त्योहारों का मौसम आते ही घरों में मिठाइयों, पकवानों और रंग-बिरंगे ड्रिंक्स की भरमार हो जाती है. हम में से अधिकतर लोग मिठाइयों और डेजर्ट्स में मौजूद चीनी पर तो नजर रखते हैं, लेकिन मॉकटेल्स, पैकेज्ड जूस, फ्लेवर्ड ड्रिंक्स और फिजी बेवरेजेज में छिपी चीनी को अक्सर इग्नोर कर देते हैं. नजरअंदाज कर देते हैं. यही हिडन शुगर आपकी रोजाना चीनी की मात्रा को उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़ा सकती है और सेहत पर असर डाल सकती है.
इस विषय पर सीके बिड़ला हॉस्पिटल के डायरेक्टर, डायबिटीज, ओबेसिटी एंड मेटाबॉलिक क्लिनिक डॉ. परस अग्रवाल का कहना है कि फेस्टिव सीजन में पूरी तरह मीठे ड्रिंक छोड़ने की जरूरत नहीं है, लेकिन लोगों को उनमें मौजूद छिपी हुई शुगर, पोर्शन साइज और कुल डेली इनटेक पर ध्यान देने की जरूरच होती है. वहीं, कोशिश करें कि इस सीजन में पानी, बिना चीनी वाले ड्रिंक और घर पर कम चीनी से तैयार ड्रिंक्स बेहतर आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. यहां विस्तार से समझते हैं इसे-
क्यों खतरनाक हैं पैकेज्ड ड्रिंक्स और मॉकटेल्स?
डॉक्टर परस का कहना है कि फेस्टिव सीजन में होने वाले प्रोग्राम के दौरान परोसे जाने वाले कई मॉकटेल्स और पैकेज्ड ड्रिंक भले ही आपको स्वादिष्ट और हेल्दी दिखते हैं, लेकिन इनमें बड़ी मात्रा में एडेड शुगर, फ्लेवर सिरप, फ्रूट जूस कॉन्संट्रेट और अन्य स्वीटनर्स मौजूद हो सकते हैं.
कई लोग ये मान लेते हैं कि फ्रूट्स से बने या नेचुरल लिखे हुए ड्रिंक हेल्दी होंगे, लेकिन हकीकत में इनमें भी काफी मात्रा में चीनी हो सकती है. यहां तक कि घर पर बनाए गए मॉकटेल्स में भी पैकेज्ड मिक्सर, स्वीट सोडा, सिरप या जरूरत से ज्यादा शहद मिलाने पर शुगर बढ़ सकती है.
ब्लड शुगर पर पड़ता है सीधा असर
डॉ. अग्रवाल का कहना है कि शुगर युक्त ड्रिंक्स में मौजूद कार्बोहाइड्रेट तेजी से अवशोषित होते हैं, जिससे ब्लड ग्लूकोज तेजी से बढ़ सकता है. पूरे फल में मौजूद फाइबर पाचन प्रोसेस को धीमा करता है और लंबे समय तक पेट भरा होने का एहसास देता है. इसके उलट फ्रूट जूस में फाइबर बहुत कम होता है. ऐसे में एक गिलास जूस के जरिए व्यक्ति कई फलों के बराबर शुगर ले सकता है, लेकिन उसे उतनी संतुष्टि महसूस नहीं होती.
डायबिटीज और मोटापे के मरीजों को रहना होगा ज्यादा सतर्क
डॉक्टर का कहना है कि डायबिटीज, प्रीडायबिटीज, इंसुलिन रेजिस्टेंस या मोटापे से जूझ रहे लोगों के लिए मीठे ड्रिंक्स का लगातार सेवन ब्लड शुगर कंट्रोल करना मुश्किल बना सकता है. हालांकि, किसी एक मौके पर मीठी ड्रिंक पी लेने से डायबिटीज नहीं होती, लेकिन लंबे समय तक ज्यादा शुगर लेने से वजन बढ़ने, अतिरिक्त कैलोरी जमा होने और मेटाबॉलिक समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. भोजन की गुणवत्ता, शारीरिक गतिविधि, जेनेटिक कारण और जीवनशैली भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं.
कितना शुगर इनटेक होता है सुरक्षित?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सिफारिश है कि किसी व्यक्ति की कुल दैनिक कैलोरी का 10 प्रतिशत से कम हिस्सा फ्री शुगर से आना चाहिए. बेहतर स्वास्थ्य लाभ के लिए इसे 5 प्रतिशत से भी नीचे रखने की सलाह दी जाती है. अगर कोई व्यक्ति रोजाना लगभग 2,000 कैलोरी लेता है, तो प्रतिदिन 50 ग्राम से कम फ्री शुगर, आदर्श रूप से 25 ग्राम से कम फ्री शुगर का सेवन करना चाहिए. फ्री शुगर में सिर्फ एडेड शुगर ही नहीं, बल्कि शहद, सिरप, फ्रूट जूस और फ्रूट जूस कॉन्संट्रेट में मौजूद शुगर भी शामिल होती है.
ड्रिंक खरीदते समय लेबल पढ़ना क्यों जरूरी है?
डॉक्टर कहते हैं कि त्योहारी सीजन में कोई भी ड्रिंक खरीदने से पहले उसका न्यूट्रिशन लेबल जरूर पढ़ें. कोशिश करें कि ड्रिंग में मौजूद कुल शुगर कितनी है, एक बोतल में कितनी सर्विंग्स हैं और इंग्रीडिएंट्स में ग्लूकोज सिरप, सुक्रोज, फ्रक्टोज, माल्टोज या फ्रूट जूस कॉन्संट्रेट तो नहीं है, इस बारे में जरूर जानकारी लें.
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