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फिल्म Dhuranthar-2 में दिखाई गई मर्करी पॉइजनिंग क्या असल में भी वैसे ही काम करती है? न्यूरोलॉजिस्ट ने बताया

क्या मरकरी पॉइजनिंग ठीक वैसे ही काम करती है जैसा कि धुरंधर 2 में दिखाया गया है? इस पर डॉ. मधुकर भारद्वाज, निदेशक एवं एचओडी, न्यूरोलॉजी, आकाश हेल्थकेयर ने हर पहलू को समझाया.

फिल्म Dhuranthar-2 में दिखाई गई मर्करी पॉइजनिंग क्या असल में भी वैसे ही काम करती है? न्यूरोलॉजिस्ट ने बताया
एक्सपर्ट्स ने सहमति जताई कि मर्करी की टॉक्सिसिटी धीरे-धीरे हो सकती है.

19 मार्च, 2026 को रिलीज हुई फिल्म धुरंधर, द रिवेंज में हमजा अली मजारी (रणवीर सिंह) दाऊद इब्राहिम उर्फ बड़े साहब (दानिश इकबाल) को जहर देने की कोशिश करता है. वह दाऊद की त्वचा पर गाढ़े मर्करी की एक बूंद डालने की कोशिश करता है. वह अपनी कोशिश में नाकाम रहता है, लेकिन सालों पहले कोई और इसमें कामयाब हो चुका था. फिल्म के क्लाइमैक्स में जमील जमाली (राकेश बेदी) हमजा को एक तस्वीर दिखाता है. यह तस्वीर तब की है जब जमील की पहली बार दाऊद इब्राहिम से मुलाकात हुई थी और उसने दाऊद से हाथ मिलाया था.

हाथ मिलाने के कुछ घंटों बाद, बड़े साहब को सबके साथ रात का खाना खाते समय तकलीफ महसूस होने लगती है. आख़िरकार, फिल्म में यह दिखाया गया है कि मर्करी की उस एक बूंद ने धीरे-धीरे उन्हें जहर दे दिया, जिसकी वजह से वे अपनी बाकी की जिदगी बिस्तर पर ही बिताने को मजबूर हो गए.

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क्या मर्करी पॉइजनिंग ठीक वैसे ही काम करती है जैसा 'धुरंधर 2' में दिखाया गया है?

NDTV से बात करते हुए, आकाश हेल्थकेयर में न्यूरोलॉजी के डायरेक्टर और HOD डॉ. मधुकर भारद्वाज ने कहा, "मर्करी एक जाना-माना न्यूरोटॉक्सिन है जो दिमाग और नर्वस सिस्टम पर काफी बुरा असर डाल सकता है. हालांकि, फिल्मों में इसे अक्सर ज्यादा असरदार दिखाने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है."  उन्होंने आगे कहा कि मर्करी के 'धीमे जहर' की तरह काम करने की बात का कुछ वैज्ञानिक आधार है, लेकिन जिस तरह से इसे फिल्मों में दिखाया जाता है, वह हमेशा पूरी तरह से सही नहीं होता."

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क्या मर्करी एक धीमा जहर है?

एक्सपर्ट्स ने इस बात से भी सहमति जताई कि मर्करी की टॉक्सिसिटी धीरे-धीरे हो सकती है, खासकर उन मामलों में जहां लंबे समय तक इसके संपर्क में रहा गया हो. यह आमतौर पर ऑर्गेनिक मर्करी के यौगिकों, जैसे मिथाइलमर्करी के साथ देखा जाता है, जो समय के साथ शरीर में जमा होते जाते हैं.

 न्यूरोलॉजिस्ट ने आगे कहा, ऐसे मामलों में शुरुआती लक्षण बहुत हल्के और अस्पष्ट होते हैं, जिनमें चिड़चिड़ापन, थकान, सिरदर्द और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई शामिल है. "जैसे-जैसे संपर्क बढ़ता है, नर्व्स सिस्टम से जुड़े और भी गंभीर लक्षण सामने आ सकते हैं, जैसे कि कंपकंपी, याददाश्त की समस्याएं, मिजाज में बदलाव और शरीर के अंगों के तालमेल में कमी.

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"हालांकि, मर्करी का बिना कटी-फटी त्वचा के अंदर तुरंत घुस जाना और एक छिपे हुए धीमे जहर की तरह तेजी से काम करना, पूरी तरह से सही नहीं है." उन्होंने समझाया कि एलिमेंटल पारा, जो तरल रूप में होता है, बिना कटी-फटी त्वचा के ज़रिए बहुत कम मात्रा में अवशोषित होता है; जबकि सबसे खतरनाक संपर्क तब होता है जब इसकी भाप सांस के ज़रिए शरीर में चली जाए या इसे निगल लिया जाए.

शरीर में मर्करी का पता लगाना और उसका इलाज

शरीर में मर्करी का पता लेबोरेटरी टेस्ट के जरिए लगाया जा सकता है. शरीर में मर्करी का पता लगाने के लिए ब्लड, यूरिन और बालों के सैंपल का विश्लेषण किया जा सकता है. एक्सपर्ट ने बताया कि नर्वस सिस्टम टेस्ट और इमेजिंग के जरिए नर्वस सिस्टम को हुए नुकसान की सीमा का पता लगाया जा सकता है.

डॉक्टर ने बताया कि "यह कोई ऐसा जहर नहीं है जिसका पता न लगाया जा सके, खासकर तब जब इसके लक्षण दिखने शुरू हो जाएं." 

इलाज का पहला स्टेप मरीज को मर्करी के संपर्क से पूरी तरह दूर करना है. शुरुआती स्टेज में कीलेशन थेरेपी, जिसका उपयोग शरीर से भारी धातुओं को निकालने के लिए किया जाता है, शरीर से मर्करी के कुछ रूपों को बाहर निकालने में मददगार साबित हो सकती है.

"हालांकि, एक बार जब नर्वस सिस्टम को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है, तो कुछ प्रभाव आंशिक या पूरी तरह से इम्यूटेबल हो सकते हैं. फिर भी अर्ली डायग्नोस और समय पर ध्यान देने से इलाज के परिणामों में सुधार हो सकता है और बीमारी को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है. सहायक उपचार में न्यूरोलॉजिकल रिहैबिलिटेशन के उपाय भी शामिल हैं. ये ठीक होने की प्रक्रिया में एक बड़ी भूमिका निभाता है."

क्या मर्करी की एक बूंद उतनी ही जानलेवा हो सकती है, जितना फिल्म 'धुरंधर 2' में दिखाया गया है?

फिल्म 'धुरंधर 2' में, जमील जमाली को दाऊद इब्राहिम से सिर्फ़ एक बार हाथ मिलाते हुए दिखाया गया है. लेकिन, इसके रिजल्ट उसके लिए बेहद गंभीर साबित होते हैं. डॉ. भारद्वाज ने बताया कि अगर पारे की एक बूंद भी बिना कटी-फटी त्वचा के संपर्क में आती है, तो उससे गंभीर ज़हर फैलने की संभावना कम ही होती है.

"अगर पारे को किसी बंद जगह में भाप के रूप में सांस के जरिए अंदर लिया जाए या जहरीले रूप में निगल लिया जाए, तो खतरा काफी बढ़ जाता है. यह सोचना कि मर्करी की एक बूंद चुपचाप एक लंबे समय तक चलने वाली, जानलेवा जहर फैलने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है, बात को बहुत ज्यादा आसान बनाकर समझना है. जहर का असर कई बातों पर निर्भर करता है, जिनमें मर्करी का केमिकल रूप शरीर में पहुंचने का तरीका मात्रा और ड्यूरेशन ऑफ कॉन्टैक्ट शामिल हैं."

डॉ. भारद्वाज ने चेतावनी दी, "मर्करी वाकई एक खतरनाक जहर है, जिसमें लंबे समय तक नुकसान पहुंचाने की क्षमता होती है. हालांकि, इसके असर आमतौर पर संपर्क के खास तरीकों और लगातार संपर्क से जुड़े होते हैं, न कि सिर्फ एक बूंद से."

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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