आजकल 20 या 22 साल के युवाओं में बालों का झड़ना खूब देखने को मिल रहा है. जी हां, जो बाल पहले 40 या 50 की उम्र के बाद पतले होना या झड़ना शुरू होते थे, अब वो जवानी में ही गायब होने लगे हैं. Gen Z यानी आज के यंग लड़के बहुत कम उम्र में गंजेपन (Hair Loss) का शिकार हो रहे हैं.
हालांकि, इस परेशानी के बीच एक नया ट्रेंड भी शुरू हो गया है. आज के लड़के अपने झड़ते बालों को लेकर सिर्फ रोते नहीं बैठते, बल्कि तुरंत इसका इलाज (Treatment) ढूंढ रहे हैं. यही वजह है कि भारत के छोटे-बड़े शहरों में स्किन और बालों के डॉक्टरों (Dermatologists) के पास यंग लड़कों की लाइन लग रही है.
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शादी से पहले हेयर ट्रांसप्लांट का बढ़ा ट्रेंड-
एक वक्त था जब लोग सोचते थे कि हेयर ट्रांसप्लांट तो बहुत उम्रदराज या सेलिब्रिटीज ही करवाते हैं. लेकिन अब ऐसा बिल्कुल नहीं है. पुरानी पीढ़ियों के मुकाबले आज के Gen Z लड़के बाल उगाने या हेयर ट्रांसप्लांट कराने में सबसे आगे हैं.
सबसे दिलचस्प बात यह है कि लड़के खासतौर पर अपनी शादी से ठीक पहले हेयर ट्रांसप्लांट का सहारा ले रहे हैं. हर कोई अपनी शादी के दिन बेस्ट दिखना चाहता है, और बालों का लुक बंदे की पर्सनालिटी में सबसे बड़ा रोल प्ले करता है. इसलिए, रिस्क लेने के बजाय लड़के सीधा ट्रांसप्लांट या क्लिनिकल ट्रीटमेंट का रास्ता चुन रहे हैं.
क्या है गंजेपन की असली वजह?
एक्सपर्ट की मानें तो इतनी कम उम्र में बाल झड़ने के पीछे कई कारण हैं. सबसे बड़ी वजह है आजकल का लाइफस्टाइल. देर रात तक जगना, ऑफिस या पढ़ाई का स्ट्रेस, खान-पान में गड़बड़ी, जंक फूड और शहरों में बढ़ता पॉल्यूशन. इसके अलावा, कई बार गलत हेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल भी बालों को कमजोर बना देता है.

जब बाल तेजी से गिरने लगते हैं, तो लड़कों का कॉन्फिडेंस कम होने लगता है. इसी कॉन्फिडेंस को वापस पाने के लिए वे बिना देर किए डॉक्टर्स के पास पहुंच रहे हैं.
अरबों का बन रहा है हेयर केयर का बिजनेस-
यंग लड़कों की इस जरूरत ने बिजनेस की दुनिया में एक बहुत बड़ा मौका तैयार कर दिया है. स्टार्टअप्स और हेयर केयर कंपनियों को इसमें अरबों डॉलर का फायदा दिख रहा है. अगर आंकड़ों की बात करें, तो भारत में हेयर लॉस ट्रीटमेंट का बाजार 2024 में करीब $282 मिलियन (यानी लगभग 2,300 करोड़ रुपये) का था. और जिस रफ्तार से लड़के इलाज करवा रहे हैं, यह आने वाले कुछ सालों में दोगुना होकर $539 मिलियन (लगभग 4,500 करोड़ रुपये) से भी पार जाने की उम्मीद है.
अगर सिर्फ बालों के इलाज की बात न करें और पूरे हेयर केयर मार्केट तेल, शैम्पू, सीरम आदि को देखें, तो 2026 तक यह मार्केट 4.1 बिलियन डॉलर लगभग 34,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा. 2031 तक इसके 5.2 बिलियन डॉलर तक जाने का अनुमान है.
छोटे शहरों में भी बढ़ रही है डिमांड-
सबसे खास बात यह है कि यह ट्रेंड सिर्फ दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे बड़े मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है. अब देश के टायर-2 और टायर-3 शहरों यानी छोटे शहरों और कस्बों के लड़के भी अपने बालों को लेकर काफी सतर्क हो गए हैं. वे भी क्लिनिक जा रहे हैं, महंगे प्रोडक्ट्स खरीद रहे हैं और ट्रांसप्लांट कराने से नहीं हिचकिचा रहे हैं. कुल मिलाकर, बालों के झड़ने से भले ही यंग लड़के परेशान हों, लेकिन इस प्रॉब्लम ने देश में एक बहुत बड़ी इंडस्ट्री खड़ी कर दी है, जो आने वाले समय में और तेजी से बढ़ने वाली है.
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