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घुटने की घिसी कार्टिलेज फिर से उगाई जा सकती है? नई रिसर्च से ऑस्टियोआर्थराइटिस मरीजों को मिली बड़ी उम्मीद

घुटनों की घिसी कार्टिलेज को फिर से उगाया जा सकता है. ऐसा हम नहीं, हाल ही में हुई रिसर्च में बताया गया है. यहां जानते हैं इस बारे में-

घुटने की घिसी कार्टिलेज फिर से उगाई जा सकती है? नई रिसर्च से ऑस्टियोआर्थराइटिस मरीजों को मिली बड़ी उम्मीद
Knee Cartilage Regeneration : कार्टिलेज फिर से उगाई जा सकती है- रिसर्च

World Osteoarthritis Day 2026 : घुटनों में दर्द, सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी और कुर्सी से उठते समय होने वाली तकलीफ को अक्सर लोग बढ़ती उम्र का हिस्सा मान लेते हैं. लेकिन कई मामलों में इसके पीछे ऑस्टियोआर्थराइटिस होता है, जो घुटनों की कार्टिलेज को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है. एबार कार्टिलेज घिस जाए तो उसे दोबारा बनाना मुश्किल माना जाता है. हालांकि अब एक नई रिसर्च ने इस सोच को चुनौती दी है.

अमेरिका की स्टैनफोर्ड मेडिसिन की रिसर्च में वैज्ञानिकों ने ऐसा तरीका खोजा है, जिससे भविष्य में घुटनों की डैमेज कार्टिलेज को दोबारा विकसित करने की संभावना बन सकती है. अगर ये टेक्नीक इंसानों में भी सफल होती है, तो लाखों मरीजों को फायदा मिल सकता है.

कार्टिलेज क्यों है इतनी ज्यादा जरूरी?

सीके बिड़ला हॉस्पिटल के डॉ. रामकिंकर झा, डायरेक्टर-ऑर्थोपेडिक्स का कहना है कि कार्टिलेज एक मुलायम और चिकना टिश्यू होता है, जो घुटनों में हड्डियों के सिरों को ढकता है. इसकी वजह से जोड़ आसानी से काम करते हैं और चलने-फिरने के दौरान घर्षण कम होता है. जब ये परत घिसने लगती है, तो दर्द, सूजन और जकड़न की समस्या शुरू हो जाती है. हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि बढ़ती उम्र, मोटापा, पुरानी चोट और ऑस्टियोआर्थराइटिस कार्टिलेज को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख कारण हैं.

रिसर्च में क्या मिला?

रिसर्चर्स ने 15-PGDH नाम के एक एंजाइम पर अध्ययन किया. ये एंजाइम उम्र बढ़ने के साथ शरीर की रिपेयर क्षमता को प्रभावित कर सकता है. रिसर्च में पाया गया कि इसे ब्लॉक करने पर बुजुर्ग चूहों में नई कार्टिलेज बनने लगी. वैज्ञानिकों ने ह्यूमन कार्टिलेज के सैंपल पर भी लैब में परीक्षण किए, जिनमें पॉजिटिव संकेत मिले. इससे उम्मीद जगी है कि भविष्य में शरीर की अपनी कोशिकाओं को सक्रिय करके कार्टिलेज रिपेयर की जा सकती है.

क्या घुटनों के रिप्लेसमेंट की जरूरत खत्म हो जाएगी?

डॉ. रामकिंकर झा का कहना है कि अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी. घुटनों के गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस में सिर्फ कार्टिलेज ही नहीं, बल्कि हड्डियां और पूरे जोड़ की संरचना प्रभावित हो सकती है. ऐसे में सिर्फ कार्टिलेज बढ़ा लेने से हर मरीज की समस्या हल नहीं होगी. हालांकि, अगर आगे चलकर ये टेक्नीक सुरक्षित और प्रभावी साबित होती है, तो यह घुटनs के रिप्लेसमेंट  को टालने में मदद कर सकती है.

अभी घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

घुटनों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए वजन नियंत्रित रखना, नियमित व्यायाम करना, चलना, तैराकी जैसी लो-इम्पैक्ट एक्टिविटी अपनाना और समय पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है. लगातार दर्द या चलने में परेशानी को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

फिलहाल ये रिसर्च शुरुआती चरण में है, लेकिन इससे ये उम्मीद जरूर जगी है कि आने वाले सालों में घुटनों की घिसी हुई कार्टिलेज को दोबारा उगाना संभव हो सकता है और ऑस्टियोआर्थराइटिस के इलाज में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.

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