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खाना खाते ही क्यों आने लगती है भयंकर नींद? कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये 5 गलतियां!

Post-Meal Sleepiness: क्या आपको भी खाने के बाद 'Food Coma' महसूस होता है? जानें पोस्टप्रांडियल सोम्नोलेंस के 5 वैज्ञानिक कारण और दोपहर की सुस्ती को दूर भगाने के आसान उपाय.

खाना खाते ही क्यों आने लगती है भयंकर नींद? कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये 5 गलतियां!
Post Meal Sleepiness: खाना खाने के बाद शरीर दिमाग से खून हटाकर पाचन तंत्र की ओर भेज देता है.

Why Sleep After Eating: अक्सर दोपहर के भारी भोजन या किसी पार्टी की दावत के बाद हमारी आंखें अपने-आप झुकने लगती हैं. वैज्ञानिक भाषा में इसे 'पोस्टप्रांडियल सोम्नोलेंस' (Postprandial Somnolence) कहा जाता है. हम अक्सर इसे सामान्य सुस्ती मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन शोध बताते हैं कि यह आपके शरीर के इंटरनल क्लॉक और हार्मोनल बदलावों का संकेत हो सकता है. इस लेख में, हम चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा बताए गए उन 5 असली कारणों को डिकोड करेंगे जो खाने के बाद आपको बिस्तर की ओर खींचते हैं. 

क्या आपने कभी गौर किया है कि भारी या स्वादिष्ट खाना खाने के बाद आंखें अपने-आप बोझिल होने लगती हैं? त्योहारों की दावत के बाद झपकी आने लगे, लंच के बाद मीटिंग में नींद से जूझना पड़े या फिर रेस्टोरेंट से लौटते समय गाड़ी चलाते हुए सुस्ती महसूस हो यह अनुभव लगभग हर किसी को होता है. इस स्थिति को वैज्ञानिक भाषा में पोस्टप्रांडियल सोम्नोलेंस कहा जाता है, यानी खाना खाने के बाद नींद आना.

अक्सर यह माना जाता है कि खाना खाने के बाद शरीर दिमाग से खून हटाकर पाचन तंत्र की ओर भेज देता है, इसलिए नींद आती है. लेकिन, विज्ञान इस धारणा को गलत साबित कर चुका है. असल में भोजन के बाद आने वाली नींद कई फिजिकल प्रोसेस और आदतों का नतीजा होती है. अच्छी बात यह है कि इसे पूरी तरह रोका तो नहीं जा सकता, लेकिन कुछ उपायों से कम जरूर किया जा सकता है.

पोस्टप्रांडियल सोम्नोलेंस क्या है? | What is Postprandial Somnolence?

पोस्टप्रांडियल सोम्नोलेंस वह स्थिति है, जब भोजन करने के बाद व्यक्ति को सुस्ती या नींद महसूस होने लगती है. यह समस्या खासतौर पर दोपहर के समय ज्यादा देखी जाती है, जिसे आमतौर पर पोस्ट-लंच डिप या आफ्टरनून स्लंप कहा जाता है. कई शोधों में बताया गया है कि इसके पीछे शरीर के अंदर चलने वाली कई जैविक प्रक्रियाएं जिम्मेदार होती हैं.

1. सर्केडियन रिद्म (Body Clock)

हमारे शरीर में एक बायोलॉजिकल क्लॉक होती है, जिसे सर्केडियन रिद्म कहा जाता है. यह 24 घंटे के चक्र में शरीर के तापमान, हार्मोन, मेटाबॉलिज्म और एनर्जी लेवल को कंट्रोल करती है. दोपहर के समय यह बॉडी क्लॉक स्वाभाविक रूप से सुस्ती बढ़ाने लगती है. इसलिए लंच के बाद नींद आना काफी हद तक शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया है.

2. स्लीप ड्राइव (नींद की जरूरत)

जितनी देर हम जागते रहते हैं, उतनी ही शरीर में नींद की जरूरत बढ़ती जाती है. इसे स्लीप ड्राइव कहा जाता है. सुबह नाश्ते के बाद नींद कम आती है, लेकिन दोपहर या शाम के भोजन के बाद यह जरूरत ज्यादा हो जाती है, इसलिए सुस्ती महसूस होती है.

3. ब्रेन एक्टिविटी में कमी

अध्ययनों से पता चला है कि खाना खाने के बाद दिमाग की सक्रियता और सोचने-समझने की क्षमता कुछ समय के लिए धीमी हो जाती है. इस वजह से ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होती है और नींद आने लगती है.

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4. हार्मोनल बदलाव

भोजन करने के बाद शरीर में ऐसे हार्मोन बढ़ जाते हैं, जो नींद को बढ़ावा देते हैं, जैसे मेलाटोनिन और सेरोटोनिन. वहीं, सतर्कता बनाए रखने वाले कुछ हार्मोन कम हो जाते हैं. इन हार्मोनल बदलावों का सीधा असर हमारी आंखों और दिमाग पर पड़ता है।

5. साइटोकाइंस का प्रभाव

साइटोकाइंस ऐसे प्रोटीन होते हैं, जो शरीर की इम्यून और सूजन संबंधी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाते हैं. खासतौर पर ज्यादा कैलोरी वाला खाना खाने के बाद कुछ साइटोकाइंस का स्तर बढ़ जाता है, जिससे थकान और नींद का एहसास बढ़ सकता है.

वैज्ञानिकों का मानना है कि खाना खाने के बाद नींद आना शरीर की एक नेचुरल स्ट्रैटजी हो सकती है, ताकि शरीर पाचन पर ज्यादा ध्यान दे सके और एनर्जी की बचत हो. अगर आप इस सुस्ती को कम करना चाहते हैं, तो हल्का भोजन करें, खाने के बाद थोड़ी देर टहलें और पर्याप्त नींद लें.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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