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This Article is From Nov 17, 2025

क्या सोते समय फोन तकिए के पास रखने से ब्रेन ट्यूमर हो सकता है? जानिए क्या कहता है WHO और स्टडीज

Phone Radiation Effects on Brain: क्या रात में फोन सिर के पास रखने से ब्रेन ट्यूमर हो सकता है? यह डर इतना आम है कि लोग उलझन में पड़ जाते हैं, फोन हानिकारक है या नहीं? क्या रेडिएशन सच में दिमाग को नुकसान पहुंचाता है? इसी कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए जरूरी है कि हम WHO और वैज्ञानिक अध्ययनों के नतीजों को समझें.

क्या सोते समय फोन तकिए के पास रखने से ब्रेन ट्यूमर हो सकता है? जानिए क्या कहता है WHO और स्टडीज
फोन शरीर से जितना पास होगा, RF-EMF की एक्सपोज़र उतनी बढ़ती है.

Sleeping with Phone Side Effects: आज की लाइफस्टाइल में मोबाइल फोन हमारे दिन की शुरुआत और रात का आखिरी साथी बन चुका है. बहुत लोग सोते समय फोन को तकिए के नीचे या बिल्कुल पास रखकर सो जाते हैं. कभी अलार्म के लिए, कभी मैसेज आने के डर से तो कभी सिर्फ आदत की वजह से. लेकिन, सोशल मीडिया पर बार-बार एक सवाल उठता है, क्या रात में फोन सिर के पास रखने से ब्रेन ट्यूमर हो सकता है? यह डर इतना आम है कि लोग उलझन में पड़ जाते हैं, फोन हानिकारक है या नहीं? क्या रेडिएशन सच में दिमाग को नुकसान पहुंचाता है? इसी कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए जरूरी है कि हम WHO और वैज्ञानिक अध्ययनों के नतीजों को समझें.

मोबाइल फोन, Wi-Fi और ब्लूटूथ सभी Radiofrequency Electromagnetic Fields (RF-EMF) उत्सर्जित करते हैं. ये वही ऊर्जा तरंगें हैं जो वायरलेस कम्युनिकेशन चलाती हैं. इन्हें देखकर अक्सर लोग डर जाते हैं, जबकि असलियत इससे थोड़ा अलग है. चलिए जानते हैं कि विज्ञान क्या कहता है और कौन-सी आदतें हमारी नींद और दिमाग की सेहत को बेहतर रख सकती हैं.

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WHO क्या कहता है? सबसे जरूरी फैक्ट

WHO की कैंसर रिसर्च एजेंसी IARC ने RF-EMF को Group 2B "संभावित कैंसरकारी" में शामिल किया है. इसका मतलब यह नहीं है कि मोबाइल फोन सीधे ब्रेन ट्यूमर बनाते हैं. इसका सीधा मतलब सिर्फ इतना है कि, कुछ शुरुआती डेटा चिंता बढ़ाता है, लेकिन पुख्ता और निर्णायक सबूत अभी नहीं मिले.

तो सच क्या है?

  • अब तक के बड़े और लंबे अध्ययनों में फोन उपयोग और ब्रेन ट्यूमर के बीच कोई लगातार या साफ संबंध नहीं मिला है.
  • आम मोबाइल उपयोग (calling, scrolling, Wi-Fi) को अभी तक खतरनाक स्तर का नहीं माना गया.
  • लेकिन "सुरक्षित दूरी" रखना हमेशा समझदारी है, ठीक वैसे ही जैसे धूप से बचने को सनस्क्रीन लगाते हैं.

तो क्या फोन तकिए के पास रखना सही है?

वैज्ञानिक तौर पर यह साबित नहीं हुआ कि फोन को पास रखने से ब्रेन ट्यूमर होगा. लेकिन यह ज़रूर साबित है कि: फोन शरीर से जितना पास होगा, RF-EMF की एक्सपोज़र उतनी बढ़ती है. रात में फोन पास होने से स्लीप क्वालिटी खराब होती है, ब्लू लाइट, नोटिफिकेशन, माइक्रो-अलर्ट्स दिमाग को एक्टिव रखते हैं. कुछ स्टडीज़ में लंबे समय तक नजदीकी संपर्क को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. यानी सीधा खतरा नहीं, लेकिन एक प्रिकॉशन ज़रूर है.

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आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

1. फोन को तकिए के नीचे न रखें: यह दोनों कारणों से गलत है, गर्मी बढ़ती है और रेडियोफ्रीक्वेंसी सीधे सिर के पास रहती है.

2. फोन को मेज पर या 1–2 फीट दूर रखें: यह दूरी एक्सपोज़र को कई गुना कम कर देती है.

3. सोने से 30–60 मिनट पहले स्क्रीन बंद कर दें: ब्लू लाइट मेलाटोनिन को दबाती है और नींद गहरी नहीं होने देती.

4. जरूरत हो तो एयरप्लेन मोड रखें: इससे RF-EMF लगभग शून्य हो जाता है, और नींद disturbance भी नहीं होता.

5. अलार्म चाहिए तो असली घड़ी का इस्तेमाल करें: यह सामान्य आदत आपकी नींद काफी सुधार सकती है.

6. Wi-Fi और Bluetooth को रात के समय बंद करना लाभदायक है. सिर्फ ऊर्जा बचत ही नहीं, दिमाग भी रिलैक्स मोड में रहता है.

मोबाइल फोन जीवन का हिस्सा हैं और उन्हें पूरी तरह छोड़ना न संभव है, न जरूरी. लेकिन यह सच है कि फोन को सिर के पास रखकर सोना एक अच्छी आदत नहीं है, चाहे वह रेडिएशन हो, ब्लू लाइट हो या नींद में खलल.

WHO और वैज्ञानिक अध्ययन साफ कहते हैं कि ब्रेन ट्यूमर का सीधा, ठोस सबूत नहीं है, लेकिन एहतियात अपनाकर हम अपनी दिमागी सेहत और नींद दोनों की रक्षा कर सकते हैं.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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