अगर आप रोजाना 7–8 घंटे की नींद ले रहे हैं, फिर भी सुबह उठने के बाद शरीर थका हुआ महसूस होता है, दिनभर सुस्ती रहती है, काम में मन नहीं लगता या छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन होने लगता है, तो सिर्फ नींद की अवधि को पर्याप्त मान लेना सही नहीं है. कई बार समस्या नींद के घंटों में नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता, तनाव, जीवनशैली या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या में छिपी हो सकती है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर और दिमाग को ठीक से आराम देने के लिए लगातार और गहरी नींद जरूरी है. यदि रात में बार-बार नींद टूटती है या व्यक्ति पर्याप्त समय बिस्तर पर रहने के बावजूद गहरी नींद नहीं ले पाता, तो सुबह उठने पर शरीर पूरी तरह तरोताजा महसूस नहीं करता.
नींद की गुणवत्ता भी उतनी ही जरूरी : डॉ. प्रवीण गुप्ता, चेयरमैन – मैरिंगो एशिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो एंड स्पाइन (MAIINS), मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स के अनुसार, 7–8 घंटे सोना अपने आप में पर्याप्त नींद की गारंटी नहीं है. नींद कितनी गहरी और लगातार रही, यह भी बेहद महत्वपूर्ण है.
तनाव और ज्यादा सोचने की आदत भी हो सकती है वजह : लगातार तनाव, काम का दबाव, पारिवारिक चिंताएं या सोने से पहले बहुत ज्यादा सोचने की आदत दिमाग को आराम की स्थिति में जाने से रोक सकती है. व्यक्ति बिस्तर पर तो कई घंटे रहता है, लेकिन उसका मस्तिष्क लगातार सक्रिय रहता है. इससे नींद हल्की हो सकती है और सुबह उठने के बाद भी थकान महसूस हो सकती है.
डॉ. प्रवीण गुप्ता कहते हैं कि लंबे समय तक तनाव रहने पर नींद और मानसिक स्वास्थ्य एक-दूसरे को प्रभावित कर सकते हैं. खराब नींद से चिड़चिड़ापन और एकाग्रता की समस्या बढ़ सकती है, जबकि लगातार तनाव नींद की गुणवत्ता को और खराब कर सकता है.
खर्राटे और स्लीप एपनिया को न करें नजरअंदाज : अगर किसी व्यक्ति को तेज खर्राटे आते हैं, रात में सांस रुकने या घुटन जैसा महसूस होता है, बार-बार नींद खुलती है या सुबह उठने पर सिरदर्द रहता है, तो स्लीप एपनिया जैसी समस्या की जांच जरूरी हो सकती है. इसमें सोते समय सांस लेने में बार-बार रुकावट आती है, जिससे नींद की सामान्य प्रक्रिया बाधित होती रहती है.
ऐसे व्यक्ति को रात में लंबे समय तक सोने के बावजूद दिन में नींद और थकान महसूस हो सकती है.
8 घंटे सोने के बाद भी थकान क्यों रहती है?
- नींद बार-बार टूटना
- स्लीप एपनिया
- लगातार तनाव और चिंता
- देर रात मोबाइल का इस्तेमाल
- एनीमिया या थायरॉइड की समस्या
- विटामिन B12 और विटामिन D की कमी
- शारीरिक गतिविधि की कमी
स्क्रीन टाइम और देर रात तक फोन भी जिम्मेदार : सोने से पहले लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप या टीवी देखने की आदत भी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है. खासकर देर रात तक सोशल मीडिया, वीडियो या काम में व्यस्त रहने से दिमाग सक्रिय रहता है और सोने का प्राकृतिक चक्र प्रभावित हो सकता है.
इसके अलावा, अनियमित सोने-जागने का समय, देर रात भारी भोजन, ज्यादा कैफीन, शारीरिक गतिविधि की कमी और दिनभर धूप में कम निकलना भी नींद पर असर डाल सकते हैं.
हर बार सिर्फ नींद को जिम्मेदार न मानें : अगर पर्याप्त नींद के बावजूद कई सप्ताह तक लगातार थकान बनी रहती है, तो इसके पीछे दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं. एनीमिया, थायरॉइड में गड़बड़ी, विटामिन की कमी, संक्रमण, कुछ दवाओं के प्रभाव या मानसिक तनाव जैसी स्थितियों में भी व्यक्ति को लगातार थकान महसूस हो सकती है.
डॉ. प्रवीण गुप्ता के मुताबिक, “अगर पर्याप्त नींद लेने के बावजूद लगातार थकान, दिन में अत्यधिक नींद, याददाश्त या एकाग्रता में कमी, मूड में बदलाव या सुबह उठने में परेशानी बनी रहती है, तो इसे सामान्य समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. लक्षण लगातार बने रहने पर डॉक्टर से सलाह लेकर कारण की जांच कराना जरूरी है. ”
क्या आपके शरीर में भी दिख रहे हैं ये संकेत?
- सुबह उठते ही थकान
- दिनभर सुस्ती
- बार-बार जम्हाई आना
- ध्यान लगाने में परेशानी
- चिड़चिड़ापन बढ़ना
- काम में मन न लगना
अगर ये लक्षण लगातार बने हुए हैं, तो इन्हें सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज न करें.
नींद बेहतर करने के लिए क्या करें?
- रोजाना सोने और जागने का समय लगभग एक जैसा रखें.
- सोने से कम से कम 30–60 मिनट पहले मोबाइल और लैपटॉप से दूरी बनाएं.
- दिन में नियमित शारीरिक गतिविधि करें.
- शाम के बाद चाय-कॉफी का सेवन सीमित करें.
- सोने से ठीक पहले बहुत भारी भोजन न करें.
- कमरे को शांत, अंधेरा और आरामदायक रखें.
- तनाव कम करने के लिए सोने से पहले गहरी सांस लेने या रिलैक्सेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है.
विशेषज्ञों के अनुसार, अच्छी नींद का मतलब केवल 7–8 घंटे बिस्तर पर रहना नहीं है. अगर नींद के बाद भी शरीर और दिमाग तरोताजा महसूस नहीं कर रहे हैं, तो इसके पीछे की वजह को समझना जरूरी है. लगातार बनी रहने वाली थकान और चिड़चिड़ापन शरीर की ओर से मिलने वाला संकेत भी हो सकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
एक्सपर्ट के बारे में : डॉ. प्रवीण गुप्ता मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स के चेयरमैन, मैरिंगो एशिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो एंड स्पाइन (MAIINS) हैं. वे देश के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्टों में से एक हैं और स्ट्रोक, मिर्गी, पार्किंसंस रोग, सिरदर्द तथा अन्य न्यूरोलॉजिकल विकारों के निदान एवं उपचार में विशेषज्ञता रखते हैं. न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में उनके व्यापक अनुभव और योगदान ने उन्हें एक प्रतिष्ठित चिकित्सा विशेषज्ञ के रूप में स्थापित किया है.
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