T20 World Cup 2026: रविवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ (Ind vs Nz Final) 96 रन की खिताबी जीत के बाद देश भर में भारत की इस गाथा की गूंज है. घर-घर गली-गली चर्चाएं अभी भी हो रही हैं. और चर्चा कप्तान सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) के विश्व कप जीत के बाद तुरंत पिच की मिट्टी माथे पर लगाने की भी हो रही है. भारत ने जैसे ही अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर जैसे ही लगातार और कुल तीसरी बार टी20 विश्व कप पर कब्जा किया, तो कप्तान सूर्यकुमार यादव तुरंत ही पिच पर पहुंचे और उन्होंने मिट्टी को माथे से लगाया. देखते ही देखते सूर्यकुमार का यह अंदाज सोशल मीडिया पर तूफान सा वायरल हो गया था. तभी से लेकर भारतीय कप्तान के इस अंदाज के बारे में उनके खेल के प्रति प्रेम, सम्मान की बातें हो रही हैं. सूर्यकुमार मंगलवार को अपने गृहनगर मुंबई पहुंचे, तो NDTV ने इस बाबत पूछे सवाल पर यादव ने अपनी इस अंदाज के बारे में खुलकर जवाब दिया
सूर्याकुमार ने कहा कि बहुत ही अच्छा महसूस हो रहा है क्योंकि मेरे दिल में यही था कि जिस चीज से मुझे इतना मिला है, उसके प्रति सम्मान बनता है. क्रिकेट की पिच की वजह से ही आज मुझे इतना मिला है. इसीलिए मुझे लगा कि इस पिच की मिट्टी माथे से लगाने बहुत ही ज्यादा जरूरी है.' सूर्या ने दो बार टी20 विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा बनने पर कहा, 'बतौर कप्तान मुझे लगता कि ट्रॉफी जीतनी बहुत जरूरी है और अहमदाबाद में जीतना जरूरी है. ऐसे में एक बार फिर से विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा बनना बहुत ही सुखद अहसास है.'
कुछ ऐसा रहा वर्ल्ड कप में सूर्या का प्रदर्शन
यह सही है कि कप्तान सूर्यकुमार का बल्ला खत्म हुए विश्व कप में उम्मीद के हिसाब से नहीं बोला, लेकिन उनकी कप्तानी और फैसले बहुत ही शानदार रहे, जिन्होंने सभी की दिल जीत लिया. यादव ने खेले 9 मैचों की इनती ही पारियों में 1 बार नाबाद रहते हुए 30.25 के औसत से 242 रन बनाए. इसमें एक अर्द्धशतक भी शामिल हैं. सूर्या का सर्वश्रेष्ठ स्कोर नाबाद 84 रन रहा था.
कप्तानी में इस फैसले की हमेशा होगी चर्चा
यूं तो सूर्यकुमार यादव ने कप्तानी पूरे टूर्नामेंट में ही शानदार की, लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ जिस तरह उन्होंने बॉलिंग और खासकर जसप्रीत बुमराह का इस्तेमाल किया, वह भारत की खिताबी जीत में एक अहम मोड़ बन गया. सूर्या ने पावर-प्ले में ही पांचवां ओवर जसप्रीत बुमराह को थमाया, तो वहीं इंग्लैंड बैटिंग के आखिरी 5 में से दो ओवर जस्सी को दिए. और यह फैसला खिताबी जीत के हिसाब से ही कमाल कर गया. यही वजह है कि बहुत ही उम्दा कप्तानी ने उनके औसत को ऐसा बना दिया है, जो वास्तव में नंबरों में प्रदर्शित नहीं होता, या जिसे नहीं नापा जा सकता.
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