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देर से सोना और एक्‍सरसाइज न करना... रोजाना की वो 6 आदतें जो मूड, नींद और याददाश्त को बना रही कमजोर

क्या आपकी रोज की आदतें दिमाग की सेहत को नुकसान पहुंचा रही हैं? डॉ. प्रवीण गुप्ता से जानिए मूड, याददाश्त, फोकस और नींद बेहतर रखने के लिए 6 एक्सपर्ट टिप्स.

Medically Reviewed By: Dr Praveen Gupta
देर से सोना और एक्‍सरसाइज न करना... रोजाना की वो 6 आदतें जो मूड, नींद और याददाश्त को बना रही कमजोर
दिमाग को तेज करने के लिए क्या करें?
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हम अक्सर अपनी रोजमर्रा की आदतों को सिर्फ शरीर की सेहत से जोड़कर देखते हैं, लेकिन हमारी दिनचर्या का सीधा असर दिमाग पर भी पड़ता है. देर रात तक मोबाइल चलाना, लगातार तनाव में रहना, शारीरिक गतिविधि कम करना, अनियमित खान-पान और पर्याप्त नींद न लेना धीरे-धीरे मूड, एकाग्रता, याददाश्त और मानसिक ऊर्जा को प्रभावित कर सकता है. वहीं कुछ आसान आदतों को रोज की जिंदगी में शामिल करके दिमाग को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है.

डॉ. प्रवीण गुप्ता, चेयरमैन, मैरिंगो एशिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो एंड स्पाइन (MAIINS), मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, के अनुसार, दिमाग की सेहत के लिए सिर्फ मानसिक एक्सरसाइज करना पर्याप्त नहीं है. नींद, शारीरिक गतिविधि, खान-पान और तनाव का प्रबंधन भी उतना ही जरूरी है.

डॉ. प्रवीण गुप्ता कहते हैं,

“मस्तिष्क हमारे पूरे शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करता है और हमारी रोज की जीवनशैली का उस पर लगातार प्रभाव पड़ता है. अच्छी नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार और तनाव को नियंत्रित रखने जैसी आदतें मूड, एकाग्रता और याददाश्त को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. छोटी-छोटी स्वस्थ आदतों को लंबे समय तक अपनाना मस्तिष्क के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है.”

1. नींद को प्राथमिकता दें 

नींद के दौरान शरीर के साथ दिमाग को भी आराम और रिकवरी का मौका मिलता है. लगातार कम या खराब नींद का असर ध्यान, याददाश्त, मूड और निर्णय लेने की क्षमता पर पड़ सकता है. इसलिए रोजाना सोने और जागने का समय लगभग एक जैसा रखने की कोशिश करें.

सोने से पहले मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल कम करना, देर रात तक काम न करना और शांत वातावरण में सोना नींद की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद कर सकता है.

2. रोज कुछ समय शारीरिक गतिविधि करें 

शारीरिक गतिविधि सिर्फ वजन नियंत्रित करने के लिए जरूरी नहीं है. नियमित चलना, व्यायाम, योग या दूसरी गतिविधियां मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हो सकती हैं.

डॉ. गुप्ता के मुताबिक, “नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर में रक्त संचार को बेहतर रखने के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर डालती है. रोज की दिनचर्या में अपनी क्षमता के अनुसार वॉक या एक्सरसाइज शामिल करना एक सरल लेकिन प्रभावी आदत है.”

3. दिमाग को सक्रिय रखें 

दिमाग को भी लगातार सक्रिय रखने की जरूरत होती है. किताब पढ़ना, नई चीज सीखना, पहेलियां हल करना, संगीत सीखना, लिखना या किसी नए कौशल पर काम करना मानसिक सक्रियता बनाए रखने में मदद कर सकता है.

हालांकि, सिर्फ पजल या ब्रेन गेम पर निर्भर रहने के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी में सीखने और सामाजिक रूप से सक्रिय रहने की आदत भी जरूरी है.

डॉ. प्रवीण गुप्ता कहते हैं: "ब्रेन हेल्थ किसी एक दवा या सप्लीमेंट पर निर्भर नहीं करती. अच्छी नींद, नियमित एक्सरसाइज, पौष्टिक भोजन और मानसिक सक्रियता का संयोजन लंबे समय तक मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है."

4. खान-पान का रखें ध्यान 

दिमाग को सही तरीके से काम करने के लिए पर्याप्त पोषण की जरूरत होती है. डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, मेवे और पर्याप्त प्रोटीन जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करना बेहतर विकल्प हो सकता है.

बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फूड, अतिरिक्त चीनी और असंतुलित खान-पान को सीमित करना भी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है. पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है, क्योंकि शरीर में पानी की कमी होने पर थकान और एकाग्रता प्रभावित हो सकती है.

5. तनाव को लगातार जमा न होने दें 

लगातार तनाव का असर मूड के साथ नींद और एकाग्रता पर भी पड़ सकता है. काम के बीच छोटे ब्रेक लेना, गहरी सांस लेने की तकनीक, योग, ध्यान, प्रकृति के बीच समय बिताना या परिवार और दोस्तों के साथ बातचीत तनाव कम करने में मदद कर सकती है.

डॉ. प्रवीण गुप्ता कहते हैं, “तनाव को पूरी तरह खत्म करना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन उससे निपटने का तरीका बदला जा सकता है. यदि तनाव लगातार बना हुआ है और नींद, मूड या रोजमर्रा के काम को प्रभावित कर रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.”

6. स्क्रीन टाइम और बैठने की आदत कम करें 

लंबे समय तक लगातार मोबाइल, कंप्यूटर या टीवी देखने और घंटों बैठे रहने की आदत शरीर के साथ दिमाग पर भी असर डाल सकती है. काम के दौरान नियमित अंतराल पर उठकर कुछ मिनट चलना, स्क्रीन से ब्रेक लेना और सोने से पहले डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल कम करना उपयोगी हो सकता है.

कब डॉक्टर की सलाह जरूरी? 

अगर लगातार भूलने की समस्या, ध्यान लगाने में परेशानी, अत्यधिक थकान, मूड में लगातार बदलाव, नींद की गंभीर समस्या या रोजमर्रा के काम करने में दिक्कत हो रही है, तो इसे सिर्फ व्यस्त दिनचर्या का हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कुछ मामलों में इन लक्षणों के पीछे अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारण भी हो सकते हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार, दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए किसी एक बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है. अच्छी नींद, नियमित गतिविधि, पौष्टिक भोजन, मानसिक सक्रियता, तनाव प्रबंधन और स्क्रीन से संतुलित दूरी- इन छह आदतों को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना लंबे समय में दिमाग, मूड और याददाश्त के लिए फायदेमंद हो सकता है.

एक्‍सपर्ट के बारे में : डॉ. प्रवीण गुप्ता मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स के चेयरमैन, मैरिंगो एशिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो एंड स्पाइन (MAIINS) हैं. वे देश के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्टों में से एक हैं और स्ट्रोक, मिर्गी, पार्किंसंस रोग, सिरदर्द तथा अन्य न्यूरोलॉजिकल विकारों के निदान एवं उपचार में विशेषज्ञता रखते हैं. न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में उनके व्यापक अनुभव और योगदान ने उन्हें एक प्रतिष्ठित चिकित्सा विशेषज्ञ के रूप में स्थापित किया है.

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