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क्या आप भी करते हैं प्लास्टिक का ज्यादा इस्तेमाल? फर्टिलिटी, हार्मोन और दिल के लिए खतरनाक! जानें क्या कहती है स्टडी

प्लास्टिक का इस्तेमाल हमारी रोजाना की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है, लेकिन कई रिसर्च बताती हैं कि माइक्रोप्लास्टिक शरीर के अंदर पहुंचकर नुकसान कर सकते हैं. स्टडीज़ के अनुसार, प्लास्टिक में पाए जाने वाले कुछ केमिकल एंडोक्राइन डिसरप्टर की तरह काम करते हैं, जो हार्मोनल संतुलन बिगाड़ सकते हैं.

क्या आप भी करते हैं प्लास्टिक का ज्यादा इस्तेमाल? फर्टिलिटी, हार्मोन और दिल के लिए खतरनाक! जानें क्या कहती है स्टडी
स्टिक ने हमारी जिंदगी आसान बनाई है, लेकिन लगातार और लापरवाह इस्तेमाल से सेहत पर असर पड़ सकता है.

Plastic Use Fertility Risk: आज की जिंदगी में प्लास्टिक हर जगह है पानी की बोतल, खाने के डिब्बे, पैकेजिंग, टूथब्रश, खिलौने, यहां तक कि कपड़ों में भी. प्लास्टिक सस्ता, हल्का और टिकाऊ होता है, इसलिए इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सुविधा हमारी सेहत की कीमत पर मिल रही है? हाल की कई वैज्ञानिक शोधों ने संकेत दिया है कि प्लास्टिक में मौजूद कुछ रसायन और माइक्रोप्लास्टिक कण शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं खासकर फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) और हार्ट हेल्थ के लिए.

प्लास्टिक और हार्मोन सिस्टम

कई प्लास्टिक प्रोडक्ट्स में BPA (Bisphenol A) और Phthalates जैसे रसायन पाए जाते हैं. ये रसायन एंडोक्राइन डिसरप्टर की तरह काम कर सकते हैं. एंडोक्राइन सिस्टम हमारे शरीर के हार्मोन को कंट्रोल करता है, जो मेटाबॉलिज्म, मूड, ग्रोथ और प्रजनन क्षमता के लिए जरूरी हैं. एंडोक्राइन सोसाइटी की रिपोर्ट के अनुसार, एंडोक्राइन डिसरप्टिंग केमिकल्स (EDCs) हार्मोनल असंतुलन, इनफर्टिलिटी और मेटाबॉलिक बीमारियों से जुड़े हो सकते हैं.

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माइक्रोप्लास्टिक की शरीर के अंदर तक पहुंच

माइक्रोप्लास्टिक बहुत छोटे प्लास्टिक कण होते हैं, जो हवा, पानी और खाने के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर सकते हैं. 2024 में न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों की आर्टरीज (धमनियों) में माइक्रोप्लास्टिक कण पाए गए, उनमें हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा ज्यादा था.

इसी तरह, एनवायरमेंट साइंस एंड टेक्नोलॉजी में प्रकाशित शोध में बताया गया कि माइक्रोप्लास्टिक ह्यूमन ब्लड और प्लेसेंटा (गर्भनाल) में भी पाए गए हैं.

कुछ अध्ययनों में माइक्रोप्लास्टिक को ओवरीज और टेस्टिकल्स में भी पाया गया है, जिससे प्रजनन क्षमता प्रभावित होने की आशंका जताई गई है.

हार्ट हेल्थ पर असर

जब माइक्रोप्लास्टिक आर्टरीज में जमा होते हैं, तो वे सूजन (inflammation) और ब्लॉकेज का कारण बन सकते हैं. इससे हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक जैसे जोखिम बढ़ सकते हैं. रिसर्चर्स का मानना है कि यह शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाते हैं, जो हृदय के लिए हानिकारक है.

किन चीजों में होता है ज्यादा खतरा?

  • प्लास्टिक की पानी की बोतलें
  • गर्म खाना रखने वाले प्लास्टिक कंटेनर
  • पैकेज्ड फूड की प्लास्टिक रैपिंग
  • माइक्रोवेव में प्लास्टिक का इस्तेमाल
  • सिंगल-यूज़ प्लास्टिक (चम्मच, कप, स्ट्रॉ)
  • सिंथेटिक कपड़े (पॉलिएस्टर आदि)

प्लास्टिक से कैसे बचें?

पूरी तरह प्लास्टिक छोड़ना मुश्किल है, लेकिन कुछ सावधानियां आपकी सेहत की रक्षा कर सकती हैं:

  • 1. कांच या स्टील की बोतल इस्तेमाल करें
  • 2. प्लास्टिक कंटेनर में गर्म खाना न रखें
  • 3. माइक्रोवेव में प्लास्टिक का उपयोग न करें
  • 4. BPA-Free प्रोडक्ट चुनें
  • 5. ताजा और बिना पैकिंग वाला खाना प्राथमिकता दें
  • 6. कपड़े चुनते समय प्राकृतिक फैब्रिक (कॉटन आदि) लें

प्लास्टिक ने हमारी जिंदगी आसान बनाई है, लेकिन लगातार और लापरवाह इस्तेमाल से सेहत पर असर पड़ सकता है.  फर्टिलिटी और हार्ट हेल्थ जैसे गंभीर मुद्दों से जुड़ी रिसर्च हमें सावधान रहने का संकेत देती है. सही जानकारी, छोटे बदलाव और जागरूकता से हम अपने और अपने परिवार की सेहत को बेहतर बना सकते हैं.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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