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दिल्ली-NCR में गर्मी ने किया लोगों का जीना मुश्किल! 9 से 5 की नौकरी क्यों लग रही है 15 घंटे की?

Delhi-NCR Heat Wave: दिल्ली-एनसीआर में गर्मी ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया है और NDMA से आ रही रिपोर्ट्स की मानें तो आने वाले कुछ दिन इसी तरह से बीतेंगे. भयंतर गर्मी का असर सेहत के साथ दिमाग पर भी पड़ता है. आइए जानते हैं कैसे ये गर्मी आपके शरीर और दिमाग पर असर डाल रही है.

दिल्ली-NCR में गर्मी ने किया लोगों का जीना मुश्किल! 9 से 5 की नौकरी क्यों लग रही है 15 घंटे की?
Delhi-NCR Heatwave Alert: दिल्ली-एनसीआर की गर्मी डाल रही है दिमाग पर असर. ( AI Image)

Heatwave Alert: 20 मई 2026 की सुबह जब नोएडा और गाजियाबाद के लोगों के फोन पर NDMA का अलर्ट आया, जिसमें लिखा था “लू से भी भीषण लू”, तब साफ हो गया कि ये सिर्फ एक सामान्य गर्म दिन नहीं है. ये शरीर और दिमाग दोनों पर सीधा हमला है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली-NCR में भीषण गर्मी और लू को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी रखा है. तापमान पहले ही 44.5°C पार कर चुका है और आने वाले दिनों में 46°C तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है. दोपहर के समय 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली उत्तर-पश्चिम की सूखी हवाएं हवा को चलते-फिरते भट्ठी जैसा बना रही हैं.

यही वजह है कि ऑफिस के घंटे अब पहले से ज्यादा लंबे और थकाने वाले महसूस हो रहे हैं और साइंस भी यही बताती है.

क्यों लग रहा है समय रुक गया है?

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इतनी गर्मी में शरीर चुपचाप गर्मी नहीं सहता, बल्कि उससे लड़ता है. बहुत ज्यादा तापमान और सूखी लू के दौरान शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए तेजी से काम करने लगता है. हार्ट रेट बढ़ जाती है, खून की नसें फैल जाती हैं और शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा करने की कोशिश करता है. लेकिन सूखी हवाएं शरीर से नमी बहुत तेजी से खींच लेती हैं. इसका मतलब है कि शरीर आपकी सोच से कहीं ज्यादा तेजी से डिहाइड्रेट हो रहा होता है. शरीर में हल्की पानी की कमी भी ध्यान लगाने की क्षमता कम कर देती है, थकान बढ़ाती है और छोटे काम भी ज्यादा मुश्किल लगने लगते हैं.

इसके साथ अगर रात में गर्मी की वजह से ठीक से नींद नहीं आती, क्योंकि रात का तापमान भी 25–27°C से नीचे नहीं जा रहा, तो लोग सुबह से ही थके हुए महसूस करते हैं. Occupational heat stress पर हुई स्टडी बताती हैं कि 24–26°C के ऊपर ही काम करने की क्षमता कम होने लगती है. और दिल्ली-NCR जैसी गर्मी में फोकस, याददाश्त और फैसले लेने की क्षमता पर असर पड़ता है. वही काम करने में शरीर और दिमाग दोनों को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है.

मानसिक रूप से भी गर्मी समय को लंबा महसूस कराती है. जब दिमाग लगातार चिपचिपे कपड़े, जलती स्किन, सिरदर्द और थकान महसूस करता रहता है, तो हर मिनट भारी लगने लगता है. ऐसे में एक घंटा भी सामान्य से ज्यादा लंबा महसूस होता है. अगर काम बोरिंग या बहुत दिमाग लगाने वाला हो, तो समय और धीरे बीतता लगता है.

दुनियाभर की रिसर्च भी यही कहती है कि 33–34°C के आसपास मॉडरेट काम करने की क्षमता 50% तक कम हो सकती है. ऑफिस में काम करने वाले लोग भी मानसिक थकान का शिकार होते हैं. भारत के मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर्स में भी गर्म दिनों में प्रोडक्टिविटी कम होने के सबूत मिल चुके हैं.

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बढ़ती गर्मी का बड़ा संकट

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2026 में गर्मी का ये दौर चिंता बढ़ाने वाला है. भारत के कई शहर इस साल दुनिया के सबसे गर्म शहरों की लिस्ट में शामिल रहे हैं. नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली जैसे कंकरीट से भरे शहर रात में भी गर्मी रोककर रखते हैं. कम होती हरियाली और तेजी से बढ़ते शहरीकरण ने हालात और खराब कर दिए हैं, खासकर रोज सफर करने वाले और बाहर काम करने वाले लोगों के लिए.

NDMA का “लू से भी भीषण लू” वाला अलर्ट गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, मथुरा समेत कई जिलों के लिए जारी किया गया है. ये बेहद गर्म और सूखी हवाएं सिर्फ तापमान नहीं बढ़ातीं, बल्कि हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और लंबे समय तक स्वास्थ्य पर असर का खतरा भी बढ़ाती हैं, खासकर कमजोर लोगों में.

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इस गर्मी में कामकाजी दिन को कैसे आसान बनाएं?

हालांकि मानसून आने में अभी कई हफ्ते बाकी हैं, लेकिन कुछ छोटी चीजें मदद कर सकती हैं:

  • समय-समय पर पानी, ORS या electrolytes लें. सूखी लू शरीर को प्यास लगने से पहले ही डिहाइड्रेट कर देती है.
  • ज्यादा जरूरी और मुश्किल काम सुबह के समय निपटाएं, जब तापमान थोड़ा कम होता है.
  • बीच-बीच में छोटे cooling breaks लें. पंखा, गीला तौलिया या 2–3 मिनट AC/छांव में रहना मदद कर सकता है.
  • बाहर निकलते समय हल्के कपड़े पहनें, छाता रखें और दोपहर की तेज धूप से बचें.
  • अगर चक्कर, उल्टी जैसा महसूस हो या बहुत ज्यादा थकान हो, तो तुरंत ध्यान दें और जरूरत पड़े तो डॉक्टर की मदद लें.

NCR में काम करने वाले लोगों से कहा जा रहा है कि जहां संभव हो, काम के समय में बदलाव करें, वेंटिलाइजेशन बेहतर रखें और यह समझें कि गर्मी सच में प्रोडक्टिविटी को प्रभावित करती है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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