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अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का रिस्क 47% तक ज्यादा, नई स्टडी में खुलासा

Ultra‑processed Foods: पहले की रिसर्च ने दिखाया है कि UPFs का ज्यादा सेवन मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जुड़ा है, जिसमें मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, असामान्य कोलेस्ट्रॉल और इंसुलिन रेजिस्टेंस शामिल हैं.

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का रिस्क 47% तक ज्यादा, नई स्टडी में खुलासा
दिल की बीमारियां दुनिया भर में मौत का प्रमुख कारण हैं.

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में पैकेट वाले स्नैक्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स, इंस्टेंट नूडल्स और प्रोसेस्ड मीट जैसे फूड्स हमारी थाली का आम हिस्सा बन चुके हैं. इन्हें अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPFs) कहा जाता है, ऐसे इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स जिनमें एक्स्ट्रा शुगर, नमक, अनहेल्दी फैट, स्टार्च और इमल्सीफायर जैसे रसायन मिलाए जाते हैं. हाल की एक नेशनल लेवल की स्टडी में सामने आया है कि इनका ज्यादा सेवन करने वाले एडल्ट्स में हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा 47% तक ज्यादा हो सकता है. यह संबंध उम्र, धूम्रपान और आय जैसे कारकों को ध्यान में रखने के बाद भी बना रहा.

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड क्या होते हैं? |  What Are Ultra-processed Foods?

UPFs वे फूड्स हैं जो अपने नेचुरल रूप से काफी बदल दिए जाते हैं. रेगुलर प्रोसेस में कई नेचुरल न्यूट्रिएंट्स कम हो जाते हैं और स्वाद और शेल्फ-लाइफ बढ़ाने के लिए एडिटिव्स मिलाए जाते हैं. उदाहरण के तौर पर सॉफ्ट ड्रिंक्स, पैकेज्ड चिप्स और बिस्कुट, प्रोसेस्ड मीट (सॉसेज, सलामी), इंस्टेंट रेडी-टू-ईट प्रोडक्ट्स अमेरिका में एडल्ट्स की डाइट का लगभग 60% और बच्चों की डाइट का करीब 70% हिस्सा ऐसे ही फूड से आता है, यह आंकड़ा चिंता बढ़ाने वाला है.

स्टडी में क्या पाया गया?

फ्लोरिडा अटलांटिक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 2021–2023 के बीच 4,787 वयस्कों के डेटा का विश्लेषण किया. पार्टिसिपेंट्स ने दो दिनों तक अपनी डाइट का विस्तृत रिकॉर्ड दिया और बताया कि उन्हें कभी हार्ट अटैक या स्ट्रोक हुआ है या नहीं. डाइट से मिलने वाली कुल कैलोरी में UPFs का प्रतिशत निकालकर लोगों को चार समूहों में बांटा गया, कम से ज्यादा सेवन तक. परिणामों में पाया गया कि सबसे ज्यादा UPFs लेने वाले समूह में कार्डियोवस्कुलर डिजीज (हार्ट अटैक/स्ट्रोक) का जोखिम 47% ज्यादा था.

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पहले के शोध क्या कहते हैं?

पहले की रिसर्च ने दिखाया है कि UPFs का ज्यादा सेवन मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जुड़ा है, जिसमें मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, असामान्य कोलेस्ट्रॉल और इंसुलिन रेजिस्टेंस शामिल हैं. साथ ही, हाई-सेंसिटिविटी C-रिएक्टिव प्रोटीन (hs-CRP) जैसे सूजन के मार्कर भी बढ़ते हैं, जो भविष्य में हृदय रोग का संकेत माने जाते हैं.

यह संबंध क्यों मायने रखता है?

दिल की बीमारियां दुनिया भर में मौत का प्रमुख कारण हैं. अगर UPFs का सेवन वाकई जोखिम बढ़ा रहा है, तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए उतना ही जरूरी मुद्दा बन सकता है जितना कभी तंबाकू रहा था. डॉक्टरों की सलाह, लेबलिंग नीतियां और स्कूल-कैंटीन जैसे सार्वजनिक कार्यक्रमों पर इसका असर पड़ सकता है.

क्या करें? ये 5 तरीके आजमाएं:

  • लेबल पढ़ें: लंबे, अनजान रसायनों वाली सामग्री से बचें.
  • घर का खाना बढ़ाएं: दाल, सब्जियां, फल, साबुत अनाज प्राथमिकता दें.
  • शुगर-ड्रिंक्स कम करें: सॉफ्ट ड्रिंक की जगह पानी/नारियल पानी लें.
  • प्रोसेस्ड मीट सीमित करें: ताजा, कम प्रोसेस्ड प्रोटीन चुनें.
  • धीरे-धीरे बदलाव: अचानक सब छोड़ने के बजाय छोटे, टिकाऊ कदम उठाएं.

यह स्टडी चेतावनी देती है कि रोजमर्रा के आसान विकल्प लंबी अवधि में महंगे पड़ सकते हैं. अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पूरी तरह त्यागना हमेशा संभव नहीं, लेकिन उनका हिस्सा कम करना दिल की सेहत के लिए बड़ा कदम हो सकता है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

लेखक के बारे में
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अवधेश पैन्यूली
Senior Sub Editor
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