Cancer Ko Kaise Roke: कैंसर का नाम सुनते ही डर और कई सवाल दिमाग में आने लगते हैं. ज्यादातर लोगों के मन में यही सवाल होता है कि आखिर कैंसर अचानक कैसे हो जाता है? क्या यह बाहर से शरीर में आता है या अंदर ही कहीं से शुरू होता है? फेमस हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. एरिक बर्ग का मानना है कि कैंसर कोई बाहरी चीज नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर की नॉर्मल सेल्स से ही शुरू होता है. डॉ. बर्ग कहते हैं कि शरीर की हर सेल के अंदर एक छोटा-सा पावरहाउस होता है, जिसे माइटोकॉन्ड्रिया कहा जाता है. यही माइटोकॉन्ड्रिया हमारे शरीर को एनर्जी देता है.
जब किसी वजह से यह माइटोकॉन्ड्रिया डैमेज हो जाता है, तो सेल का व्यवहार बदलने लगता है. ऐसी सेल्स सही तरीके से एनर्जी नहीं बना पातीं और धीरे-धीरे अनकंट्रोल्ड तरीके से बढ़ने लगती हैं यहीं से कैंसर की शुरुआत मानी जाती है. उनके अनुसार, कैंसर का मतलब सिर्फ खराब सेल नहीं, बल्कि एनर्जी सिस्टम का बिगड़ जाना भी है.
माइटोकॉन्ड्रिया डैमेज क्यों होता है? | Why Do Mitochondria Get Damaged?
डॉ. बर्ग मानते हैं कि गलत लाइफस्टाइल, खराब खानपान, लगातार तनाव, नींद की कमी और प्रोसेस्ड फूड माइटोकॉन्ड्रिया को कमजोर कर सकते हैं. जब सेल को सही एनर्जी नहीं मिलती, तो वह खुद को बचाने के लिए गलत तरीके अपनाने लगती है, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकती है. इसी सोच के आधार पर डॉ. बर्ग कैंसर से बचाव के लिए कुछ जरूरी आदतों पर जोर देते हैं.
डॉ. बर्ग के अनुसार कैंसर से बचने के 5 जरूरी टिप्स | According to Dr. Berg, Here Are 5 Essential Tips to Prevent Cancer
1. रिफाइंड फूड्स से दूरी बनाएं
रिफाइंड शुगर, सफेद आटा, स्टार्च और रिफाइंड सीड ऑयल शरीर में सूजन बढ़ाते हैं. डॉ. बर्ग कहते हैं कि ये चीजें माइटोकॉन्ड्रिया पर दबाव डालती हैं और सेल्स की हेल्थ को खराब करती हैं. जितना हो सके प्राकृतिक और कम प्रोसेस्ड खाना चुनें.
2. पर्याप्त मात्रा में विटामिन D लें
डॉ. बर्ग के अनुसार, विटामिन D सिर्फ हड्डियों के लिए नहीं, बल्कि इम्यून सिस्टम के लिए भी बेहद जरूरी है. जब इम्यूनिटी मजबूत होती है, तो शरीर असामान्य सेल्स से बेहतर तरीके से निपट पाता है. वे कहते हैं कि रोजाना लगभग 10,000 IU विटामिन D इम्यून सिस्टम को सपोर्ट कर सकता है. हालांकि, इतनी मात्रा लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है.
3. इंटरमिटेंट फास्टिंग या लॉन्ग फास्टिंग
डॉ. बर्ग मानते हैं कि इंटरमिटेंट फास्टिंग से माइटोकॉन्ड्रिया को आराम और रिपेयर का समय मिलता है. इससे सेल्स की एनर्जी क्षमता बेहतर होती है और अनहेल्दी सेल्स कमजोर पड़ने लगती हैं.
4. रेगुलर एक्सरसाइज करें
रेगुलर एक्सरसाइज से शरीर की हर सेल तक ऑक्सीजन पहुंचती है. डॉ. बर्ग के अनुसार, एक्सरसाइज माइटोकॉन्ड्रिया को मजबूत बनाती है और सेल्स को हेल्दी बनाए रखने में मदद करती है.
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5. तनाव कम से कम लें
लगातार तनाव शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है. डॉ. बर्ग सलाह देते हैं कि लॉन्ग वॉक, अच्छी नींद और टॉक्सिक रिलेशनशिप से दूरी बनाकर तनाव को कम किया जाए. इससे सेल्स को खुद को ठीक रखने का मौका मिलता है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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