बच्चों के पैरों में फ्लैट फीट दिखना अक्सर पेरेंट्स के लिए चिंता का विषय बन सकता है. अक्सर उन्हें लगता है कि बच्चे के पैरों की हड्डियों या विकास में कोई समस्या है. हालांकि, डॉक्टर का कहना है कि अधिकतर मामलों में फ्लैट फीट बच्चों के विकास का एक सामान्य हिस्सा होता है और इसके लिए किसी विशेष इलाज की जरूरत नहीं पड़ती.
मधुकर रेनबो चिल्ड्रेन हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स डायरेक्टर डॉ. मनोज पद्मन का कहना है कि छोटे बच्चों के पैरों का आर्च जन्म से पूरी तरह विकसित नहीं होता. पैरों में नरम टिश्यूज अधिक होने और आर्च के धीरे-धीरे विकसित होने के कारण बच्चों के पैर सपाट दिखाई दे सकते हैं. आमतौर पर 6 से 7 साल की उम्र तक पैरों का आर्च स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगता है. ऐसे में पेरेंट्स को ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं होती है. यहां समझते हैं इस विषय को अच्छे से -
फ्लेक्सिबल फ्लैट फीट है सबसे आम
डॉक्टर कहते हैं कि कई बच्चों में खड़े होने पर पैर सपाट दिखाई देते हैं, लेकिन जब वे पंजों के बल खड़े होते हैं, तो आर्च नजर आने लगता है. इस स्थिति को फ्लेक्सिबल फ्लैट फीट कहा जाता है. डॉक्टर कहते हैं कि ये लगभग 25 प्रतिशत लोगों में पाया जाता है और इसे बीमारी नहीं माना जाता.
डॉ. पद्मन कहते हैं कि पैरों का दिखना उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना उनका सही तरीके से काम करना. अगर बच्चा बिना दर्द के चल सकता है, दौड़ सकता है, कूद सकता है और खेल-कूद में एक्टव है, तो आमतौर पर चिंता की कोई बात नहीं होती. ऐसे बच्चों को किसी तरह के ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं होती है.
कब सतर्क रहने की होती है जरूरत?
डॉ. पद्मन का कहना है कि कुछ स्थितियां ऐसी हैं, जिनमें डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है. अगर बच्चे को लगातार पैर या टखने में दर्द रहता है, चलते समय परेशानी होती है, वह अपने हमउम्र बच्चों के साथ एक्टिविटी में पीछे रह जाता है या बार-बार टखने में चोट लगती है, तो एक्सपर्ट से जांच करानी चाहिए.
इसके अलावा अगर बच्चे की चाल असामान्य हो या जूते पहनने में असुविधा के कारण वह खेलकूद से बचने लगे, तो भी इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
रिगिड फ्लैट फीट हो सकता है गंभीर संकेत
डॉक्टर कहते हैं कि रिगिड फ्लैट फीट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है. इस स्थिति में पंजों के बल खड़े होने पर भी आर्च दिखाई नहीं देता. यह किसी अंदरूनी संरचनात्मक समस्या का संकेत हो सकता है और विशेष रूप से दर्द होने पर तुरंत जांच करानी चाहिए.
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