्चों को बांहों में भरकर जोर की झप्पी देने का दिन. हर साल जुलाई महीने के तीसरे सोमवार को इसे मनाया जाता है. ग्लोबल हग योर किड्स डे यानि अपने बच्चे को आलिंगनबद्ध करने का दिन. कॉम्पिटिशन के इस दौर में तो इसकी अहमियत और बढ़ जाती है. ये दिन हमें मौका देता है कि हम अपने बच्चों के साथ एक्स्ट्रा समय गुजार सकें, उन्हें थोड़ा और समझ सकें. आखिर ग्लोबल हग योर किड्स डे मनाने की जरूरत क्या है और कब हुई इसकी शुरुआत? यहां जानिए इस दिन के बारे में सब कुछ.
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क्यों मनाया जाता है ग्लोबल हग योर किड्स डे? | Why Is Global Hug Your Kids Day Celebrated?
आईएएनएस से बातचीत में दिल्ली के मनोचिकित्सक डॉ अशोक शर्मा ने इस डे के बारे में बताया. उन्होंने कहा, मिशेल निकोल्स ने इस डे की नींव रखी. पहला ग्लोबल हग योर किड्स डे 2008 में मनाया गया. उन्होंने अपने बेटे मार्क की मौत के बाद ये फैसला लिया. मार्क आठ साल की उम्र में कैंसर से जिंदगी की जंग हार गया. उसकी मृत्यु के दस साल बाद मिशेल निकोल्स माता-पिता को याद दिलाना चाहती थीं कि बचपन क्षणभंगुर है और उन्हें अपने बच्चों को गले लगाने के लिए एक्स्ट्रा प्रयास करना चाहिए.
वैसे भी किसी को गले लगाना अपना स्नेह जताने का सबसे बढ़िया तरीका है. संभवतः हजारों सालों से एक सांस्कृतिक और पारिवारिक रिवाज रहा है, शायद मानवता की शुरुआत से ही. इसे अपना दुलार, अपने भाव दर्शाने का अचूक मंत्र कहा जा सकता है. वैसे यह सुकून पहुंचाने के तरीके के रूप में एक सहज क्रिया भी हो सकती है.
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कैसे मनाएं ग्लोबल हग योर किड्स डे? | How to Celebrate Global Hug Your Kids Day?
ग्लोबल हग योर किड्स डे मनाना भी सबसे सरल और आसान दिनों की तरह ही है. बस अपने लाडले या लाडली को गले ही तो लगाना है. वैसे तो मां पिता के प्यार को मापने का कोई पैमाना नहीं है लेकिन इस एक दिन को थोड़ा और खास बनाएं और अपने बच्चों को ग्लोबल हग योर किड्स डे के सम्मान में एक और झप्पी दें. बच्चे को सराहें और उसे अति अलग फील कराएं.
डॉ अशोक शर्मा कहते हैं बच्चों को गले लगाना जरूरी है, भले ही आपके बच्चे आपको गुस्सा दिलाते हो, बढ़ते बच्चे माता पिता के सिरदर्द का कारण बनते हों लेकिन ये भी तो तय है न कि वो आपका सबसे बेहतरीन उपहार और आशीर्वाद हैं.
बच्चों के लिए झप्पी के फायदे | Benefits of Hugs For Children
चिकित्सक मानते हैं कि एक झप्पी कई समस्याओं का हल है. एक प्यारा भरा हग सेहत के लिए भी नेमत है. डॉक्टर्स कहते हैं कि इससे तनाव कम होता है. वो भी तब जब बच्चों के लिए भटकाव के सौ कारण हों. आजकल सोशल मीडिया तो सबसे बड़ा है. अगर बड़ों की समस्याएं हैं तो बच्चों के लिए भी कम नहीं. तेजी सी भागती दुनिया में 10 सेकंड या उससे ज्यादा की झप्पी उनके और आपके भी तनाव को कम कर सकती है.
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डॉ शर्मा सेरोटोनिन न्यूरोट्रांसमीटर की बात करते हैं. सेरोटोनिन, जिसे मूड को कंट्रोल करने और मन को खुश रखने वाले हार्मोन के रूप में जाना जाता है. कहते हैं, बच्चे को जब आप अकारण हग करते हैं तो ये हार्मेन सीक्रिट होता है और उसके व्यक्तित्व के लिए अच्छा होता है. बच्चे को आप हग करते हैं तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और वो समाज का अच्छे से सामना करने में सक्षम होता है.
भारत में क्यों है इस दिन को मनाने की जरूरत?
आखिर इस दिन की जरूरत हमारे भारतीय समाज में क्यों होनी चाहिए? इस सवाल पर कहते हैं, मेरा मंत्र है फर्स्ट फेक इट एंड देन मेक इट. दरअसल, हमारे यहां आलिंगन संस्कृति नहीं है तो ऐसे में एक दिन से ही शुरुआत कर देते हैं. इसके बाद रोज आदत डालें और देखें बदलाव खुद आ जाएगा. एक खास बात गले लगाते वक्त शब्दों को बड़ी सावधानी से इस्तेमाल करना न भूलें.
इम्यूनिटी बढ़ती है?
चाहे सर्दी और फ्लू का मौसम हो या सामान्य जीवन, गले लगने से किसी की भी इम्यून सिस्टम को मदद मिल सकती है जो संक्रमण से लड़ने में शरीर की सहायता करती है और सामान्य स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है. इतना ही नहीं गले लगने से स्वास्थ्य, सुरक्षा और संरक्षा की भावना मिलती है, जिससे चिंता और अवसाद कम हो सकता है.
और आखिर में सबसे जरूरी और अहम बात बच्चे का मूड देखकर भी उसे गले लगाएं, कहीं ये न हो कि दोस्त से झगड़ के आया हो और आप उसके जबरदस्ती आलिंगन की कोशिश करने लगें.
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यह न भूलें कि बिना पूछे बच्चे को गले लगाना सीमाओं को पार कर सकता है जिससे वे असहज और कम सुरक्षित महसूस कर सकते हैं.
तो, बस उनसे पहले गले लगाने के लिए कहें - और उन्हें मना करने की आजादी दें. अगर उन्हें गले लगने में कोई दिलचस्पी नहीं है, तो शायद हाई फाइव एक अच्छा विकल्प हो सकता है!
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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं