विज्ञापन

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) क्या है? इसके लक्षण, प्रकार और इलाज की पूरी जानकारी

यह बीमारी रीढ़ की हड्डी (spinal cord) की उन खास नसों को नुकसान पहुंचाती है जिन्हें 'लोअर मोटर न्यूरॉन्स' कहा जाता है.

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) क्या है? इसके लक्षण, प्रकार और इलाज की पूरी जानकारी

Spinal Muscular Atrophy (SMA) मांसपेशियों से जुड़ी एक जेनेटिक यानी अनुवांशिक बीमारी है. इसमें शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं और सूखने लगती हैं (जिसे एट्रोफी कहते हैं). यह बीमारी रीढ़ की हड्डी (spinal cord) की उन खास नसों को नुकसान पहुंचाती है जिन्हें 'लोअर मोटर न्यूरॉन्स' कहा जाता है. ये नसें हमारी मांसपेशियों के मूवमेंट को कंट्रोल करती हैं. जब ये नसें काम करना बंद कर देती हैं, तो दिमाग का मांसपेशियों से संपर्क टूट जाता है, जिससे वे हिलना-डुलना बंद कर देती हैं. 

इसमें कमजोरी शरीर के बीच वाले हिस्से (जैसे कंधे और जांघ) में ज्यादा होती है और समय के साथ बढ़ती जाती है.

क्या है स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA)?

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक गंभीर न्यूरोमस्कुलर विकार है जो मांसपेशियों की कमजोरी और शोष का कारण बनता है. यह जेनेटिक डिसऑर्डर मुख्य रूप से बच्चों और नवजात शिशुओं को प्रभावित करता है, जिससे चलने, बैठने और सांस लेने में कठिनाई हो सकती है.

SMA के 5 मुख्य प्रकार (Types of SMA)

डॉक्टर बीमारी शुरू होने की उम्र और गंभीरता के आधार पर इसे 5 हिस्सों में बांटते हैं:

Type 0 (जन्म से पहले): यह सबसे दुर्लभ है. इसमें मां को गर्भ में बच्चे की हलचल कम महसूस होती है. जन्म के समय बच्चा बहुत कमजोर होता है और अक्सर एक महीने के भीतर ही उसकी मृत्यु हो जाती है.
Type 1 (सबसे गंभीर): लगभग 60% मामले इसी के होते हैं. इसे 'वर्डनिग-हॉफमैन' बीमारी भी कहते हैं. इसके लक्षण जन्म के पहले 6 महीनों में दिखने लगते हैं. बच्चा गर्दन नहीं संभाल पाता और उसे सांस लेने व निगलने में बहुत दिक्कत होती है. बिना इलाज के ऐसे बच्चे 2 साल से ज्यादा नहीं जी पाते.
Type 2 (इंटरमीडिएट): इसके लक्षण 6 से 18 महीने की उम्र में दिखते हैं. बच्चे बैठ तो सकते हैं पर चल नहीं पाते. इसमें हाथों के मुकाबले पैरों में ज्यादा कमजोरी होती है. सही देखभाल से ये लोग 25 से 30 साल तक जी सकते हैं.
Type 3 (माइल्ड): इसके लक्षण 18 महीने की उम्र के बाद दिखते हैं. इसमें चलने-फिरने में दिक्कत होती है, लेकिन मरीज की उम्र (Life expectancy) पर ज्यादा असर नहीं पड़ता.
Type 4 (वयस्क अवस्था): यह सबसे हल्का रूप है जो 21 साल की उम्र के बाद शुरू होता है. इसमें कमजोरी बहुत धीरे बढ़ती है और मरीज ताउम्र चल-फिर सकता है.

Also Read: 9 करोड़ का इंजेक्शन! मौत से वापस लाने का इकलौता इलाज, क्या है SMA बीमारी, कैसे होती है और क्यों है इलाज इतना महंगा?

यह कितनी सामान्य बीमारी है?

भले ही लोग इसके बारे में कम जानते हों, लेकिन बच्चों में सिस्टिक फाइब्रोसिस के बाद यह दूसरी सबसे आम गंभीर जेनेटिक बीमारी है. आंकड़ों के मुताबिक, हर 6,000 से 11,000 बच्चों में से 1 बच्चा SMA के साथ पैदा होता है.

लक्षण और कारण (Symptoms and Causes)

SMA के प्रमुख लक्षण:

Type 0: गर्भ में कम हलचल, जोड़ों में अकड़न, सांस की गंभीर समस्या.
Type 1: गर्दन न रोक पाना, ढीला शरीर (Floppy baby), दूध निगलने में परेशानी, घंटी के आकार का सीना.
Type 2: पैरों में कमजोरी, रीढ़ की हड्डी का टेढ़ा होना (Scoliosis), हाथों का कांपना.
Type 3 और 4: मुख्य रूप से पैरों की मांसपेशियों में कमजोरी और चलने में परेशानी.

इसका कारण क्या है?

यहSMN1 नाम के जीन में खराबी (Mutation) के कारण होता है. हमारे शरीर को मांसपेशियों के काम करने के लिए 'SMN प्रोटीन' की जरूरत होती है. जब शरीर यह प्रोटीन नहीं बना पाता, तो नसें मरने लगती हैं और दिमाग शरीर की गतिविधियों पर कंट्रोल खो देता है.

यह बीमारी कैसे फैलती है?

यह 'ऑटोसोमल रिसेसिव' तरीके से माता-पिता से बच्चों में आती है. यानी अगर माता और पिता दोनों इस खराब जीन के वाहक (Carrier) हैं, तभी बच्चे को यह बीमारी होगी. अक्सर माता-पिता को खुद पता नहीं होता कि वे इसके कैरियर हैं.

जांच और टेस्ट (Diagnosis)

अगर डॉक्टर को शक होता है, तो वे ये टेस्ट करवा सकते हैं:

जेनेटिक टेस्टिंग: यह सबसे मुख्य टेस्ट है. खून की जांच से 95% मामलों का पता चल जाता है.
EMG और नर्व कंडक्शन स्टडी: यह देखने के लिए कि नसें और मांसपेशियां बिजली के संकेतों पर कैसे रिएक्ट कर रही हैं.
क्रिएटिन काइनेज (CK) टेस्ट: मांसपेशियों के टूटने की जांच के लिए.
प्रेगनेंसी में जांच: अगर परिवार में पहले से SMA है, तोAmniocentesis याCVS टेस्ट के जरिए गर्भ में ही इसकी जांच की जा सकती है.

ये भी पढ़ें: डॉक्टर ने बताया सिरदर्द और माइग्रेन का घरेलू इलाज, Migraine ऐसे होगा गायब जैसे कभी था ही नहीं

इलाज और दवाएं (Treatment)

हालांकि इसका कोई पक्का इलाज (Cure) नहीं है, लेकिन नई दवाओं ने उम्मीद जगाई है:

बीमारी बदलने वाली दवाएं (Disease-modifying therapy): Spinraza और Evrysdi जैसी दवाएं शरीर में प्रोटीन बनाने में मदद करती हैं.
जीन थेरेपी (Gene Replacement Therapy): Zolgensma नाम की दवा 2 साल से छोटे बच्चों को एक बार नसों के जरिए दी जाती है, जो खराब जीन को सही जीन से बदल देती है.
सपोर्टिव केयर: फिजियोथेरेपी, व्हीलचेयर, ब्रेसिस और सांस लेने में मदद करने वाली मशीनें (Ventilation).

बचाव (Prevention)

चूंकि यह जेनेटिक है, इसलिए इसे पूरी तरह रोकना मुश्किल है. लेकिन शादी या बच्चे की प्लानिंग से पहलेकैरियर टेस्टिंग (Carrier Testing) करवाई जा सकती है. इसके अलावा,IVF के दौरानPGD तकनीक से केवल स्वस्थ भ्रूण को ही गर्भ में इंप्लांट किया जा सकता है.

डॉक्टर से क्या पूछें?

  • बच्चे को किस टाइप का SMA है?
  • सबसे अच्छा ट्रीटमेंट विकल्प क्या है?
  • क्या परिवार के बाकी सदस्यों को भी टेस्ट करवाना चाहिए?
  • आने वाले समय में किस तरह की जटिलताएं (Complications) हो सकती हैं?

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com